Sunday, 11th of January 2026

देशभर में क्यों हो रही है 'संचार साथी' ऐप पर चर्चा?

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  December 03rd 2025 04:32 PM  |  Updated: December 03rd 2025 04:32 PM
देशभर में क्यों हो रही है 'संचार साथी' ऐप पर चर्चा?

देशभर में क्यों हो रही है 'संचार साथी' ऐप पर चर्चा?

GTC News: हाल ही में, संचार साथी (Sanchar Saathi) ऐप देशभर में चर्चा का केंद्र बन गया है, खासकर दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा मोबाइल फोन निर्माताओं को इसे नए हैंडसेट में प्री-इंस्टॉल करने का निर्देश दिए जाने के बाद। जहां सरकार इसे साइबर फ्रॉड और मोबाइल चोरी रोकने का एक प्रभावी हथियार बता रही है, वहीं विपक्ष और तकनीकी विशेषज्ञ इसे निजता के लिए खतरा मान रहे हैं।

 क्या है 'संचार साथी' ऐप?

'संचार साथी' पोर्टल और ऐप, दूरसंचार विभाग की एक नागरिक-केंद्रित पहल है। इसे मुख्य रूप से साइबर धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने और टेलीकॉम सुरक्षा को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ऐप नागरिकों को कई महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करता है:

खोए/चोरी हुए फोन को ब्लॉक करना: उपयोगकर्ता अपने गुम हुए या चोरी हुए मोबाइल फोन की रिपोर्ट करके उसका IMEI नंबर ब्लॉक करा सकते हैं, जिससे उस फोन का दोबारा उपयोग या अवैध बिक्री रुक जाती है। अब तक लाखों चोरी/गुम हुए फोन को सफ़लतापूर्वक ब्लॉक किया गया है और कई वापस भी मिले हैं।

IMEI की सत्यता जांच: यह किसी भी मोबाइल हैंडसेट के IMEI नंबर की जाँच करके यह पता लगाने की सुविधा देता है कि वह असली है या नकली (स्पूफ्ड)। यह खास तौर पर सेकेंड-हैंड फोन खरीदने वालों के लिए उपयोगी है।

अपने नाम पर कनेक्शन की जाँच: उपयोगकर्ता यह जान सकते हैं कि उनके नाम और पहचान पर कितने मोबाइल कनेक्शन (सिम) एक्टिव हैं, और यदि कोई फर्जी या अनधिकृत कनेक्शन है, तो उसे रिपोर्ट करके डिस्कनेक्ट करा सकते हैं। इस पहल से करोड़ों फर्जी कनेक्शन बंद किए गए हैं।

संदिग्ध कॉल/मैसेज की रिपोर्ट (चक्षु सेवा): यह सुविधा संदिग्ध फ्रॉड कॉल या मैसेज (चाहे वह सामान्य एसएमएस हो या वॉट्सऐप पर) की रिपोर्ट करने की अनुमति देती है, जिससे धोखाधड़ी करने वालों पर कार्रवाई की जा सके।

विवाद का कारण: अनिवार्य इंस्टॉलेशन और निजता की चिंता!

विवाद तब शुरू हुआ जब DoT ने स्मार्टफोन कंपनियों को नए मोबाइल फोन में इस ऐप को प्री-इंस्टॉल करने का निर्देश दिया और शुरू में ऐसे संकेत दिए गए कि इसे डिलीट या डिसेबल नहीं किया जा सकेगा।

निजता का मुद्दा: विपक्ष और कई तकनीकी विशेषज्ञों ने इसे 'जासूसी ऐप' करार दिया। उन्होंने चिंता जताई कि सरकार इस ऐप के जरिए नागरिकों की गतिविधियों पर नज़र रख सकती है, जो निजता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है। लोगों ने ऐप द्वारा माँगी जाने वाली अनुमतियों (जैसे कैमरा, SMS, कॉल जानकारी, स्टोरेज) पर भी सवाल उठाए।

कंपनियों की आपत्ति: Apple जैसी कुछ बड़ी मोबाइल निर्माता कंपनियां भी इस आदेश से चिंतित थीं, क्योंकि यह उनकी अपनी पॉलिसी के विरुद्ध था जिसमें वे अपने डिवाइस में किसी भी तरह के प्री-लोडेड ऐप को अनुमति नहीं देती हैं।

सरकार की सफ़ाई: 'अनिवार्य नहीं, स्वैच्छिक है'

बढ़ते विवाद और जनविरोध के बाद, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस संबंध में स्पष्टीकरण दिया।

डिलीट करने का विकल्प: मंत्री ने साफ़ किया कि 'संचार साथी' ऐप को फोन से डिलीट (Uninstall) किया जा सकेगा, और इसका उपयोग करना पूरी तरह से स्वैच्छिक (Optional) होगा।

सुरक्षा पर ज़ोर: उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी और मोबाइल चोरी से बचाने के लिए उपलब्ध साधनों के बारे में जानकारी देना है। ऐप का मुख्य लक्ष्य साइबर सुरक्षा बढ़ाना और खोए हुए फोन को ट्रैक करना है, न कि किसी की जासूसी करना।

बहरहाल 'संचार साथी' ऐप एक शक्तिशाली टूल है जो साइबर फ्रॉड और मोबाइल सुरक्षा से निपटने में नागरिकों की मदद करता है। हालाँकि, इसे अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के सरकारी निर्देश ने निजता और स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी। सरकार के स्पष्टीकरण के बाद अब यह साफ़ है कि यह ऐप अनिवार्य नहीं है और नागरिक अपनी इच्छा से इसे इस्तेमाल या डिलीट कर सकते हैं। यह कदम एक तरफ डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की सरकारी मंशा को दर्शाता है, तो दूसरी तरफ नागरिकों के निजता के अधिकार के प्रति जागरूकता को भी उज़ागर करता है।