Wednesday, 18th of February 2026

भारत में एमपॉक्स वायरस के बदले स्वरूप 'रिकॉम्बिनेंट वायरस' का चला पता

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  February 17th 2026 02:43 PM  |  Updated: February 17th 2026 02:46 PM
भारत में एमपॉक्स वायरस के बदले स्वरूप 'रिकॉम्बिनेंट वायरस' का चला पता

भारत में एमपॉक्स वायरस के बदले स्वरूप 'रिकॉम्बिनेंट वायरस' का चला पता

GTC Lifestyle: एक तरफ़ जहां दुनियाभर में इंसानों की जीवनशैली में आमूलचूल बदलाव देखने में आ रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ़ असाधारण तरह की बीमारियां भी दुनियाभर में पनप रही हैं। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में यूनाइटेड किंगडम (UK) और भारत में एमपॉक्स (Mpox) वायरस के एक नए और दुर्लभ स्वरूप 'रिकॉम्बिनेंट वायरस' (Recombinant Virus) की पहचान की है। यह खोज वैज्ञानिकों के लिए चिंता और शोध का विषय बन गई है, क्योंकि यह वायरस के दो अलग-अलग प्रकारों के मिलने से बना है।

एमपॉक्स का नया 'हाइब्रिड' रूप

फ़रवरी 2026 में जारी WHO की रिपोर्ट के मुताबिक़, एमपॉक्स वायरस के क्लेड Ib (Clade Ib) और क्लेड IIb (Clade IIb) के जेनेटिक मिश्रण से यह नया रिकॉम्बिनेंट स्ट्रेन तैयार हुआ है। आसान भाषा में अगर इसे समझना चाहें तो यह एक 'हाइब्रिड' वायरस है, जिसमें दो अलग-अलग स्ट्रेन के गुण मौजूद हैं।

प्रमुख मामले और पृष्ठभूमि

पहला मामला अक्टूबर 2025 में एक ऐसे यात्री में पाया गया, जो दक्षिण-पूर्व एशिया की यात्रा से लौटा था। दिसंबर 2025 में जीनोम सीक्वेंसिंग के बाद इसे 'रिकॉम्बिनेंट' घोषित किया गया। जहां तक बात है भारत की, तो भारत में सितंबर 2025 में एक व्यक्ति संक्रमित पाया गया था, जो अरब प्रायद्वीप से लौटा था। शुरुआत में इसे साधारण क्लेड II माना गया था, लेकिन वैश्विक डेटाबेस अपडेट होने के बाद जनवरी 2026 में इसे उसी नए रिकॉम्बिनेंट स्ट्रेन के रूप में फ़िर पहचाना गया।

क्या है रिकॉम्बिनेंट वायरस?

असल में रिकॉम्बिनेशन (Recombination) एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। यह तब होती है जब एक ही व्यक्ति एक ही समय में वायरस के दो अलग-अलग स्ट्रेन से संक्रमित हो जाता है। शरीर की एक ही कोशिका के भीतर ये दोनों वायरस अपना जेनेटिक मटेरियल (आनुवंशिक सामग्री) आपस में बदल लेते हैं, जिससे एक नया 'तीसरा स्वरूप' जन्म लेता है।

क्लेड Ib: यह आमतौर पर अधिक गंभीर बीमारी और तेज़ी से फै़लने के लिए जाना जाता है।

क्लेड IIb: यह 2022 के वैश्विक प्रकोप के लिए ज़िम्मेदार था और आमतौर पर कम घातक माना जाता है।

नया स्वरूप: इसमें इन दोनों के जेनेटिक तत्व मौजूद हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि भारत वाले नमूने में 34 और यूके वाले नमूने में 28 रिकॉम्बिनेंट ट्रैक मिले हैं।

क्या यह ज़्यादा ख़तरनाक है?

WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बक़ौल, हालांकि अभी घबराने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बेहद ज़रूरी है।

लक्षण: ग़नीमत रही कि दोनों संक्रमित मरीजों में सामान्य एमपॉक्स जैसे ही लक्षण देखे गए और किसी को भी गंभीर बीमारी नहीं हुई।

संक्रामकता: अभी यह साफ़ नहीं है कि यह नया रूप पुराने वायरस से ज़्यादा तेज़ी से फै़लता है या नहीं। WHO ने कहा है कि इस पर निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाज़ी होगी।

ख़तरा: वर्तमान में वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम मूल्यांकन में कोई बदलाव नहीं किया गया है, यानी ख़तरा अभी 'कम' श्रेणी में ही है।

आगे की राह और सावधानी

मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि ये दो मामले अलग-अलग समय और स्थानों पर मिले हैं, इसलिए मुमकिन है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके कुछ और अनचाहे मामले मौजूद हों। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश यात्रा से लौटने के बाद बुखार या त्वचा पर दाने दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं और संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से बचें। कुल-मिलाकर जीनोमिक निगरानी (Genomic Surveillance) को बढ़ाना होगा, ताकि वायरस के बदलते स्वरूप पर नज़र रखी जा सके।

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