Sunday, 11th of January 2026

अमेरिका में खसरे का प्रकोप: 250 से अधिक लोग क्वारंटाइन, दुनिया के लिए गंभीर ख़तरा!

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  December 11th 2025 04:21 PM  |  Updated: December 11th 2025 04:21 PM
अमेरिका में खसरे का प्रकोप: 250 से अधिक लोग क्वारंटाइन, दुनिया के लिए गंभीर ख़तरा!

अमेरिका में खसरे का प्रकोप: 250 से अधिक लोग क्वारंटाइन, दुनिया के लिए गंभीर ख़तरा!

नई दिल्ली/वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), जिसे वर्ष 2000 में खसरे से 'मुक्त' घोषित किया गया था, एक बार फ़िर इस अत्यधिक संक्रामक रोग के गंभीर प्रकोप का सामना कर रहा है। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक़, देश भर में खसरे के मामलों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रही है, और संक्रमण के संपर्क में आए 250 से ज़्यादा लोगों को तत्काल क्वारंटाइन में रखा गया है। यह प्रकोप केवल अमेरिका की घरेलू स्वास्थ्य समस्या नहीं रह गया है; वैश्विक यात्रा और अपर्याप्त टीकाकरण कवरेज के कारण यह दुनिया भर के देशों, विशेष रूप से भारत जैसे सघन आबादी वाले देशों के लिए एक गंभीर 'दो-तरफ़ा ख़तरा' बन गया है।

अमेरिका में बढ़ता प्रकोप: कारण और आंकड़े

अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक खसरे के मामलों की संख्या 1,800 से ज़्यादा हो चुकी है, जो पिछले कई दशकों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। यह स्थिति मुख्य रूप से उन समुदायों में एमएमआर (MMR) टीके की कम कवरेज के कारण पैदा हुई है जहां 'टीकाकरण विरोधी' (Anti-Vaccine) भ्रांतियों ने विज्ञान-आधारित जन-स्वास्थ्य उपायों को कमज़ोर किया है।

गौरतलब है कि खसरा दुनिया के सबसे संक्रामक रोगों में से एक है। एक संक्रमित व्यक्ति लगभग 12 से 18 असंक्रमित लोगों को यह रोग फैला सकता है। यह वायरस हवा के माध्यम से फैलता है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने के बाद भी हवा में दो घंटे तक सक्रिय रह सकता है।

भारत-अमेरिका यात्रियों के लिए दो-तरफ़ा ख़तरा

भारत और अमेरिका के बीच निरंतर होने वाली यात्रा और प्रवासन इस बीमारी के अंतरराष्ट्रीय प्रसार के लिए एक सीधा रास्ता बनाते हैं, जिससे दोनों देशों के लिए जोखिम बढ़ जाता है:

1. अमेरिका से भारत: आयातित संक्रमण का जोखिम

यदि कोई अमेरिकी यात्री जिसका टीकाकरण अधूरा है या जिसकी प्रतिरक्षा कमज़ोर है, वह संक्रमित अवस्था में भारत यात्रा करता है, तो वह आसानी से इस अत्यधिक संक्रामक वायरस को भारत में फैला सकता है। भारत में, राष्ट्रीय टीकाकरण दर अच्छी होने के बावजूद, दूर-दराज़ के ग्रामीण इलाक़ों और घनी आबादी वाली शहरी झुग्गी बस्तियों में अभी भी प्रतिरक्षा अंतराल (Immunity Gaps) मौजूद हैं। अमेरिका से आया एक भी मामला उन कमज़ोर समुदायों में तेज़ी से और बड़े प्रकोप का कारण बन सकता है।

2. भारत से अमेरिका: प्रकोप की शुरुआत

कई अमेरिकी प्रकोपों की शुरुआत अक्सर उन यात्रियों से होती है, जो खसरे के सक्रिय प्रसार वाले देशों से अमेरिका आते हैं। भारत उन देशों में से एक है जहां खसरे के मामले अभी भी सामने आते हैं। यदि भारत से आने वाला कोई संक्रमित यात्री अमेरिका के उस समुदाय में प्रवेश करता है जहाँ राजनीतिकरण वाली ग़लत सूचना के कारण टीकाकरण की दर पहले से ही कम है, तो वहाँ यह वायरस तेज़ी से फैल सकता है, जैसा कि मौजूदा प्रकोपों में देखा जा रहा है।

खसरे की गंभीरता: साधारण दाने से कहीं अधिक

खसरा केवल शरीर पर लाल दाने वाली बीमारी नहीं है; यह कई गंभीर और जानलेवा मुश्किल पैदा कर सकता है।

निमोनिया: बच्चों में खसरे से संबंधित मौत का सबसे आम कारण।

एन्सेफलाइटिस: मस्तिष्क में सूजन, जिससे स्थायी रूप से बहरापन, दौरा पड़ना या बौद्धिक विकलांगता हो सकती है।

अन्य जोखिम: गंभीर कान का संक्रमण, जिससे बहरापन हो सकता है, और गर्भवती महिलाओं में गर्भपात, मृत शिशु का जन्म या समय से पूर्व प्रसव का खतरा।

सीडीसी के अनुसार, इस साल के प्रकोप में अब तक तीन मौतें हुई हैं, और लगभग 12% मामलों में मरीज़ों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।

एकमात्र प्रभावी बचाव: एमएमआर टीकाकरण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस अंतर्राष्ट्रीय खतरे से निपटने के लिए एमएमआर (Measles, Mumps, Rubella) वैक्सीन की दो खुराकों को एकमात्र सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच बताया है।

टीके की दो खुराकें लगभग 97% सुरक्षा प्रदान करती हैं।

यह न केवल टीका लगवाने वाले व्यक्ति को बचाता है, बल्कि सामुदायिक प्रतिरक्षा (Herd Immunity) बनाने में भी मदद करता है, जिससे उन शिशुओं और कमज़ोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों को सुरक्षा मिलती है जो टीका लेने में असमर्थ हैं।

यह वैश्विक प्रकोप एक स्पष्ट चेतावनी है कि टीकाकरण से रोकी जा सकने वाली बीमारियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के पार इस खतरे का मुकाबला करने के लिए, सभी यात्रियों को अपनी यात्रा से पहले टीकाकरण की स्थिति की जांच करनी चाहिए, और वैश्विक स्तर पर टीका विरोधी भ्रांतियों के प्रसार को रोकने की सख़्त ज़रुरत है।