लखनऊ: उत्तर प्रदेश का समूचा अवध का इलाक़ा और ख़ासतौर पर राजधानी लखनऊ अपने खान-पान के लिए ना केवल भारत में, बल्कि विदेशों में ख़ासा प्रसिद्ध है। अपने एक से एक लज़ीज़ व्यंजनों के लिए नवाबी शहर लखनऊ की पहचान किसी से छुपी नहीं है। यही वजह है कि राजधानी लखनऊ को यूनेस्को ने ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ घोषित किया है।
आपको बता दें कि ये सम्मान उस ख़ास शहर को मिलता है जो अपनी खानपान की परंपरा, सांस्कृतिक विविधता और नवाचार से विश्व को प्रेरित करता है। गौरतलब है कि यह घोषणा उज़्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित यूनेस्को की 43वीं जनरल कॉन्फ्रेंस में ‘वर्ल्ड सिटीज़ डे’ के मौक़े पर की गई है।
इस बाबत पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज देश का गौरव बन चुका है। लखनऊ की यह उपलब्धि उसके समृद्ध खानपान और संस्कृति की वैश्विक मंज़री है, जिसकी तस्दीक़ बाक़ायदा यूनेस्को ने कर दी है। यूनेस्को की मुहर के बाद जयवीर सिंह ने कहा कि लखनऊ की गैस्ट्रोनॉमी को मिली यह पहचान पर्यटन क्षेत्र की बढ़ती शक्ति और ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के विज़न के सपने को अमलीजामा पहनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आयाम है।
जानकारी के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने लखनऊ के लिए नामांकन 31 जनवरी 2025 को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को भेजा था। तमाम पहलूओं के जायज़े के बाद भारत सरकार ने 3 मार्च 2025 को यूनेस्को को अंतिम डॉसियर पेश किया, नतीजतना 31 अक्टूबर को आयोजित कॉन्फ्रेंस में लखनऊ को औपचारिक रूप से ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ नेटवर्क में शामिल कर लिया गया। इस सम्मान के ऐलान के बाद लखनऊ के उन कारीगरो में ख़ासा उत्साह देखा जा रहा है, जिनके हाथ के कमाल की वजह से, लखनऊ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असाधारण मक़ाम को छूआ है।
अवध के लज़ीज़ खाने हैं हमारी सांस्कृतिक धरोहर
यूनेस्को की इस सूची में अब दुनियाभर के 70 शहर शामिल हैं। इस साल 8 नए शहरों को भी इस नेटवर्क में जगह मिल चुकी है। इस बात को कहना ग़लत नहीं होगा कि लखनऊ का ये चयन उसकी सदियों पुरानी व्यंजन परंपरा और पाक कला धरोहर को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने वाला है। शायद तभी तो पर्यटक इस शहर की फिज़ा में आते ही बोल उठते हैं, मुस्कुराइये आप लखनऊ में हैं'
एक सर्वे की मानें तो साल 2024 में 82.74 लाख पर्यटकों ने लखनऊ का दीदार किया, जबकि 2025 के पहले छह महीनों में ही 70.20 लाख पर्यटक पहुच चुके हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि खानपान और संस्कृति, उत्तर प्रदेश में पर्यटन में इज़ाफ़ा करने के महत्वपूर्ण आधार बन चुके हैं।
यक़ीनन लखनऊ अब दुनिया के उन चुनिंदा शहरों की फ़ेहरिस्त में शामिल हो गया है, जो खानपान को कलच्लरल कम्यूनिकेश और सस्टेनेबल डेवेलपेमेंट का ज़रिया बना रहे हैं। ऐसे में पूरे आसार हैं कि आने वाले वक़्त में पर्यटन विभाग इस वैश्विक पहचान को और मज़बूत करने के लिए नई-नई तरकीबें खोजकर, शहर की अंतरराष्ट्रीय पहचान में चार चांद लगाने का काम करेगा। जानकारों का दावा है कि लखनऊ की यह उपलब्धि उसके अवधी व्यंजनों, नवाबी परंपरा और खानपान की विविधता की जीती-जागती मिसाल है। अब टुंडे कबाब से लेकर कुलचा-निहारी तक, लखनऊ का ज़ायका दुनिया के नक्शे पर लखनऊ और उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुका है।