Friday, 9th of October 2026

UP पुलिस की बड़ी कार्रवाई, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और शिष्य के खिलाफ POCSO के तहत FIR दर्ज

Edited By: Preeti Kamal | Updated at:
UP पुलिस की बड़ी कार्रवाई, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और शिष्य के खिलाफ POCSO के तहत FIR दर्ज

UP पुलिस की बड़ी कार्रवाई, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और शिष्य के खिलाफ POCSO के तहत FIR दर्ज

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी समेत अन्य लोगों के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत विशेष अदालत के निर्देश पर झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई है। यह मामला शनिवार देर रात करीब 11:30 बजे दर्ज किया गया, जब पुलिस को अदालत का आदेश प्राप्त हुआ। अधिकारियों ने पुष्टि की कि न्यायिक निर्देश के अनुपालन में कार्रवाई की गई।

सोशल मीडिया की एक पोस्ट के मुताबिक, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज में अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में देर रात FIR दर्ज की गई। FIR में उनके शिष्य मुकुंदानंद सहित 2–3 अज्ञात लोगों को भी नामजद किया गया है। पुलिस के अनुसार, कोर्ट का आदेश बुधवार शाम मिला, जिसके बाद तत्काल मुकदमा कायम कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। FIR में नाबालिगों से यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच प्रारंभ कर दी गई है और संबंधित पक्षों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

धारा 351(3) और POCSO की धाराएं 3, 4(2), 6, 16, 17 और 51 के तहत मामला दर्ज

FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 351(3) के तहत, साथ ही बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO) की धाराएं 3, 4(2), 6, 16, 17 और 51 के अंतर्गत दर्ज की गई है। आरोप 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच की कथित घटनाओं से संबंधित हैं। शिकायत में नाबालिगों से जुड़े यौन अपराधों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

SHO को मिला बिना विलंब FIR दर्ज करने का आदेश

विशेष न्यायाधीश (POCSO) विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। अदालत ने अपने आदेश में शिकायत, दो कथित पीड़ितों के बयान, स्वतंत्र गवाहों की गवाही और प्रयागराज के सहायक पुलिस आयुक्त द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट का उल्लेख किया। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री प्रासंगिक कानूनों के तहत संज्ञेय और दंडनीय अपराधों का खुलासा करती है। इसलिए झूंसी थाने के SHO को बिना विलंब FIR दर्ज करने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

अदालत ने यह भी कहा कि जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों को एकत्र करने की आवश्यकता हो सकती है। यदि ऐसा कोई साक्ष्य बरामद होता है तो उसे उचित फॉरेंसिक प्रक्रिया के तहत जांचा और सत्यापित किया जाए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों मनगढ़ंत बताया

आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “अदालत की अपनी प्रक्रिया होती है। अदालत ने शिकायत दर्ज की है और अब जांच करेगी। हमने अदालत को सूचित किया है कि यह मामला मनगढ़ंत है। आशुतोष (शिकायतकर्ता) कांधला थाने में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज है। कई लोग स्वयं पीड़ित हैं और कहते हैं कि उसने उनके खिलाफ भी झूठे मुकदमे दर्ज किए हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “हम पर आरोप लगाने वाला व्यक्ति खुद को जगद्गुरु कहने वाले व्यक्ति का शिष्य है। इसका मतलब है कि सनातन धर्म को किसी बाहरी व्यक्ति से खतरा नहीं है, बल्कि भीतर के ही लोग हिंदू धर्म और शंकराचार्य संस्था को नष्ट करना चाहते हैं।”