लखनऊ: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर सियासी तापमान चरम पर है। मौजूदा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, नए मुखिया की तलाश अंतिम चरण में है, जिसका ऐलान 14 दिसंबर को होना तय है। इस रेस में दो प्रमुख ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) नेता – केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा – आमने-सामने की टक्कर में माने जा रहे हैं।
निर्णायक तारीख़ और प्रक्रिया
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नए अध्यक्ष के हाथ में ही 2027 के विधानसभा चुनाव की पूरी संगठनात्मक कमान होगी।
#WATCH | लखनऊ, उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ में भाजपा कार्यालय पहुंचे।अगले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए नामांकन आज दाखिल किए जाएंगे। pic.twitter.com/jWPw6HUG1f
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 13, 2025
13 दिसंबर (शनिवार): राष्ट्रीय महामंत्री और केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े की निगरानी में प्रदेश कार्यालय में नामांकन प्रक्रिया संपन्न होगी।
14 दिसंबर (रविवार): निर्वाचन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जाएगी।
पार्टी का लक्ष्य है कि खरमास शुरू होने से पहले ही इस पद पर नियुक्ति कर दी जाए, ताकि नए अध्यक्ष तुरंत ही संगठनात्मक बदलाव और चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर सकें।
ओबीसी चेहरे पर दांव क्यों?
भाजपा नेतृत्व इस बार ओबीसी वर्ग के नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर दो बड़े संदेश देना चाहता है:
सामाजिक समीकरण: ओबीसी वर्ग उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़ा और निर्णायक वोट बैंक है। एक मज़बूत ओबीसी चेहरा, खासकर कुर्मी या लोधी समुदाय से, विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) एजेंडे की काट करने में सहायक होगा।
सरकार-संगठन समन्वय: नए अध्यक्ष को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बेहतरीन तालमेल बनाना होगा। इसलिए, ऐसा नेता चुना जाएगा जिसका संगठनात्मक अनुभव शानदार हो और केंद्रीय नेतृत्व पर जिसकी गहरी छाप हो।
दावेदार 1: पंकज चौधरी (कुर्मी, पूर्वांचल)
महराजगंज से सात बार के सांसद और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी इस रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं।
#WATCH | लखनऊ: केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव पर कहा, "आज भाजपा के सभी सांसदों को बुलाया गया है, प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना है, उसमें सबको बुलाया गया है। अब आगे पार्टी तय करेगी किसको पर्चा दाखिल करना है, किसे नहीं।" pic.twitter.com/P4t58kgL72
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 13, 2025
मज़बूती: कुर्मी समुदाय से होने के कारण उनका नाम पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में मजबूत वोट बैंक का प्रतिनिधित्व करता है। उनकी सादगी, लंबा राजनीतिक अनुभव (पार्षद से लेकर केंद्रीय मंत्री तक), और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा उन्हें शीर्ष नेतृत्व की पहली पसंद बनाती है।
राजनीतिक संकेत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों ही पंकज चौधरी की कार्यशैली पर भरोसा जता चुके हैं, जो उनकी दावेदारी को और मज़बूत करता है।
दावेदार 2: बीएल वर्मा (लोधी, पश्चिमी यूपी)
केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा भी इस रेस में एक मज़बूत दावेदार हैं, खासकर अगर पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश को साधने पर ज़ोर देती है।
मजबूती: बीएल वर्मा लोधी राजपूत समुदाय से आते हैं, जिनका प्रभाव पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में है। वह संगठन में लंबा समय दे चुके हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेहद विश्वसनीय माने जाते हैं।
लाभ: वर्मा को अध्यक्ष बनाने से पश्चिमी यूपी में लोधी वोट बैंक को मज़बूती मिलेगी और पार्टी में संतुलन भी बना रहेगा।
रेस में अन्य संभावित नाम
इन दोनों के अलावा, केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति (अति-पिछड़ा, निषाद) और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (मौर्य, ओबीसी) के नाम भी चर्चा में हैं, लेकिन पंकज चौधरी और बीएल वर्मा के बीच मुक़ाबला सबसे कड़ा है।
14 दिसंबर को होने वाला यह फैसला न केवल उत्तर प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को नया रूप देगा, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की दिशा भी निर्धारित करेगा।