GTC International: फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने पाकिस्तान के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) का पदभार संभाल लिया है। इस महत्वपूर्ण और व्यापक शक्तियों वाले पद की आधिकारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) दिसंबर 2025 में जारी की गई, जिसने देश की सैन्य कमान संरचना में 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा बदलाव किया है। इस नई संवैधानिक व्यवस्था के तहत, मुनीर 2030 तक पाकिस्तानी सेना प्रमुख और CDF दोनों पदों पर बने रहेंगे।
President of Pakistan Asif Ali Zardari approved the appointment of Field Marshal Syed Asim Munir, NI (M), HJ, as Chief of Army Staff (#COAS) concurrently as Chief of the Defence Forces (#CDF) for 5 years pic.twitter.com/i9Cnm6E3wL
— Syed Asim Munir (@SyedAsimMunir) December 5, 2025
CDF की नियुक्ति और संवैधानिक बदलाव
पाकिस्तान की संसद द्वारा पारित 27वें संवैधानिक संशोधन ने चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) का नया पद सृजित किया है। यह पद अब तक मौजूद जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) के चेयरमैन के पद की जगह लेगा। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह पर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की नियुक्ति को मंज़ूरी दी।
प्रमुख बिंदु:
मुनीर का कार्यकाल 5 साल का होगा और यह अधिसूचना जारी होने की तारीख़ से शुरू होगा, जिससे वह 2030 तक पद पर बने रहेंगे।
वह सेना, नौसेना और वायु सेना तीनों सैन्य शाखाओं के कमांडर होंगे।
CDF के पास रणनीतिक संपत्तियों (Strategic Assets), जिसमें परमाणु कमान भी शामिल है, पर सीधा नियंत्रण होगा।
कमान संभालने के बाद मुनीर का बयान
फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने CDF का पदभार ग्रहण करने के बाद देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और सैन्य आधुनिकीकरण पर ज़ोर दिया।
मुख्य बातें:
क्षेत्रीय सुरक्षा पर चेतावनी: मुनीर ने भारत को किसी भी छोटे से छोटे उकसावे पर भी 'निर्णायक जवाब' देने की चेतावनी दी। उन्होंने यह भी कहा कि 'परमाणु वातावरण' में युद्ध के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन पाकिस्तान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
आंतरिक ख़तरों पर फ़ोकस: उन्होंने आतंकवाद और अराजकता को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा ख़तरा बताया और इन्हें जड़ से ख़त्म करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सैन्य आधुनिकीकरण: मुनीर ने मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस की बढ़ती प्रकृति को देखते हुए सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच एकीकृत कमान और तालमेल बढ़ाने की ज़रुरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि CDF की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है।
कूटनीति और शांति: उन्होंने पाकिस्तान को एक शांति-प्रिय देश बताते हुए अमेरिका और चीन सहित प्रमुख शक्तियों के साथ मज़बूत संबंधों को बढ़ावा देने की बात कही, लेकिन राष्ट्रीय हितों से किसी भी क़ीमत पर समझौता न करने का संकल्प लिया।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
इस बड़े सैन्य बदलाव और मुनीर के बढ़े हुए कार्यकाल को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज है। विपक्षी नेता इमरान ख़ान ने इस कदम को 'संवैधानिक तख़्तापलट' और 'तानाशाही' की संज्ञा दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मुनीर की नीतियां पाकिस्तान के लिए विनाशकारी साबित हो रही हैं और वह जान-बूझकर अफ़ग़ानिस्तान के साथ तनाव बढ़ा रहे हैं। हालांकि, सरकारी पक्ष का कहना है कि CDF का पद युद्ध की बदलती प्रकृति के कारण जल्द निर्णय लेने और बेहतर समन्वय के लिए आवश्यक है।