Sunday, 11th of October 2026

"लोकतंत्र की हत्या की साज़िश": अखिलेश यादव का BJP और चुनाव आयोग पर हमला, 2.88 करोड़ वोट कटे

Edited By: Mohd Juber Khan | Updated at:
"लोकतंत्र की हत्या की साज़िश": अखिलेश यादव का BJP और चुनाव आयोग पर हमला, 2.88 करोड़ वोट कटे

"लोकतंत्र की हत्या की साज़िश": अखिलेश यादव का BJP और चुनाव आयोग पर हमला, 2.88 करोड़ वोट कटे

लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद आए आंकड़ों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। अखिलेश यादव का दावा है कि राज्य में 2.89 करोड़ (लगभग 2.90 करोड़) मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाना महज़ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि विपक्षी वोटों को ख़त्म करने की एक गहरी राजनीतिक साज़िश है।

"मुख्यमंत्री को पहले से कैसे पता था आंकड़ा?"

अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पुराने बयानों का हवाला देते हुए पूछा कि जब प्रक्रिया चल ही रही थी, तो मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से कैसे कह दिया था कि लगभग 4 करोड़ वोट काटे जाएंगे?

सवालिया निशान: अखिलेश ने कहा, "जब अभी ड्राफ्ट आया भी नहीं था, तब मुख्यमंत्री के पास यह संख्या कहां से आई? क्या यह सब पहले से तय था?"

विपक्ष का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और चुनाव आयोग के कुछ अधिकारी मिलकर एक विशेष वर्ग और विपक्ष के समर्थकों के नाम जानबूझकर लिस्ट से हटा रहे हैं।

2.89 करोड़ वोटों का गणित और सियासी गणित

SIR ड्राफ्ट के अनुसार, यूपी में मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। अखिलेश यादव ने इसे इस प्रकार रेखांकित किया:

संख्या: SIR से पहले पंजीकृत मतदाता लगभग 15.44 करोड़ थे, जो अब घटकर क़रीब 12.55 करोड़ रह गए हैं।

प्रति विधानसभा औसत: अखिलेश के अनुसार, अगर इस संख्या को राज्य की 403 विधानसभा सीटों से विभाजित करें, तो हर सीट पर औसतन 72,000 वोट काटे गए हैं।

साज़िश का दावा: उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें 85 से 90% नाम उन लोगों के हैं जो बीजेपी के ख़िलाफ़ वोट कर सकते थे।

चुनाव आयोग को 'जुगाड़ आयोग' बताया

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उसे 'बीजेपी का सहयोगी' करार दिया। उन्होंने कहा:

"चुनाव आयोग अब स्वतंत्र संस्था नहीं रह गई है। यह एक 'जुगाड़ आयोग' बन चुका है जो सत्ताधारी दल के इशारे पर काम कर रहा है। हम इस डेटा का घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे।"

'PDA प्रहरी' करेंगे डैमेज कंट्रोल

सपा प्रमुख ने घोषणा की कि पार्टी के कार्यकर्ता, जिन्हें 'PDA प्रहरी' (Pichda, Dalit, Alpsankhyak) कहा जा रहा है, अब गांव-गांव जाकर मतदाता सूची की जांच करेंगे।

FIR की चेतावनी: उन्होंने कहा कि अगर कहीं भी फर्ज़ी नाम जोड़े गए या वैध वोट काटे गए, तो पार्टी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराएगी।

जनता से अपील: उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे 6 मार्च को अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले अपना नाम ज़रूर चेक कर लें और फॉर्म-6 भरकर नया वोट बनवाएं।

बीजेपी का पलटवार

दूसरी ओर, बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सत्ता पक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी है और इसमें केवल उन लोगों के नाम हटाए गए हैं जो या तो मृत हैं, कहीं और शिफ्ट हो गए हैं या जिनके नाम दो जगह दर्ज थे। बीजेपी नेताओं का दावा है कि अखिलेश यादव अपनी संभावित हार देखकर पहले से ही "ईवीएम और वोटर लिस्ट" का बहाना ढूंढ रहे हैं।