Sunday, 5th of July 2026

MLA पल्लवी पटेल और पुलिस में झड़प, UGC के समर्थन में निकाला था मार्च

Edited By: Preeti Kamal | Updated at: February 10th 2026 05:32 PM
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MLA पल्लवी पटेल और पुलिस में झड़प, UGC के समर्थन में निकाला था मार्च

MLA पल्लवी पटेल और पुलिस में झड़प, UGC के समर्थन में निकाला था मार्च

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: UGC की गाइडलाइन्स को लागू करने को लेकर समर्थन में उतरीं अपना दल कमेरावादी की अध्यक्ष व विधायक पल्लवी पटेल और पुलिस के बीच ज़बरदस्त झड़प होने की ख़बर सामने आई है। पल्लवी पटेल यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन-2026 (UGC-Equity Regulation-2026) के समर्थन में कई महिलाओं के साथ पैदल मार्च निकाल रहीं थीं और आईटीम चौराहे से निकलते हुए विधानसभा तक पहुंचना चाहती थीं। इसके बाद जैसे ही मार्च करते हुए समर्थक जब रिज़र्व पुलिस लाइन के पास से गुज़रने लगे तो इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया और बैरिकेडिंग लगा दी। इसके बाद वो वहीं सड़क पर ही धरने पर बैठ गईं।

धरने पर बैठने के बाद भी पलिलवी शांत नहीं बैठीं उन्होंने यूजीसी रेगुलेशन कानून को लेकर मोर्चा खोल दिया, इसे लागू करने की मांग की और नारेबाज़ी की। नारेबाज़ी के दौरान समर्थकों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिनपर 'यूजीसी रेगुलेशन लागू करो' जैसे नारे लिखे हुए थे। पुलिस ने जब इन्हें बैरिकेडिंग लगाकर आगे बढ़ने से रोका तभी विधायक पल्लवी पटेल और पुलिस के बीच झड़प हो गई। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने बातचीत के रास्ते का सुझाव दिया। लेकिन, पल्लवी पटेल इसके लिए राज़ी नहीं हुईं। काफी देर हंगामे और नारेबाज़ी के बाद भी जब पल्लवी पटेल और पुलिस में सुलह नहीं हो पाई तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और ईको गार्डन भेज दिया।

किसी भी कानून में सुधार की गुंजाईंश हमेशा रहती है, तो इस कानून पर बैन क्यों ?

पल्लवी पटेल का कहना है कि ये कोई प्रदर्शन नहीं बल्कि  हम आम जनता के मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरे हैं। हम इसका जवाब सरकार से चाहते हैं। हमारा सवाल यह है कि समानता को बढ़ावा देने वाले यूजीसी रेग्युलेशन 2026 को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश और संसदीय समिति की संस्तुति के बाद लाया गया, तो फिर समाज के एक वर्ग के लोगों के विरोध में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे बैन क्यों किया? ये कानून समानता को लागू करने वाला था। जब इस रेग्युलेशन में खामियां हैं, तो जीएसटी, नोटबंदी, धारा-370 जैसे कानून रातों रात कैसे आए? क्या उनमें कमियां नहीं थीं? किसी भी कानून में सुधार की गुंजाईंश हमेशा रहती है, तो इस कानून पर बैन क्यों लगा? यूनिवर्सिटी में यह रेग्युलेशन लागू होना चाहिए।

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