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लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में भारी धांधली और विपक्षी मतदाताओं के नाम काटने की सोची-समझी साज़िश का आरोप लगाया।
"उपचुनाव में लूटा गया था वोट"
अखिलेश यादव ने हाल के उपचुनावों का ज़िक्र करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
"हमसे कहा गया था कि SIR (Special Intensive Revision) के बाद मतदाता सूची में कोई कसर नहीं छूटेगी, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। हमने उपचुनाव में देखा था कि कैसे सरेआम वोट लूटा गया था। जब हमने सीसीटीवी फुटेज की मांग की, तो चुनाव आयोग ने साफ़ कह दिया कि यह किसी भी राजनीतिक दल को नहीं दी जाएगी। आख़िर ऐसी क्या बात है जिसे आयोग छिपाना चाहता है?"
#WATCH लखनऊ, उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, "... हमसे कहा गया था कि SIR के बाद मतदाता सूची में कोई कसर नहीं छूटेगी... हमने उपचुनाव में देखा था कि उपचुनाव में वोट लूटा गया था... चुनाव आयोग ने कहा था कि CCTV फुटेज किसी भी राजनीतिक दल को नहीं दी जाएगी...… pic.twitter.com/awQKHGfVyW
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 24, 2026
SIR और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप
सपा प्रमुख ने दावा किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर एक ख़ास वर्ग और विपक्षी विचारधारा वाले लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए:
एक ही नाम से दो वोट: अखिलेश ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में भारी विसंगतियां हैं, जहां एक ही व्यक्ति के नाम पर दो-दो वोट बने हुए हैं, जो फर्ज़ी मतदान की आशंका को जन्म देता है।
लाखों वोट काटने की साज़िश: उन्होंने पहले भी अंदेशा जताया था कि एसआईआर के माध्यम से प्रदेश भर में लाखों मतदाताओं (विशेषकर पीडीए - पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को मतदाता सूची से बाहर किया जा रहा है।
BLO की ट्रेनिंग और कर्मचारियों की मौत पर घेरा
अखिलेश यादव ने बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) की कार्यदशा और उनके प्रशिक्षण पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा:
"हमें पता है कि इन्होंने बीएलओ की ट्रेनिंग कैसी कराई थी? बिना सही संसाधनों और दबाव में काम करने के कारण कई बीएलओ की जान तक चली गई। क्या चुनाव आयोग को उन कर्मचारियों के परिवारों की कोई चिंता नहीं है? हम मांग करते हैं कि आयोग निष्पक्ष होकर हमारा सहयोग करे ताकि लोकतंत्र सुरक्षित रहे।"
चुनावी निष्पक्षता पर सवाल
सपा प्रमुख ने कहा कि यदि मतदाता सूची ही पारदर्शी नहीं होगी, तो निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के इशारे पर प्रशासनिक तंत्र विपक्षी दलों के जनाधार वाली सीटों पर मतदाताओं की संख्या कम करने का प्रयास कर रहा है।