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सबरीमाला सोना चोरी मामला: रमेश चेन्निथला ने मुख्य पुजारी राजीवारू की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

By: GTC News Desk | Edited By: Preeti Kamal | Updated at: February 22nd 2026 03:42 PM
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सबरीमाला सोना चोरी मामला: रमेश चेन्निथला ने मुख्य पुजारी राजीवारू की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

सबरीमाला सोना चोरी मामला: रमेश चेन्निथला ने मुख्य पुजारी राजीवारू की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

तिरुवनंतपुरम, केरल: कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने रविवार को सबरीमाला सोना चोरी केस में तंत्री कंदारारू राजीवारू की गिरफ्तारी और जेल में डाले जाने पर सवाल उठाया।यहां मीडियाकर्मियों से बात करते हुए चेन्निथला ने कहा, "यह पूरे केरल समुदाय के लिए एक झटका है। तंत्री कंदारारू राजीवारू भगवान अयप्पा के प्रतिनिधि हैं। बिना किसी सबूत के, वे उन्हें कैसे गिरफ्तार कर सकते हैं और 41 दिनों के लिए जेल में डाल सकते हैं?"

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में मुख्यमंत्री का ऑफिस शामिल है। उन्होंने कहा, "इस मामले में मुख्यमंत्री के ऑफिस के इस तरह की गतिविधि में शामिल होने का शक है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।"

राजीवारू कोल्लम को बुधवार को मिली थी जमानत

सबरीमाला सोना चोरी केस में आरोपी राजीवारू कोल्लम विजिलेंस कोर्ट से जमानत मिलने के बाद बुधवार को पूजापुरा सेंट्रल जेल से बाहर आ गए। राजीवारू को 41 दिन की ज्यूडिशियल रिमांड पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया। कोर्ट ने उन्हें मंदिर के द्वारपालक (रक्षक देवता) की मूर्तियों और कट्टिलाप्पाली (दरवाज़े की चौखट) से सोने की हेराफेरी के आरोप वाले मामलों में ज़मानत दी थी।

क्या है पूरा मामला ?

9 जनवरी को, सबरीमाला के मुख्य पुजारी (तंत्री) राजीवारू को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था। केरल पुलिस ने बताया कि उनसे स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने पूछताछ की थी। उन पर क्रिमिनल ब्रीच ऑफ़ ट्रस्ट, जालसाज़ी, क्रिमिनल साज़िश और प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट के नियमों सहित कई आरोप लगाए जाने के बाद यह गिरफ्तारी की गई थी। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 48 के तहत जारी अरेस्ट नोटिस के अनुसार, यह मामला सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह के दरवाज़े पर लगे सोने की परत चढ़े तांबे के पैनल और सजावटी स्ट्रक्चर को हटाने और संभालने में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है।

यह मामला 1998 में उद्योगपति विजय माल्या के 30.3 किलोग्राम सोने और 1,900 किलोग्राम तांबे के दान से शुरू हुआ, जिसका मकसद सबरीमाला अयप्पा मंदिर के पवित्र स्थान और लकड़ी की नक्काशी को ढंकना था।

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