Sunday, 11th of January 2026

'वंदे मातरम' के 150 साल: संसद में विशेष चर्चा, सत्ता पक्ष-विपक्ष में तीख़ी बहस के आसार

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  December 08th 2025 03:59 PM  |  Updated: December 08th 2025 09:41 PM
'वंदे मातरम' के 150 साल: संसद में विशेष चर्चा, सत्ता पक्ष-विपक्ष में तीख़ी बहस के आसार

'वंदे मातरम' के 150 साल: संसद में विशेष चर्चा, सत्ता पक्ष-विपक्ष में तीख़ी बहस के आसार

GTC News: राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय संसद के दोनों सदनों में विशेष चर्चा का आयोजन किया जा रहा है। यह चर्चा शीतकालीन सत्र के दौरान हो रही है और इसके काफ़ी हंगामेदार रहने की संभावना है, क्योंकि इस गीत को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबे समय से विवाद रहा है।

लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की शुरुआत

सोमवार, 8 दिसंबर को लोकसभा में इस विशेष चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने औपचारिक तौर पर कर दी है।

निर्धारित समय: लोकसभा में इस चर्चा के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।

सरकार का उद्देश्य: सरकार का कहना है कि चर्चा का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता आंदोलन में 'वंदे मातरम' की भूमिका और समकालीन भारत में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित करना है।

पीएम मोदी का रुख़: प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान गीत के इतिहास से जुड़े कुछ नए और अज्ञात तथ्य भी उज़ागर कर सकते हैं। उन्होंने पहले भी कांग्रेस पर 1937 में गीत के कुछ प्रमुख छंदों को हटाने का आरोप लगाया था, जिसे वे "वंदे मातरम को टुकड़े-टुकड़े करना" बताते हैं।

विपक्ष के वक्ता: मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की तरफ से पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और सदन में पार्टी के उप नेता गौरव गोगोई समेत लगभग आठ वक्ता भाग ले सकते हैं।

राज्यसभा में अमित शाह संभालेंगे कमान!

लोकसभा में चर्चा के बाद, राज्यसभा में मंगलवार, 9 दिसंबर को इस मुद्दे पर बहस शुरू होने की संभावना है।

चर्चा की शुरुआत: राज्यसभा में सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह चर्चा की शुरुआत करेंगे, जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा बहस में हिस्सा लेंगे।

विवाद का मुख्य कारण और इतिहास

बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में रचित यह गीत उनके उपन्यास 'आनंदमठ' (1882) में प्रकाशित हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह एक प्रमुख प्रेरणा स्रोत और 'युद्ध घोष' बना।

विवाद का केंद्र: विवाद मुख्य रूप से गीत के कुछ छंदों को लेकर है, जिनमें मातृभूमि को हिंदू देवी दुर्गा और लक्ष्मी के रूप में वर्णित किया गया है। कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग इसे अपनी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत मानते हुए पूरा गीत गाने या इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार करने से इनकार करते हैं।

1937 का घटनाक्रम: 1937 में, कांग्रेस ने सर्व-समावेशी राष्ट्रीय आंदोलन को ध्यान में रखते हुए, गीत के उन छंदों को राष्ट्रीय अवसरों पर गाने के लिए तय नहीं किया, जिनमें हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख था।

वर्तमान राजनीतिक टकराव: सत्ता पक्ष (भाजपा) का आरोप है कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के कारण गीत की मूल आत्मा को कमज़ोर किया, जबकि कांग्रेस का तर्क है कि यह फै़सला राष्ट्रीय एकता और सभी समुदायों को साथ रखने के लिए लिया गया था।

संसद में होने वाली यह चर्चा 'वंदे मातरम' के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करने के साथ-साथ, दशकों पुराने राजनीतिक टकराव को एक बार फिर केंद्र में लाएगी, जिससे दोनों सदनों में तीख़ी बयानबाज़ी  और ज़ोरदार बहस की आशंका है।