नई दिल्ली: जी-20 शेरपा और पूर्व नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने मंगलवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर क्षेत्र और जीवनशैली को बदलने वाला है, लेकिन इसका विकास तीन स्तंभों—सुलभता (Accessibility), वहनीयता (Affordability) और जवाबदेही (Accountability) के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने आगे चेतावनी दी कि यदि “डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर” (DPI) जैसा ढांचा नहीं अपनाया गया, तो एआई एक गहरी असमान वैश्विक समाज की ओर ले जा सकता है।
#WATCH | #IndiaAIImpactSummit2026 | Former G20 Sherpa and former NITI Aayog CEO Amitabh Kant says, "There is tremendous energy and great vibrancy here. Young people are showing strong interest in this powerful technology, which will change the way we live, grow, and evolve. It is… pic.twitter.com/HAHjkDesV2
— ANI (@ANI) February 17, 2026
ग्लोबल साउथ, खासकर भारत, AI विकास का “इंजन रूम” बन चुका है
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया AI समिट 2026 के दूसरे दिन AI की परिवर्तनकारी शक्ति पर बोलते हुए कांत ने बताया कि बड़े भाषा मॉडल (LLMs) के प्रशिक्षण में वर्तमान में बड़ा असंतुलन है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ, खासकर भारत, AI विकास का “इंजन रूम” बन चुका है।
कांत ने कहा, “आज भारत से ओपन AI के ChatGPT को अमेरिका की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक डेटा मिल रहा है। यानी हम संयुक्त राज्य अमेरिका से 33 प्रतिशत ज्यादा डेटा दे रहे हैं।”
#WATCH | #IndiaAIImpactSummit2026 | Former G20 Sherpa and former NITI Aayog CEO Amitabh Kant says, "The challenge is whether we can ensure that AI reaches those below poverty line, vast segments of population, whether AI can be used to transform lives of citizens in the Global… pic.twitter.com/fuNdtPf37H
— ANI (@ANI) February 17, 2026
अंग्रेज़ी-केंद्रित मॉडल से आगे बढ़कर AI को बहुभाषी बनना होगा
अमिताभ कांत ने तर्क दिया कि AI को वास्तव में समावेशी बनाने के लिए उसे अंग्रेज़ी-केंद्रित मॉडल से आगे बढ़कर बहुभाषी (मल्टीलिंगुअल) बनना होगा, ताकि विविध आबादी को सेवा दी जा सके। कांत ने कहा, “ये बड़े भाषा मॉडल ग्लोबल साउथ से मिलने वाले डेटा के आधार पर लगातार बेहतर हो रहे हैं। जरूरी है कि इस योगदान का लाभ भी इन क्षेत्रों को मिले।”
हमारे मॉडल ओपन-सोर्स होने की वजह से डिजिटल इकोसिस्टम सफल हुआ
भारत में वित्तीय समावेशन की सफलता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि AI को भी देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के मॉडल का अनुसरण करना चाहिए, जिसकी बदौलत भारत ने महज सात वर्षों में दशकों की विकास यात्रा पूरी कर ली। उन्होंने कहा, “हमारा डिजिटल इकोसिस्टम इसलिए सफल हुआ क्योंकि हमारे मॉडल ओपन-सोर्स थे। मेरा मानना है कि AI में भी एक डिजिटल पब्लिक आइडेंटिटी की परत होनी चाहिए, जिसके ऊपर निजी क्षेत्र को खुलकर प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी जाए।”
AI का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे मुद्दों के समाधान के लिए भी हो
पूर्व नीति आयोग सीईओ ने कहा कि AI तकनीक का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे जमीनी मुद्दों के समाधान के लिए किया जाए तो सामाजिक परिवर्तन संभव है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कांत ने चेतावनी दी कि प्रगति हमेशा समानता की गारंटी नहीं देती। उन्होंने कहा कि यदि AI में भारी निवेश कुछ चुनिंदा कंपनियों के हाथों में केंद्रित रहा, तो यह “बेहद असमान समाज” को जन्म दे सकता है।
“अगर हम एक असमान समाज बना देते हैं… तो हम असफल होंगे।”
उन्होंने जोर देकर कहा, “अगर हम एक असमान समाज बना देते हैं… तो हम असफल होंगे।” उनका कहना था कि अंतिम लक्ष्य ग्लोबल साउथ के नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना होना चाहिए, न कि केवल बड़ी टेक कंपनियों के मूल्यांकन (Valuation) को बढ़ाना।