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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पूर्वी नागालैंड के लिए हाल ही में हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय समझौते को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र के विकास को गति देगा और लोगों के लिए नए अवसर खोलेगा। यह समझौता एक दिन पहले केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ENPO) के बीच हस्ताक्षरित हुआ। ENPO छह पूर्वी जिलों में फैली आठ मान्यता प्राप्त नागा जनजातियों का प्रतिनिधित्व करता है। इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्र में तेज़ प्रगति सुनिश्चित करना और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, “यह वास्तव में एक ऐतिहासिक समझौता है, जो विशेष रूप से पूर्वी नागालैंड के विकास की दिशा को और सशक्त करेगा। मुझे विश्वास है कि यह लोगों के लिए अवसर और समृद्धि के नए रास्ते खोलेगा। यह उत्तर-पूर्व में शांति, प्रगति और समावेशी विकास के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
This is a historic agreement indeed, which will enhance the development trajectory of Eastern Nagaland in particular. I am sure it will open new avenues of opportunity and prosperity for the people. It reflects our unwavering commitment to peace, progress and inclusive growth in… https://t.co/bKsHl8rWOn
— Narendra Modi (@narendramodi) February 6, 2026
यह समझौता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया। यह समझौता नागालैंड के छह जिलों—तुएनसांग, मोन, किफिरे, लोंगलेंग, नोकलाक और शामाटोर—के लिए फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA) के गठन का मार्ग प्रशस्त करेगा और FNTA को 46 विषयों से संबंधित शक्तियों का हस्तांतरण करेगा।
विवाद-मुक्त उत्तर-पूर्व के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने पीएम मोदी की मंशा को स्पष्ट किया
समझौते में अन्य प्रावधानों के साथ FNTA के लिए एक मिनी-सचिवालय की व्यवस्था की गई है, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रधान सचिव करेंगे। इसके अलावा, पूर्वी नागालैंड क्षेत्र के लिए विकास बजट को जनसंख्या और क्षेत्रफल के अनुपात में साझा करने का प्रावधान भी किया गया है। हालांकि, यह समझौता किसी भी प्रकार से भारत के संविधान के अनुच्छेद 371(ए) के प्रावधानों को प्रभावित नहीं करता है।
इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि आज का दिन विवाद-मुक्त उत्तर-पूर्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसे उत्तर-पूर्व की कल्पना की है जो उग्रवाद, हिंसा और विवादों से मुक्त हो और पूरी तरह विकसित हो। आज हम उस दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि ग्यारह वर्ष पहले उत्तर-पूर्व में कई सशस्त्र समूह और विवाद क्षेत्र को विभाजन की ओर धकेल रहे थे और शांति को बाधित कर रहे थे। साथ ही, कई अंतर-राज्यीय विवाद भी राज्यों की शांति भंग कर रहे थे।
साल 2019 से अब तक 12 महत्वपूर्ण समझौतों पर हुए हस्ताक्षर
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हर विवाद का समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि 2019 से अब तक मोदी सरकार ने उत्तर-पूर्व में 12 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकारें केवल समझौते करती थीं, जबकि मोदी सरकार उन्हें अक्षरशः और भावना के अनुरूप लागू करती है।