GTC News: आख़िरकार तिगरी गंगा मेला का दुग्धाभिषेक व महाआरती के साथ शुभारंभ हो गया है। माना जाता है कि ऐतिहासिक तिगरी गंगा मेला पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़े मेला होता है। मेले में भव्यता और दिव्यता का आग़ाज़ ऐसा है कि समूचे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गूंज सुनाई दे रही है। हर-हर गंगे के जयकारे हर किसी को अपनी तरफ़ आकर्षित कर रहे हैं।
गौरतलब है कि कार्तिक पूर्णिमा पर हर साल 'तिगरी गंगा मेला' का आयोजन किया जाता है। एक अंदाज़े के मुताबिक़ पिछले साल इस मेले में क़रीब 30 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। इस बार कमोबेश 40 लाख श्रद्धालुओं के मेले में पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक़, गंगा किनारे हवन-पूजन किया गया, इसके बाद मंत्रोच्चारण के साथ गंगा मैया का दुग्धाभिषेक किया गया, फ़िर काशी की तर्ज पर महाआरती का आयोजन हुआ, जिसने मेलाधाम पर अलग ही छटा बिखेरी। माहौल ऐसा हो गया जैसे पूरा तिगरीधाम भक्तिमय हो गया हो, हर तरफ़ मंत्रों की गूंज सुनाई दी, जिससे श्रद्धालुओं ने आनंद का एहसास किया। गंगा मेला के उद्घाटन के साथ ही तिगरीधाम पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी शुरू हो गया है।
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— DM Amroha (@dmamroha) November 2, 2025
नायाब है साधु-संतों का कल्पवास
गंगा की रेती पर सुबह के समय हल्की ठंड के मौसम में जप-तप, स्नान-दान, कीर्तन-प्रवचन आदि के लिए बसी तंबुओं की एक धार्मिक नगरी पूरी तरह से तैयार है, जहां पर साधु-संत कल्पवास भी कर रहे हैं।
दरअसल इन संतों के रंग निराले हैं, साधु-संत अपनी धूनी रमाए तपस्या कर रहे हैं या फिर कीर्तन-प्रवचन करते नज़र आ रहे हैं, इतना ही नहीं कई बाबा तो लंबी जटाओं के साथ मेले में घूमकर इस आस्था की नगरी की शोभा बढ़ा रहे हैं। ख़ासतौर पर जूना अखाड़ा, पंचदशानन आह्वान अखाड़ा, श्रीखड़ दर्शन साधु सेवा समिति व नागा साधु के डेरे मेले की शोभा बढ़ा रहे हैं।
तिगरी मेले को लेकर क्या है साधु-संतों का नज़रिया?
डॉ. कर्णपुरी जी महाराज के बक़ौल, "हर वर्ष मां गंगा हमें बुलाती हैं। यहां आकर अध्यात्म का रंग बढ़ जाता है, लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ साक्षी है कि मां गंगा सबका भला करती हैं, सनानत की यही पहचान है, सनानत को आगे ले जाने के लिए सभी तरह के भव्य आयोजन होने चाहिए, अग्रिम वर्ष यहां अमृत स्नान भी करेंगे।"
नरोत्तम गिरी जी महाराज बोले, "सनातन का अर्थ क्या है, क्यों विश्व आज सनातन को अपना रहा है, कुंभ के बाद इस भव्य मेले में आकर यह स्पष्ट पता चलता है, यहां मां गंगा के आंचल में रह कर परम आनंद की प्राप्ति होती है, प्रात:काल स्नान, जप, तप व हवन ही हमारी परंपरा की पहचान है।"
बुद्ध बाबा जी महाराज ने कहा, "कार्तिक पूर्णिमा पर यहां भव्य स्नान होगा। जिसके लिए संत समाज प्रतिक्षारत है, कुंभ की भांति तिगरी मेले को भी भविष्य में पूरे सनानती रंग में रंगना है, यह मेला दिव्य, भव्य व श्रद्धा से परिपूर्ण है, गंगा मां के आंचल में भक्ति व श्रद्धा का अद्भुत संगम है यह मेला।"
हरिओम गिरी जी महाराज की मानें, तो, "पवित्र स्नान के बाद प्रतिदिन दिनचर्या शुरू होती है, दिनभर होने वाले धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, मां गंगा के आशीर्वाद से मेला सकुशल संपन्नता की ओर अग्रसर है, यहां धार्मिक कर्म कर असीम आनंद की प्राप्ति हो रही है।"