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ढाका/नई दिल्ली: क़रीब दो साल की भीषण हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बाद, आख़िरकार बांग्लादेश के नागरिकों ने एक बार फिर तारिक़ रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) पर भरोसा जताया है। गौरतलब है कि शेख़ हसीना के पतन के बाद हुए इन पहले आम चुनावों में बीएनपी ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है। यह जीत न केवल बांग्लादेश के आंतरिक भविष्य को तय करेगी, बल्कि भारत के साथ उसके दशकों पुराने समीकरणों को भी नए सिरे से परिभाषित करेगी।
The Bangladesh Nationalist Party (BNP) has long struggled to restore the people’s right to vote in Bangladesh. In this struggle, we have lost countless leaders and activists; many fell victim to enforced disappearance and systemic repression.Yesterday was the long-awaited… pic.twitter.com/CVuSv52MmX
— Bangladesh Nationalist Party-BNP (@bdbnp78) February 13, 2026
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर प्रमुख प्रभाव:
1. 'हसीना फैक्टर' और प्रत्यर्पण की मांग
भारत के लिए सबसे बड़ी कड़वाहट पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की मौजूदगी हो सकती है। असल में बीएनपी के शीर्ष नेताओं ने साफ़ कर दिया है कि वे हसीना के प्रत्यर्पण (Extradition) की औपचारिक मांग करेंगे, ताकि उन पर ढाका में 'मानवता के ख़िलाफ़ अपराध' के लिए मुक़दमा चलाया जा सके।
भारत की दुविधा: अगर भारत शेख़ हसीना को बांग्लादेश को सौंपता है, तो यह एक पुराने सहयोगी के साथ विश्वासघात माना जाएगा और यदि नहीं सौंपता है, तो नई बीएनपी सरकार के साथ शुरुआती रिश्तों में ही खटास आ सकती है।
2. सुरक्षा और पूर्वोत्तर राज्यों पर असर
बीएनपी का पिछला शासन (2001-2006) भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज़ से चुनौतीपूर्ण रहा था। उस दौरान भारत विरोधी उग्रवादी समूहों (जैसे ULFA) को बांग्लादेश में पनाह मिलने के आरोप लगे थे।
नई उम्मीद: तारिक़ रहमान ने इस बार अधिक व्यावहारिक रुख़ अपनाते हुए आश्वासन दिया है कि वे अपनी धरती का उपयोग किसी भी पड़ोसी देश के ख़िलाफ़ नहीं होने देंगे। हालांकि, बीएनपी का जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों के प्रति नरम रुख़ भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना रहेगा।
3. 'चीन-पाकिस्तान' बनाम 'भारत'
बीएनपी का झुकाव ऐतिहासिक रूप से बीजिंग और इस्लामाबाद की ओर अधिक रहा है।
रणनीतिक बदलाव: हाल के महीनों में बांग्लादेश का पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग और चीन के साथ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर बढ़ता तालमेल भारत की 'पड़ोस प्रथम' नीति के लिए कड़ी परीक्षा साबित होगा।
4. अल्पसंख्यकों की सुरक्षा
अगस्त 2024 के विद्रोह के बाद बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा की ख़बरें वैश्विक चिंता का विषय बनी थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक़ रहमान को बधाई देते हुए एक "लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी" बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन को दोहराया है। भारत के लिए वहां के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी।
क्या बदल जाएगा? (तुलनात्मक चार्ट)
मुद्दा शेख़ हसीना सरकार (अवामी लीग) तारिक़ रहमान सरकार (BNP)
भारत के प्रति नीति रणनीतिक और अत्यधिक घनिष्ठ "पारस्परिक सम्मान" और व्यावहारिक
सुरक्षा सहयोग आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' सतर्क और सशर्त सहयोग की संभावना
नदी जल विवाद आपसी सहमति पर जोर तीस्ता जल समझौते पर कड़ा रुख
चीन का प्रभाव संतुलित निवेश भारी निवेश और सामरिक झुकाव संभव
अब क्या है आगे की राह
भारत-बांग्लादेश कूटनीतिकर संबंधों के जानकारों के बक़ौल, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोगी ने तारिक रहमान को "निर्णायक जीत" पर बधाई देकर एक सकारात्मक संकेत दिया है।
Delighted to speak with Mr. Tarique Rahman. I congratulated him on the remarkable victory in the Bangladesh elections.I conveyed my best wishes and support in his endeavour to fulfil the aspirations of the people of Bangladesh.As two close neighbours with deep-rooted…
— Narendra Modi (@narendramodi) February 13, 2026
भारत अब अपनी नीति को किसी एक पार्टी (अवामी लीग) के बजाय सीधे "राज्य-से-राज्य" (State-to-State) संबंधों पर केंद्रित कर रहा है। आने वाले महीनों में कनेक्टिविटी, ऊर्जा व्यापार और सुरक्षा वार्ता यह तय करेंगी कि क्या यह 'नया अध्याय' भारत और बांग्लादेश के लिए वास्तव में सुखद होगा।
Thank you very much, Honourable @narendramodi. We greatly appreciate your kind acknowledgment of Mr. Tarique Rahman’s leadership in securing the BNP’s decisive win in the national elections. This outcome reflects the trust and confidence the people of Bangladesh have placed in… https://t.co/hJAOguIvKZ
— Bangladesh Nationalist Party-BNP (@bdbnp78) February 14, 2026