Sunday, 22nd of February 2026

ट्रंप का टैरिफ झटका: SCOTUS के फैसले का भारत और पंजाब की मिट्टी पर क्या होगा असर?

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Preeti Kamal  |  February 21st 2026 02:08 PM  |  Updated: February 21st 2026 03:02 PM
ट्रंप का टैरिफ झटका: SCOTUS के फैसले का भारत और पंजाब की मिट्टी पर क्या होगा असर?

ट्रंप का टैरिफ झटका: SCOTUS के फैसले का भारत और पंजाब की मिट्टी पर क्या होगा असर?

GTC News: कल, 20 फरवरी 2026 को, संयुक्त राज्य अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया जिसने वॉशिंगटन से लेकर नई दिल्ली और पंजाब तक हलचल मचा दी। 6-3 के फैसले में कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप से साफ कहा, “आपने हद पार कर दी।”

संयुक्त राज्य अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने  (Learning Resources, Inc. v. Trump) मामले पर फैसला दिया कि ट्रंप द्वारा लगाए गए आपातकालीन टैरिफ (आयात शुल्क) असंवैधानिक थे। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत जो व्यापक आयात कर लगाए थे, वे उनके राष्ट्रपति अधिकारों से बाहर थे। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर ट्रंप ने इस बार ट्रेड एक्ट 1974 के तहत एक नया 10% “ग्लोबल बेसलाइन टैरिफ” लागू कर दिया। यानि कानून बदला, लेकिन नतीजा लगभग वही रहा।

आइए, इसे GTC नेटवर्क के नज़रिये से आसान भाषा में समझते हैं। अपना चाय का कप उठा लीजिए, क्योंकि यह कहानी संयुक्त राज्य अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट की सीढ़ियों से निकलकर सीधे पंजाब की मिट्टी तक पहुंचती है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने आखिर कहा क्या ?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि ट्रंप ने IEEPA का गलत इस्तेमाल किया। यह कानून असली राष्ट्रीय आपात स्थितियों, जैसे विदेशी खतरों के लिए बनाया गया था, न कि सामान्य व्यापार विवादों के लिए। ट्रंप ने लगभग सभी देशों पर 10% का बेसलाइन टैरिफ लगाया था, और कई देशों पर इससे भी अधिक टैरिफ लगाया था। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स, जो बहुमत की ओर से लिख रहे थे, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने का संवैधानिक अधिकार कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं। परिणामस्वरूप IEEPA के तहत लगाए गए लगभग 200 अरब डॉलर के टैरिफ को कम से कम कागज़ पर तो रद्द कर दिया गया।

ट्रंप का तुरंत पलटवार

फैसले के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप प्रशासन ने नया रास्ता निकाल लिया। इस बार ट्रेड एक्ट 1974 के तहत 10% का नया वैश्विक टैरिफ लागू किया गया। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताई, लेकिन उनकी टीम इसके लिए पहले से तैयार थी। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को आर्थिक या राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से टैरिफ लगाने के व्यापक अधिकार मिलते हैं, और इसे अदालत में चुनौती देना अधिक जटिल है। यानी व्यापार जगत को राहत मिली, लेकिन यह राहत सिर्फ़ कुछ घंटों के लिए ही थी क्योंकि टैरिफ फिर से लागू हो गए बस उनका कानूनी आधार बदल दिया गया।

“भारत ट्रेड डील” का दावा बनाम हक़ीक़त

ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ “शानदार व्यापार समझौता” किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होगा। लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और ही है। सच्चाई यह है कि नया 10% टैरिफ सभी देशों पर लागू होता है, और इसमें भारत भी शामिल है।

भले ही कुछ विशेष प्रावधान सुरक्षित हों, लेकिन भारतीय निर्यात—जैसे वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों को अब अतिरिक्त 10% शुल्क का सामना करेंगे। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 10% की बढ़ोतरी भी मुनाफे और नुकसान के बीच बड़ा अंतर पैदा कर सकती है। इसका सबसे बड़ा असर मिट्टी से जुड़े हमारे किसान जो दिन रात खेत में काम करते हैं उन पर पड़ेगा।

भारतीय किसानों पर इसका प्रभाव

अब बात करते हैं पंजाब, हरियाणा और देश के अन्य कृषि राज्यों की। भारत अमेरिका को चावल, मसाले, ताजे फल, प्रोसेस्ड फूड जैसे कई कृषि उत्पाद निर्यात करता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय बासमती चावल की खास मांग है। लेकिन जब इन पर 10% टैरिफ लगेगा, तो तीन संभावनाएँ बनती हैं:

  • स्थिति 1: भारतीय निर्यातक लागत खुद उठाएं → मुनाफा घटेगा → किसानों तक कम पैसा पहुंचेगा।
  • स्थिति 2: अमेरिकी आयातक कीमत बढ़ाएं → मांग घटेगी → ऑर्डर कम होंगे → किसान प्रभावित।
  • स्थिति 3: दोनों पक्ष लागत बांटें → सभी को नुकसान, लेकिन कृषि जैसे कम मार्जिन वाले क्षेत्र में “थोड़ा” नुकसान भी भारी पड़ सकता है।

फरवरी में हुए किसान आंदोलन सिर्फ MSP या कर्ज़ माफी तक सीमित नहीं थे। वे आर्थिक अस्थिरता और भविष्य की चिंता का संकेत थे। और अब वैश्विक व्यापार की अनिश्चितता ने चिंता और बढ़ा दी है।

बड़ी तस्वीर: टैरिफ और आम आदमी

बात जब टैरिफ की आती है तो नेता इसे घरेलू उद्योगों और कामगारों की सुरक्षा का हथियार बताकर पेश करते हैं। लेकिन ज़मीन पर सच्चाई अलग होती है। टैरिफ दरअसल एक तरह का कर (टैक्स) हैं। वे लागत बढ़ाते हैं। सप्लाई चेन को बाधित करते हैं, और सबसे बड़ी बात — वे अनिश्चितता पैदा करते हैं। यह अनिश्चितता किसानों की सबसे बड़ी दुश्मन होती है। किसानों को बुआई की योजना बनानी होती है, अनुबंध तय करने होते हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण करना होता है।

जब ट्रंप ने अपने शुरुआती टैरिफ लगाए थे, तो तर्क यह दिया गया था कि इससे दूसरे देशों पर बेहतर व्यापार समझौते के लिए दबाव पड़ेगा। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट का फैसला और उसके तुरंत बाद नया कानूनी रास्ता अपनाना यह दिखाता है कि मामला सिर्फ़ सोच-समझकर बनाई गई व्यापार नीति का नहीं है। बल्कि यह सत्ता, कानूनी चालबाज़ी और राजनीतिक संदेश देने का खेल भी है। इन सबके बीच में जो फँसा हुआ है वो है एक आम आदमी।

आयोवा के किसान, जिन्हें चीन की संभावित जवाबी कार्रवाई की चिंता है। गुजरात के फैक्ट्री कर्मचारी, जिन्हें अमेरिकी बाज़ार तक पहुंच को लेकर डर है। इसके अलावा, पंजाब के गेहूं और चावल किसान, जो सोच रहे हैं कि उनके निर्यात के अनुबंध टिक पाएंगे या नहीं।

GTC नेटवर्क यह मुद्दा क्यों उठा रहा है?

आप सोच रहे होंगे — एक एंटरटेनमेंट और मीडिया नेटवर्क सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और ट्रेड पॉलिसी में इतनी गहराई से क्यों जा रहा है? क्योंकि यह सिर्फ़ राजनीति नहीं है। यह असल ज़िंदगी है। इसका असर हमारे समुदाय पर पड़ता है — दुनिया भर में बसे पंजाबी, अपने गांव-शहरों के किसान, और वे परिवार जो हमारे चैनल देखते हुए तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था को समझने की कोशिश कर रहे हैं। GTC नेटवर्क पर हम सिर्फ़ नई पंजाबी फ़िल्में, संगीत और मनोरंजन ही नहीं लाते।

हम वह ख़बर भी लाते हैं जो मायने रखती है। वे कहानियाँ जो हमारे वैश्विक दर्शकों को देश और विदेश में हो रही घटनाओं से जोड़ती हैं। चाहे आप हमें कैलिफ़ोर्निया में FreeTVPlus पर देख रहे हों, मुंबई में JioTV पर, या टोरंटो में DistroTV पर — हम यह सुनिश्चित करते हैं कि आप जागरूक रहें, जुड़े रहें और सशक्त रहें।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला शायद दूर की बात लगे — वॉशिंगटन डी.सी. में जो कुछ हुआ, वो लुधियाना के खेतों या अमृतसर के बाज़ारों से बहुत दूर है। लेकिन, वैश्विक व्यापार विषय इतना महत्वपूर्ण है जो हर किसी को छूता है।

और जब किसान सड़कों पर हों, जब व्यापार समझौते रातोंरात बदल दिए जाएं, जब टैरिफ कानूनी तकनीक को आधार बनाकर लगें और फिर हटा लिए जाएं तब हम सबके लिए यह समझना ज़रूरी हो जाता है कि वैश्विक स्तर पर आख़िर हो क्या रहा है ?

आगे क्या होगा ?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेड एक्ट 1974 के तहत लगाए गए ट्रंप के नए टैरिफ को अदालत में चुनौती दी जाएगी। लेकिन यह प्रक्रिया महीनों या शायद वर्षों तक चल सकती है। इस बीच, टैरिफ लागू रहेंगे। भारत के लिए, सरकार संभवतः बातचीत करेगी, कूटनीतिक स्तर पर विरोध दर्ज कराएगी और प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को होने वाले नुकसान को कम करने के रास्ते तलाशेगी। लेकिन, व्यक्तिगत तौर पर किसान के लिए क्या होगा? उनके लिए स्थिति अभी इंतजार करने की है। उन्हें उचित दाम और स्थिरता की उम्मीद है। उन्हें उम्मीद है कि वैश्विक व्यापार पर हो रही यह उथल-पुथल पहले से चल रहे खराब हालातों को और अधिक ख़राब नहीं करेगा। भारत में विरोध प्रदर्शन अभी थमे नहीं हैं, आर्थिक चिंताएं खत्म नहीं हुई हैं, और अब, जब United States Supreme Court के फैसले ने अनिश्चितता का एक और अध्याय जोड़ दिया है, तो ऐसे में कई सवाल और बढ़ गए हैं:

  • क्या निर्यात के ऑर्डर बने रहेंगे?
  • क्या कीमतें गिर जाएंगी?
  • क्या यह सीजन टिकाऊ साबित होगा?

निष्कर्ष: संयुक्त राज्य अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप से कहा कि उन्होंने अपनी सीमा पार की। ट्रंप ने जवाब में उसी मंज़िल तक पहुँचने के लिए नया कानूनी रास्ता ढूंढ लिया। भारत की “सुरक्षित” व्यापार डील तकनीकी रूप से भले सुरक्षित हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि टैरिफ का असर अब भी पड़ रहा है। और भारतीय किसान, जो पहले से संघर्ष कर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं , वो अब एक और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, वह भी ऐसे वैश्विक बाज़ार में जो पहले से ही अस्थिर है।

यह मामला सिर्फ़ कानूनी कहानी का नहीं है, और न ही यह सिर्फ़ एक राजनीतिक कहानी है, वास्तव में यह एक मानवीय कहानी है। यह उन लोगों की कहानी है जो हमारे लिए भोजन उगाते हैं। यह उन परिवारों की कहानी है, जो निष्पक्ष व्यापार पर निर्भर हैं, और उन समुदायों की कहानी है जो एक जुड़े हुए वैश्विक जगत में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं,  फिर भले ही यही वैश्विक जगत उनके खिलाफ काम कर रहा हो।

GTC नेटवर्क के रूप में,  वैश्विक सुर्खियों और स्थानीय प्रभाव के बीच के संबंध को समझाने के लिए हम ऐसे ही बुनियादी विषयों को आपके सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऐसा इसलिए जब वॉशिंगटन में कुछ होता है, तो उसकी गूंज पंजाब की मिट्टी तक सुनाई देती है, और हमें इसे समझना जरूरी है कि आख़िर इन सबका मतलब क्या है?

इसलिए बने रहिए,जागरूक रहिए और हमेशा जुड़े रहिए GTC नेटवर्क के साथ...जो एक कहानी के जरिए दुनिया को आपके घर तक ला रहा है। क्या आप अपने समुदाय को प्रभावित करने वाली वैश्विक खबरों से अपडेट रहना चाहते हैं? अगर हाँ...तो केबल, CTV और मोबाइल सहित हमारे सभी प्लेटफॉर्म पर GTC नेटवर्क को फॉलो करें। हम वही कहानियां कवर कर रहे हैं ,जो मायने रखती हैं, जो आप पर असर डालती हैं, और जो हमारे वैश्विक पंजाबी परिवार को जोड़ने का भी काम करती हैं।

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