लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और नीतिगत फैसला लिया है। अब राज्य में आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में मान्य नहीं माना जाएगा। इस निर्णय का सीधा असर सरकारी सेवाओं, नियुक्तियों, और दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रियाओं पर पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश में अब आधार कार्ड को जन्म प्रमाण पत्र या जन्म तिथि के प्रमाण के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियोजन विभाग ने सभी विभागों को निर्देश जारी किए हैं। pic.twitter.com/p8mbdiJV6A
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 28, 2025
क्यों लिया गया ये फैसला ?
राज्य सरकार का यह फैसला भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक पत्र के आलोक में लिया गया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरणने स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को किसी प्रमाणित दस्तावेज़ के आधार पर सत्यापित नहीं किया जाता है, बल्कि कई मामलों में यह सिर्फ आवेदक द्वारा स्व-घोषित होती है।
जन्म प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता और कानूनी महत्व को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि आधार को जन्म प्रमाण पत्र मानने से सरकारी रिकॉर्ड और डेटा में विसंगतियां पैदा हो रही थीं।
आदेश का विवरण
उत्तर प्रदेश सरकार के नियोजन विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी विभागों, बोर्डों और निगमों को एक कार्यकारी आदेश जारी किया है। इस आदेश के बाद, अब सरकारी कार्यों जैसे, सरकारी नियुक्ति, पदोन्नति, सेवा रजिस्टर में जन्मतिथि का संशोधन, अन्य आधिकारिक दस्तावेज़ीकरण में आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अब कौन से दस्तावेज़ मान्य होंगे?
आधार कार्ड को हटाने के बाद, आधिकारिक और कानूनी रूप से मान्य जन्मतिथि के प्रमाण के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों का उपयोग अनिवार्य होगा:-
जन्म प्रमाण पत्र: जो नगर निकाय या स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किया गया हो।
हाईस्कूल (कक्षा 10) का प्रमाण पत्र/मार्कशीट: जिसमें जन्मतिथि स्पष्ट रूप से दर्ज हो।
मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान द्वारा जारी स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र या अन्य अभिलेख।
अन्य मूल दस्तावेज जिन्हें सरकार द्वारा जन्मतिथि के प्रमाण के लिए अधिकृत किया गया हो।
क्या है सरकार का उद्देश्य?
सरकार का मुख्य उद्देश्य दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता को मजबूत करना और जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के तहत जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्र के महत्व को पुनः स्थापित करना है। यह कदम फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी योजनाओं या सेवाओं का लाभ उठाने की कोशिशों पर भी रोक लगाने में सहायक होगा। योगी सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक पारदर्शिता और रिकॉर्ड की शुद्धता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में डेटा और पहचान प्रबंधन को और अधिक विश्वसनीय बनाएगा।