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अटल जयंती पर लखनऊ को 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' की सौगात: पीएम मोदी ने किया लोकार्पण

By: GTC News Desk | Edited By: Mohd Juber Khan | Updated at: December 25th 2025 04:51 PM
अटल जयंती पर लखनऊ को 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' की सौगात: पीएम मोदी ने किया लोकार्पण

अटल जयंती पर लखनऊ को 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' की सौगात: पीएम मोदी ने किया लोकार्पण

लखनऊ: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती और 'सुशासन दिवस' के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नवनिर्मित 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' का उद्घाटन किया। 65 एकड़ में फैले इस भव्य स्मारक को राष्ट्र को समर्पित करते हुए पीएम मोदी ने भारतीय राजनीति के तीन स्तंभों—डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को नमन किया।

सीएम योगी का संबोधन: "विरासत और विकास का संगम"

प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल को 'न्यू इंडिया' की वैचारिक चेतना का केंद्र बताया। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा:

"राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करकमलों से होने जा रहा है। इस अवसर पर मैं उनका उत्तर प्रदेश की राजधानी में स्वागत करता हूं। पीएम मोदी की प्रेरणा से जब हम आत्मनिर्भर और विकसित भारत का वर्तमान स्वरूप देख रहे हैं, तो कहीं ना कहीं हमारे प्रेरणा के रूप में श्यामाप्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी जी का मार्गदर्शन एक नई प्रेरणा के रूप में हमारे साथ रहता है।"

उन्होंने आगे कहा कि यह स्थल केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रवाद और सुशासन की पाठशाला बनेगा।

राष्ट्र प्रेरणा स्थल की 5 बड़ी विशेषताएं

यह स्मारक लखनऊ के बसंत कुंज (दुबग्गा) क्षेत्र में गोमती नदी के किनारे लगभग 230 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

65 फीट ऊंची विशाल प्रतिमाएं: परिसर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की 65-65 फीट ऊंची भव्य कांस्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। प्रत्येक प्रतिमा का वजन लगभग 42 टन है।

कमल के आकार का अत्याधुनिक संग्रहालय: 98,000 वर्ग फुट में फैला एक डिजिटल म्यूजियम बनाया गया है, जिसमें 5 गैलरियां और 12 इंटरप्रिटेशन वॉल हैं। यहां इन महापुरुषों के जीवन संघर्ष को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दिखाया गया है।

विशाल क्षमता: यहां एक विशाल रैली स्थल बनाया गया है, जहां 2 लाख से अधिक लोग एक साथ जुट सकते हैं। साथ ही 3,000 की क्षमता वाला एक एम्फीथिएटर भी तैयार किया गया है।

सांस्कृतिक प्रतीक: म्यूजियम के भीतर सुदर्शन चक्र, भारत माता की आकृति और जनसंघ के प्रतीक 'दीपक' की विशेष कलाकृतियां उकेरी गई हैं।

सुविधाएं: परिसर में ध्यान केंद्र, योग केंद्र, कैफेटेरिया और भव्य लैंडस्केपिंग की गई है, जो इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी स्थापित करेगी।

वाजपेयी की अटल विरासत को नमन

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर एक विशेष डॉक्यूमेंट्री भी देखी, जो इन तीनों नेताओं के राष्ट्र निर्माण में योगदान पर आधारित थी। उद्घाटन के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि लखनऊ अटल जी की कर्मभूमि रही है और यहां 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' का होना सुशासन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराता है।

इस ऐतिहासिक समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उत्तर प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी उपस्थित रहे। सुरक्षा के लिहाज से पूरे क्षेत्र को एसपीजी और एटीएस के कड़े घेरे में रखा गया था।