Monday, 16th of February 2026

भारत-जापान के बीच मज़बूत रिश्ते की मिसाल, नौसेना ने गंभीर रूप से बीमार जापानी नागरिक को बचाया

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Preeti Kamal  |  February 15th 2026 02:13 PM  |  Updated: February 15th 2026 02:22 PM
भारत-जापान के बीच मज़बूत रिश्ते की मिसाल, नौसेना ने गंभीर रूप से बीमार जापानी नागरिक को बचाया

भारत-जापान के बीच मज़बूत रिश्ते की मिसाल, नौसेना ने गंभीर रूप से बीमार जापानी नागरिक को बचाया

जम्मू-कश्मीर: भारतीय नौसेना ने शनिवार को त्वरित कार्रवाई करते हुए विशाखापट्टनम के पास एक जहाज पर सवार गंभीर रूप से बीमार जापानी नागरिक की जान बचाई। रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क अधिकारी एवं प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि एक ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ और विश्वसनीय वैश्विक सुरक्षा साझेदार के रूप में भारतीय नौसेना ने 14 फरवरी को विशाखापट्टनम से 200 किलोमीटर दूर जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JMSDF) के एक जहाज से गंभीर रूप से बीमार जापानी नाविक को निकालने के लिए सी किंग हेलीकॉप्टर रवाना किया। मरीज को सुरक्षित रूप से INS डेगा लाया गया और वहां से नौसेना अस्पताल कल्याणी में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। यह मेडिकल इवैक्यूएशन (MEDEVAC) ऑपरेशन भारत और जापान के बीच मजबूत समुद्री सहयोग को दर्शाता है।

भारत-जापान के बीच मित्रता का लंबा इतिहास रहा

भारत और जापान के बीच ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ है। दोनों देशों के बीच मित्रता का लंबा इतिहास रहा है, जो आध्यात्मिक निकटता तथा मजबूत सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों पर आधारित है। जापान के ‘शिचिफुकुजिन’ यानी सात सौभाग्य देवताओं की जड़ें हिंदू परंपराओं से जुड़ी मानी जाती हैं। जापान के नारा स्थित तोदाइजी मंदिर में 752 ईस्वी में भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा के ‘नेत्रोन्मीलन’ (आंख खोलने के संस्कार) का अनुष्ठान भारतीय भिक्षु बोधिसेन ने किया था, जिसे भारत-जापान के प्रारंभिक संपर्क के रूप में देखा जाता है।

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने टोक्यो के उएनो चिड़ियाघर को भेंट किया था एक भारतीय हाथी

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1949 में टोक्यो के उएनो चिड़ियाघर को एक भारतीय हाथी भेंट किया था, जिसकी जापान में व्यापक सराहना हुई। 1903 में स्थापित जापान-इंडिया एसोसिएशन जापान का सबसे पुराना अंतरराष्ट्रीय मैत्री संगठन है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत ने सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में भाग नहीं लिया, बल्कि 28 अप्रैल 1952 को जापान के साथ अलग शांति संधि पर हस्ताक्षर कर राजनयिक संबंधों की शुरुआत की। तब से दोनों देशों के संबंध राजनीतिक, रक्षा और सुरक्षा, आर्थिक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क सहित कई क्षेत्रों में विस्तृत हो चुके हैं।

कई महान विभूतियों के जापान से जुड़ने का रहा है इतिहास

आधुनिक काल में जापान से जुड़े प्रमुख भारतीयों में स्वामी विवेकानंद, नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर, उद्योगपति जेआरडी टाटा, स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस, रास बिहारी बोस और न्यायमूर्ति राधा बिनोद पाल शामिल रहे हैं। टोक्यो युद्ध अपराध न्यायाधिकरण में न्यायमूर्ति राधा बिनोद पाल की असहमति की राय ने जापानी जनता पर गहरा प्रभाव डाला, जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है।

दोनों देश रणनीतिक सामंजस्य बढ़ाने में सहयोगी

दोनों देशों के बीच रणनीतिक सामंजस्य लगातार बढ़ रहा है। एक ओर भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’, ‘सागर’ (SAGAR) सिद्धांत पर आधारित इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण और इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) है, वहीं दूसरी ओर जापान की ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ (FOIP) परिकल्पना है। जापान ने IPOI के कनेक्टिविटी स्तंभ में सहयोग का नेतृत्व करने पर सहमति दी है। जापान भारत-नेतृत्व वाली पहलों जैसे इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA), कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) और लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन (LeadIT) से भी जुड़ा है। भारत और जापान क्वाड ढांचे तथा भारत-जापान-ऑस्ट्रेलिया सप्लाई चेन रेजिलिएंस इनिशिएटिव (SCRI) के तहत भी सहयोग कर रहे हैं।

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