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नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आज इतिहास रचते हुए अपने बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के सफल समापन की आधिकारिक घोषणा कर दी है। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित एक भव्य शिखर सम्मेलन के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।
Addressing the joint press meet with European Council President António Costa and European Commission President Ursula von der Leyen.@eucopresident @vonderleyen @EUCouncil @EU_Commission https://t.co/0hh4YX8DHe
— Narendra Modi (@narendramodi) January 27, 2026
इस समझौते को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' क़रार देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक "गेम-चेंजर" बताया। लगभग 18 वर्षों की लंबी और जटिल वार्ताओं के बाद हासिल हुई यह उपलब्धि 2 अरब से ज़्यादा लोगों के साझा बाज़ार का मार्ग प्रशस्त करेगी।
#WATCH दिल्ली | यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने कहा, "...भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। हमारे दोनों महाद्वीपों के बीच सदियों से व्यापार होता रहा है। व्यापार एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक स्टेबलाइजर है और आर्थिक विकास का बुनियादी… pic.twitter.com/aFZyWtfKYd
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 27, 2026
प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें: 'लोकतंत्र और व्यापार का संगम'
संयुक्त संबोधन के दौरान तीनों नेताओं ने इस समझौते के आर्थिक और रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला:
PM मोदी का संबोधन: "आज का दिन भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में एक स्वर्णिम अध्याय है। यह समझौता दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच अटूट विश्वास का प्रतीक है। यह वैश्विक जीडीपी के 25% और विश्व व्यापार के एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।"
उर्सुला वॉन डेर लेयेन: "हमने कर दिखाया! यह समझौता न केवल व्यापार की बाधाओं को हटाएगा, बल्कि हरित ऊर्जा (Green Energy) और डिजिटल परिवर्तन की दिशा में हमारे सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।"
एंटोनियो कोस्टा: "भारत और EU के बीच यह साझेदारी एक स्थिर और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था (Rules-based order) के लिए 'जियोपॉलिटिकल स्टेबलाइजर' का काम करेगी।"
#WATCH दिल्ली | भारत-EU FTA पर हस्ताक्षर होने पर यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, "...यह भारतीय कौशल, सेवाओं और स्केल को यूरोपियन प्रौद्योगिकी, पूंजी और नवाचार के साथ लाता है। इससे विकास का ऐसा स्तर बनेगा जो कोई भी पक्ष अकेले हासिल नहीं कर सकता। अपनी ताकतों… pic.twitter.com/tmd9CXA1Ih
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समझौते के प्रमुख स्तंभ और बड़े बदलाव
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान और आधिकारिक दस्तावेज़ों के मुताबिक़, इस समझौते के तहत कई क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहे हैं:
1. व्यापार और टैरिफ़ (Trade & Tariffs)
निर्यात को पंख: भारत के कपड़ा, रत्न-आभूषण, चमड़ा और कृषि उत्पादों को यूरोपीय बाज़ार में जीरो ड्यूटी पहुंच मिलेगी।
सस्ती होंगी यूरोपीय वस्तुएं: भारत ने यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क (Import Duty) को 110% से घटाकर चरणबद्ध तरीक़े से 10% तक लाने पर सहमति जताई है। साथ ही, वाइन और चॉकलेट जैसे उत्पादों पर भी शुल्क में भारी कटौती की जाएगी।
2. रक्षा और सुरक्षा साझेदारी
व्यापार के साथ-साथ, दोनों पक्षों ने एक सुरक्षा और रक्षा रणनीतिक साझेदारी पर भी हस्ताक्षर किए। यह सहयोग समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और रक्षा विनिर्माण (Manufacturing) पर केंद्रित होगा।
3. रोज़गार और विनिर्माण
प्रधानमंत्री ने साफ़ किया कि यह समझौता 'मेक इन इंडिया' अभियान को बल देगा। यूरोपीय निवेश से भारत में विनिर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजित होंगे, विशेषकर सेमीकंडक्टर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे भविष्य के क्षेत्रों में।
#WATCH दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की उपस्थिति में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत संपन्न होने की राजनीतिक घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए और समझौता ज्ञापन… pic.twitter.com/QGAw6lTcC1
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 27, 2026
18 साल का लंबा सफ़र
गौरतलब है कि भारत और EU के बीच एफटीए की वार्ता 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई गतिरोधों की वजह से यह लंबे समय तक रुकी रही। 2022 में वार्ता फिर से शुरू हुई और आज 2026 में इसने अंतिम रूप लिया। यह समझौता भारत के हालिया ब्रिटेन और ईएफटीए (EFTA) समझौतों का पूरक होगा, जिससे यूरोप के साथ भारत का व्यापारिक ढांचा पूरी तरह मज़बूत हो जाएगा।
#WATCH प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के हैदराबाद हाउस में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की।(सोर्स- डीडी न्यूज़) pic.twitter.com/zuCnYFNurY
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 27, 2026
बहरहाल, यह ऐतिहासिक डील न केवल भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक विश्वसनीय केंद्र बनाती है, बल्कि यह चीन जैसी बड़ी आर्थिक शक्तियों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी एक रणनीतिक क़दम है।