GTC News: यूरोपीय संघ की जलवायु परिवर्तन निगरानी सेवा, कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S), ने 9 दिसंबर, 2025 को जारी अपनी ताज़ा अपडेट में चेतावनी दी है कि वर्ष 2025 जलवायु रिकॉर्ड में अब तक का दूसरा सबसे गर्म साल बनने की ओर बढ़ रहा है, जो 2023 के साथ बराबरी पर खड़ा है और 2024 के ऐतिहासिक उच्चतम तापमान के ठीक बाद आया है। यह डेटा इस बात की पुष्टि करता है कि वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5°C ऊपर की सुरक्षित सीमा को पार करने की दिशा में बढ़ रहा है, जिसे 2015 के पेरिस समझौते में तय किया गया था।
लगातार बढ़ रही है धरती की तपिश
C3S की मासिक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से नवंबर 2025 के बीच सतह का वैश्विक औसत तापमान, पूर्व-औद्योगिक काल (1850-1900) के औसत की तुलना में 1.48°C अधिक दर्ज किया गया है। यह विसंगति पूरे वर्ष 2023 के लिए दर्ज की गई विसंगति के समान है, जो वर्तमान में दूसरा सबसे गर्म वर्ष है।
कॉपरनिकस के लिए जलवायु रणनीतिक प्रमुख सामंथा बर्गेस ने कहा, "2023–2025 के लिए तीन साल का औसत पहली बार 1.5°C को पार करने की राह पर है।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ये आंकड़े जलवायु परिवर्तन की तेज गति को दर्शाते हैं, और भविष्य में बढ़ते तापमान को कम करने का एकमात्र तरीक़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को तेज़ी से कम करना है।
रिकॉर्ड-ब्रेकिंग महीना
नवंबर 2025 पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.54°C ऊपर, रिकॉर्ड में तीसरा सबसे गर्म नवंबर रहा।
इस दौरान औसत सतह वायु तापमान 14.02°C तक पहुंच गया।
पिछले 22 महीनों में से 21 महीने ऐसे रहे हैं जब वैश्विक औसत तापमान ने 1.5°C की सीमा को पार किया है।
अक्टूबर 2025 भी जलवायु इतिहास का तीसरा सबसे गर्म अक्टूबर दर्ज किया गया था।
क्या हैं जलवायु परिवर्तन के मुख्य कारण और प्रभाव?
ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि: तापमान में यह असामान्य वृद्धि मुख्य रूप से वायुमंडल में गर्मी फंसाने वाली ग्रीनहाउस गैसों (GHGs), जैसे कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन, की रिकॉर्ड-उच्च सांद्रता के कारण हो रही है।
महासागरीय तपिश: समुद्री सतह का औसत तापमान भी रिकॉर्ड स्तर के क़रीब बना हुआ है, जो वैश्विक तापन को और बढ़ा रहा है।
चरम मौसमी घटनाएं: तापमान में मामूली बढ़ोतरी भी जलवायु को अस्थिर कर रही है, जिससे तूफ़ान, बाढ़ और अन्य आपदाएं ज़्यादा तेज़ और लगातार हो रही हैं। नवंबर 2025 में दक्षिण-पूर्व एशिया में आए उष्णकटिबंधीय चक्रवातों ने व्यापक बाढ़ और जानमाल का नुकसान किया।
ग्लेशियरों का पिघलना: आर्कटिक और अंटार्कटिक समुद्री बर्फ का स्तर भी असामान्य रूप से कम दर्ज किया गया है, जो समुद्र के स्तर में वृद्धि की गति को दोगुना कर रहा है।
चेतावनी और आगे की राह
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पहले ही अक्टूबर में चेतावनी दी थी कि दुनिया अगले कुछ वर्षों में वैश्विक तापमान को 1.5°C से नीचे रखने में सक्षम नहीं होगी। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट में भी यह बताया गया है कि 2025 में असाधारण गर्मी की यह सिलसिला जारी है, जिससे यह साल रिकॉर्ड पर सबसे गर्म तीन वर्षों में से एक होगा (2024 और 2023 के साथ)।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इन अप्रत्याशित उच्च तापमानों की श्रृंखला, ग्रीनहाउस गैसों के रिकॉर्ड स्तर के साथ मिलकर, यह स्पष्ट करती है कि बिना अस्थायी रूप से लक्ष्य से ऊपर जाए, अगले कुछ वर्षों में वैश्विक तापन को 1.5°C तक सीमित करना वस्तुतः असंभव होगा। बढ़ते तापमान के इस रुझान को कम करने का एकमात्र प्रभावी तरीका जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करना और तेज़ी से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को काटना है।