Friday, 10th of July 2026

'घूसखोर पंडत' पर मायावती का बड़ा ज़ुबानी हमला, कहा - "या तो प्रतिबंध लग जाए, नहीं तो ..."

Edited By: Mohd Juber Khan | Updated at: February 06th 2026 01:42 PM
Trending News
'घूसखोर पंडत' पर मायावती का बड़ा ज़ुबानी हमला, कहा - "या तो प्रतिबंध लग जाए, नहीं तो ..."

'घूसखोर पंडत' पर मायावती का बड़ा ज़ुबानी हमला, कहा - "या तो प्रतिबंध लग जाए, नहीं तो ..."

लखनऊ/नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और देशभर में दलितों के मसलों पर पुरज़ोर आवाज़ उठाने वालीं मायावती एक बार फ़िर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट को लेकर ख़ासी चर्चाओं में हैं। दरअसल मायावती का मीडिया की सुर्ख़ियों में आना अनायास नहीं है, बल्कि उन्होंने घूसखोर पंडत को लेकर सवालिया निशान लगा दिया है। ऐसे में इस बात को कहना शायद ग़लत नहीं होगा कि नेटफ्लिक्स पर आने वाली फ़िल्म (वेब सीरीज़) 'घूसखोर पंडत' अपनी रिलीज़ से पहले ही बड़े विवादों के भंवर में फंस गई है। गौरतलब है कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने शुक्रवार (6 फरवरी, 2026) को इस फ़िल्म के टाइटल और कंटेंट पर कड़ा ऐतराज जताते हुए केंद्र सरकार से इसे तुरंत बैन करने की मांग की है।

क्या हैं मायावती के बयान के सियासी मायने?

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए लिखा कि यह बेहद चिंताजनक है कि फ़िल्मों में 'पंडित' जैसे शब्दों का इस्तेमाल नकारात्मक तरीक़े से किया जा रहा है. उन्होंने बेलागलपेट कहा, "यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यूपी में ही नहीं, बल्कि अब तो फ़िल्मों में भी 'पंडित' को घूसखोर/घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है, उससे ब्राह्मण समाज में ज़बरदस्त रोष है।"

यही नहीं, मायावती ने इसे 'जातिसूचक फ़िल्म' करार दिया और अपना रुख़ साफ़ करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है। हालाकि राजनीतिक गलियारों के जानकारों का मानना है कि मायावती का यह रुख़ ब्राह्मण समाज को अपनी ओर आकर्षित करने और उनकी भावनाओं के साथ खड़े होने की रणनीति का एक हिस्सा भी हो सकता है। 

लखनऊ में निर्देशक के ख़िलाफ़ हुई एफ़आईआर

वैसे बात अब महज़ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रह गई है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हज़रतगंज पुलिस स्टेशन में फ़िल्म के डायरेक्टर और उनकी टीम के ख़िलाफ़ एक एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है, इस तहरीर के बाद मीडिया हलकों में कानाफूसी का दौर शुरू हो चुका है।  जानकारी के बक़ौल यह एफआईआर इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने ख़ुद शिकायतों का संज्ञान लेते हुए दर्ज कराई है। आरोप है कि फ़िल्म का शीर्षक एक ख़ास जाति को निशाना बनाकर अपमानित करने के मक़सद से रखा गया है, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। बहरहाल फ़िल्म टीम पर धार्मिक और जातिगत भावनाओं को आहत करने और शांति व्यवस्था भंग करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है। हालाकि इस बाबत फ़िल्म के निर्माता नीरज पांडे ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है, "यह एक पूरी तरह से काल्पनिक (Fictional) कॉप ड्रामा है, 'पंडत' शब्द का इस्तेमाल किसी जाति या समुदाय पर टिप्पणी करने के लिए नहीं, बल्कि मुख्य किरदार के उपनाम के रूप में किया गया है, फ़िल्म का उद्देश्य किसी भी धर्म, जाति या वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।"

भविष्य में कोई बड़ा ख़ामियाज़ा फ़िल्मकारों ना भुगतना पड़े, शायद इसी वजह से फ़िल्म निर्माताओं ने फिलहाल फ़िल्म के सभी प्रमोशनल मटेरियल (टीज़र और पोस्टर्स) को हटाने का फैसला किया है। वहीं, इस वेब सीरीज़ के डायरेक्टर नीरज पांडे ने दर्शकों से अपील की है कि वे चाहते हैं कि दर्शक फ़िल्म को उसके पूरे संदर्भ में देखें, न कि केवल टाइटल के आधार पर कोई धारणा बनाएं।

          फ़िल्म के बारे में अहम जानकारी

विवरण                                                    जानकारी

मुख्य कलाकार                                    मनोज बाजपेयी (अजय दीक्षित उर्फ 'पंडत' के रोल में)

अन्य कलाकार                                     नुसरत भरूचा, साकिब सलीम, श्रद्धा दास

डायरेक्टर                                               रितेश शाह

निर्माता/लेखक                                   नीरज पांडे 

प्लेटफॉर्म                                               नेटफ्लिक्स (Netflix)

कुल-मिलाकर, यहां ग़ौर करने वाली बात ये भी है कि इस फ़ेहरिस्त में अकेली मायावती नहीं हैं, जिन्होंने घूसघोर पंडत के ख़िलाफ़ कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की है, ताज़ा जानकारी के बक़ौल, फ़िल्म 'घूसखोर पंडत' को लेकर देशभर में कई ब्राह्मण संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मोर्चा खोल दिया है। इसके अलावा, दिल्ली हाईकोर्ट में भी इसकी रिलीज़ के ख़िलाफ़ याचिका दायर की गई है। लिहाज़ा अब सबकी नज़रें केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पर हैं कि क्या वह मायावती की मांग और बढ़ते जन-आक्रोश के बीच इस पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या नहीं। वैसे अगर नेटफ्लिक्स पर आने वाली फ़िल्म अगर रीलीज़ नहीं होती है, तो इसका सीधा नुकसान फ़िल्मकारों तो भुगतना ही पड़ेगे, साथ ही उन दर्शक को भी यक़ीनन मायूसी हाथ लगेगी, जो इस फ़िल्म का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।

Punjabi Shorts

Latest News