Sunday, 11th of January 2026

'लैंड फॉर जॉब' केस: लालू परिवार के ख़िलाफ़ कोर्ट ने तय किए आरोप, बताया- 'क्रिमिनल सिंडिकेट'

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  January 10th 2026 07:46 PM  |  Updated: January 10th 2026 07:46 PM
'लैंड फॉर जॉब' केस: लालू परिवार के ख़िलाफ़ कोर्ट ने तय किए आरोप, बताया- 'क्रिमिनल सिंडिकेट'

'लैंड फॉर जॉब' केस: लालू परिवार के ख़िलाफ़ कोर्ट ने तय किए आरोप, बताया- 'क्रिमिनल सिंडिकेट'

नई दिल्ली/पटना: बिहार के चर्चित 'लैंड फॉर जॉब' (ज़मीन के बदले नौकरी) मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की क़ानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को इस मामले में ऐतिहासिक फै़सला सुनाते हुए लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटों तेजस्वी व तेज प्रताप सहित कुल 41 आरोपियों के ख़िलाफ़ आरोप (Charges) तय कर दिए हैं।

दिल्ली की एक विशेष सीबीआई अदालत (Special CBI Court) ने क़रीब दो दशक पुराने 'ज़मीन के बदले नौकरी' घोटाले में अपना सख़्त रुख़  अपनाते हुए लालू प्रसाद यादव और उनके क़रीबियों के ख़िलाफ़ ट्रायल शुरू करने का रास्ता साफ़ कर दिया है। अदालत ने माना है कि प्रथम दृष्टया आरोपियों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और साज़िश के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

कोर्ट की सख़्त टिप्पणी: "रेलवे को निजी जागीर बनाया"

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने आदेश सुनाते हुए बेहद कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा:

निजी जागीर: "लालू यादव ने तत्कालीन रेल मंत्री के रूप में रेल मंत्रालय को अपनी 'निजी जागीर' की तरह इस्तेमाल किया।"

क्रिमिनल सिंडिकेट: कोर्ट ने लालू परिवार की संलिप्तता को एक 'आपराधिक सिंडिकेट' (Criminal Syndicate) के रूप में वर्णित किया, जहां सरकारी नौकरियों का इस्तेमाल परिवार के लिए ज़मीन हड़पने के सौदे (Bargaining Chip) के तौर पर किया गया।

आरोप तय होने वाले मुख्य नाम

सीबीआई ने इस मामले में कुल 103 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से 5 की मृत्यु हो चुकी है। कोर्ट ने:

लालू प्रसाद यादव (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और साजिश की धाराएं)

राबड़ी देवी (पूर्व मुख्यमंत्री)

तेजस्वी यादव (पूर्व उपमुख्यमंत्री)

तेज प्रताप यादव

मीसा भारती (राज्यसभा सांसद)

हेमा यादव

भोला यादव (लालू के तत्कालीन ओएसडी) सहित कुल 41 लोगों के ख़िलाफ़ चार्ज फ्रेम किए हैं।

52 लोग हुए आरोप मुक्त (Discharge)

इस मामले में कोर्ट ने राहत देते हुए 52 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया है। इनमें अधिकांश वे रेलवे अधिकारी और स्थानापन्न (Substitutes) कर्मचारी शामिल हैं, जिनके ख़िलाफ़ कोर्ट को पर्याप्त सबूत नहीं मिले या जिन्होंने अपनी ज़मीन परिवार को नहीं सौंपी थी।

क्या है पूरा मामला? (2004-2009)

यह घोटाला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए सरकार में 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे।

आरोप: आरोप है कि बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन या प्रक्रिया के, कई लोगों को रेलवे के ग्रुप-डी (Group-D) पदों पर नौकरी दी गई।

बदले में क्या मिला: इन नौकरियों के बदले में अभ्यर्थियों या उनके परिवारों ने अपनी क़ीमती ज़मीनें बहुत कम क़ीमतों पर या उपहार के रूप में लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनकी कंपनियों (जैसे AK Infosystems) के नाम कर दीं।

ज़मीन का दायरा: सीबीआई और ईडी की जांच के अनुसार, पटना और अन्य इलाकों में क़रीब 1.05 लाख वर्ग फुट ज़मीन इस तरह हासिल की गई।

आगे क्या होगा?

कोर्ट ने औपचारिक रूप से आरोप तय करने की अगली तारीख़ 23 जनवरी 2026 (और कुछ धाराओं के लिए 29 जनवरी) तय की है। इसके बाद मामले का नियमित ट्रायल शुरू होगा, जिसमें गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

TAGS