GTC News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार एवं आजीविका मिशन' (ग्रामीण) के तहत महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिखी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक प्रदेश की 23 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को रोज़गार उपलब्ध कराया गया है, जो राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक क़दम माना जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण से बनेगा आत्मनिर्भर भारत! 📷आज 1.48 करोड़ लखपति दीदी अपनी मेहनत से आत्मनिर्भर बन रही हैं।📷देश के आधे स्टार्टअप्स में महिला निदेशक व्यापार और नेतृत्व नारी शक्ति की मजबूत मौजूदगी को दर्शाता है।📷मुद्रा योजना के 70% लाभार्थी महिलाएं यह साबित करती हैं कि भरोसा,… pic.twitter.com/kvVlKDYrXz
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) December 22, 2025
महिला मेट्स के खाते में पहुंचे ₹111 करोड़
ग्रामीण विकास योजनाओं और मनरेगा (MGNREGA) के सफ़ल संचालन के लिए सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को ही 'प्रबंधन' की ज़िम्मेदारी सौंपी है।
32,000 महिला मेट्स की नियुक्ति: इस वित्तीय वर्ष में लगभग 32,000 महिलाओं को 'महिला मेट' (पर्यवेक्षक) के रूप में तैनात किया गया।
DBT के ज़रिए भुगतान: इन महिला मेट्स को उनके कौशल और परिश्रम के बदले 111 करोड़ रुपये से ज़्यादा की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफ़र की गई है।
SHG को प्राथमिकता: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इसमें प्राथमिकता दी गई है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
समयबद्ध भुगतान: 97% श्रमिकों को मिली राहत
योगी सरकार ने रोज़गार देने के साथ-साथ 'पारदर्शिता' और 'समयबद्धता' पर विशेष ज़ोर दिया है।
सटीक भुगतान प्रणाली: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 97% से अधिक श्रमिकों को उनका मानदेय समय पर दिया गया है।
भ्रष्टाचार पर लगाम: डिजिटल भुगतान और कड़ी निगरानी के कारण बिचौलियों की भूमिका ख़त्म हुई है, जिससे श्रमिकों का भरोसा सरकार पर बढ़ा है।
कुल व्यय: ग्रामीण रोज़गार गारंटी के अंतर्गत अब तक राज्य में 6,703 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
समावेशी विकास और पलायन पर रोक
सरकार की इन नीतियों का सबसे बड़ा असर ग्रामीण इलाक़ों से होने वाले पलायन पर पड़ा है।
SC/ST परिवारों को प्राथमिकता: रोज़गार वितरण में अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों को विशेष वरीयता दी जा रही है।
स्थानीय रोजगार: गांवों में ही काम मिलने से परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
महिला नेतृत्व: गांवों में महिलाएं अब केवल मज़दूर नहीं, बल्कि प्रबंधक (मेट) के रूप में काम संभाल रही हैं, जिससे उनके सामाजिक सम्मान में बढ़ोतरी हुई है।
"हमारी सरकार का लक्ष्य 'अंत्योदय' है। जब गांव की महिलाएं सशक्त होंगी और उन्हें घर के पास ही सम्मानजनक रोजगार मिलेगा, तभी उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश से विकसित प्रदेश बनेगा।" — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
आज प्रदेश के अंदर सुरक्षा का वातावरण होने के कारण 35% से अधिक महिलाएं कामकाजी बन चुकी हैं... pic.twitter.com/5hEoFUHGr0
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) November 18, 2025