Sunday, 11th of January 2026

8वां वेतन आयोग: लागू होते ही क्या-क्या होगा और कितना पड़ेगा सरकारी खजाने पर बोझ?

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  December 06th 2025 02:24 PM  |  Updated: December 06th 2025 02:24 PM
8वां वेतन आयोग: लागू होते ही क्या-क्या होगा और कितना पड़ेगा सरकारी खजाने पर बोझ?

8वां वेतन आयोग: लागू होते ही क्या-क्या होगा और कितना पड़ेगा सरकारी खजाने पर बोझ?

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission - CPC) के गठन को मंज़ूरी दे दी है, जिससे देश के करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों के वेतन और पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है। यह आयोग हर 10 साल पर सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन की सिफ़ारिशें करता है।

अर्थशास्त्रियों और वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, 8वां वेतन आयोग लागू होते ही कर्मचारियों को एक बड़ी राहत मिलेगी, लेकिन इससे सरकारी खजाने पर एक बड़ा वित्तीय बोझ भी पड़ने की संभावना है।

8वां वेतन आयोग: लागू होते ही क्या-क्या होगा?

8वें वेतन आयोग की सिफारिशें आमतौर पर 1 जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद है। इसके लागू होने पर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए निम्नलिखित बदलाव होंगे:

1. वेतन और पेंशन में बंपर बढ़ोतरी

सैलरी में वृद्धि: विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक़, कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में 30% से 34% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor): वेतन आयोग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा फिटमेंट फैक्टर होता है। 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 गुना था। 8वें वेतन आयोग में इसे 1.92 से 2.46 गुना के बीच रखे जाने की संभावना है। यह फैक्टर सीधे कर्मचारियों के मूल वेतन (Basic Pay) को निर्धारित करेगा।

उदाहरण के लिए: यदि मूल वेतन ₹50,000 है और फिटमेंट फैक्टर 2.46 गुना होता है, तो नया मूल वेतन बढ़कर ₹1,23,000 हो जाएगा।

2. महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR)

डीए/डीआर समायोजन: 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) को मूल वेतन में समायोजित किया जा सकता है। इसका अर्थ है कि DA की पूरी राशि या उसका एक हिस्सा मूल वेतन का हिस्सा बन जाएगा।

अन्य भत्तों पर असर: मूल वेतन बढ़ने से मकान किराया भत्ता (HRA), परिवहन भत्ता (TA) और अन्य भत्ते भी उसी बढ़े हुए मूल वेतन के आधार पर तय होंगे, जिससे कर्मचारियों की कुल सैलरी में और अधिक इजाफा होगा।

3. अन्य मौद्रिक लाभों की समीक्षा

वेतन आयोग केवल सैलरी तक सीमित नहीं रहता। यह भत्ते, बोनस, ग्रेच्युटी और कर्मचारियों को दिए जाने वाले अन्य प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहनों (Performance-Based Incentives) की भी व्यापक समीक्षा करेगा। इससे कर्मचारियों के समग्र मौद्रिक लाभ में वृद्धि होगी।

सरकार पर कितना पड़ेगा बोझ?

अर्थशास्त्रियों और वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, 8वां वेतन आयोग लागू होने से सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ना तय है।

राजकोषीय दबाव: विशेषज्ञों का मानना है कि यह सबसे महंगा वेतन संशोधन हो सकता है। अनुमान है कि वेतन और पेंशन में कुल खर्च ₹4 लाख करोड़ से अधिक का हो सकता है। एरियर जोड़ने पर यह बोझ ₹9 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। यह भारी खर्च सरकार के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) पर दबाव डालेगा। सरकार को अपने खर्चों को मैनेज करने और राजकोषीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनानी होगी।

राज्यों पर असर: केंद्र सरकार के फैसलों का असर राज्य सरकारों पर भी पड़ता है, क्योंकि अधिकांश राज्य भी केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को अपने कर्मचारियों के लिए अपनाते हैं। इससे राज्य सरकारों के वित्त पर भी दबाव बढ़ेगा।

अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर

वित्तीय बोझ के बावजूद, अर्थशास्त्री मानते हैं कि 8वें वेतन आयोग का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ेगा:

उपभोग में वृद्धि: कर्मचारियों के हाथों में बढ़ी हुई सैलरी आने से उनकी क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ेगी। इससे उपभोग (Consumption) में तेजी आएगी।

बाज़ार को गति: उपभोग बढ़ने से ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी (FMCG), उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं (Consumer Durables) और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ेगी, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

पूंजी बाज़ार में निवेश: बढ़ी हुई आय का एक हिस्सा बचत और निवेश के रूप में पूंजी बाजार (बैंक, शेयर बाजार) में भी जा सकता है।

कुल-मिलाकर, 8वां वेतन आयोग एक तरफ कर्मचारियों को राहत और अर्थव्यवस्था को गति देगा, तो दूसरी तरफ सरकार के लिए वित्तीय प्रबंधन की एक बड़ी चुनौती पेश करेगा। इस चुनौती को राजकोषीय समझदारी के साथ संतुलित करना होगा।