Saturday, 11th of April 2026

'मेंस्ट्रुअल मास्किंग' ट्रेंड: क्या 'पीरियड ब्लड' से सच में आती है चेहरे पर चमक?

By: GTC News Desk | Edited By: Mohd Juber Khan | Updated at: December 01st 2025 01:32 PM
'मेंस्ट्रुअल मास्किंग' ट्रेंड: क्या 'पीरियड ब्लड' से सच में आती है चेहरे पर चमक?

'मेंस्ट्रुअल मास्किंग' ट्रेंड: क्या 'पीरियड ब्लड' से सच में आती है चेहरे पर चमक?

GTC News: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, ख़ासकर टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर इन दिनों एक अजीबो-ग़रीब 'ब्यूटी ट्रेंड' तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। इस ट्रेंड को 'मेंस्ट्रुअल मास्किंग' या 'मून मास्किंग' नाम दिया गया है, जिसमें महिलाएं अपनी त्वचा को चमकदार बनाने, मुंहासे कम करने और बेहतर बनाने के लिए मासिक धर्म (पीरियड) के ख़ून को चेहरे पर 'फ़ेस मास्क' की तरह लगा रही हैं।

क्या है 'मेंस्ट्रुअल मास्किंग' का दावा?

इस ट्रेंड को फॉलो करने वालों, जिनमें कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी शामिल हैं, का दावा है कि पीरियड ब्लड में कई पोषक तत्व, स्टेम सेल्स (Stem Cells), प्रोटीन और साइटोकिन्स होते हैं जो त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं। उनका तर्क है कि ये तत्व त्वचा की मरम्मत कर सकते हैं, कोलेजन (Collagen) उत्पादन को बढ़ावा दे सकते हैं, और त्वचा को 'प्राकृतिक चमक' प्रदान कर सकते हैं। कुछ लोग इसे 'होममेड वैम्पायर फ़ेशियल' या एक आध्यात्मिक क्रिया (रिचुअल) के रूप में भी प्रचारित कर रहे हैं।

वैज्ञानिक प्रमाणों का अभाव और विशेषज्ञ की राय

जहां एक ओर सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड को 'प्राकृतिक' और 'शक्तिशाली' बताया जा रहा है, वहीं त्वचा विशेषज्ञ (Dermatologists) और स्वास्थ्य एजेंसियां इसके ख़िलाफ़ कड़ी चेतावनी दे रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि:

कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं: चेहरे पर सीधे मासिक धर्म का खून लगाने से त्वचा को फायदा होता है, इसका कोई वैज्ञानिक या क्लिनिकल प्रमाण नहीं है।

संक्रमण का खतरा: मासिक धर्म का रक्त निर्जंतुक (Sterile) नहीं होता है। इसमें योनिमार्ग से बैक्टीरिया, फंगस और मृत ऊतक (Dead Tissue) हो सकते हैं। इसे चेहरे पर लगाने से त्वचा में गंभीर संक्रमण, एलर्जी, जलन और मुंहासे बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

वैम्पायर फेशियल से तुलना गलत: कुछ लोग इसकी तुलना क्लिनिक में किए जाने वाले प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा (PRP) या 'वैम्पायर फेशियल' से करते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ बताते हैं कि PRP एक नियंत्रित और निर्जंतुक (Sterile) प्रक्रिया है जिसमें खून को निकालकर, प्रोसेस करके और स्टरलाइज़ करके ही इस्तेमाल किया जाता है। घर पर कच्चे पीरियड ब्लड का उपयोग करना बिल्कुल अलग और असुरक्षित है।

घटक अवशोषित नहीं होते: भले ही पीरियड ब्लड में स्टेम सेल्स या प्रोटीन हों, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं है कि त्वचा उन्हें बाहरी रूप से अवशोषित कर सकती है और लाभ प्राप्त कर सकती है।

जोखिम और स्वास्थ्य चेतावनी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस DIY (Do It Yourself) ट्रेंड को एक 'जोखिम भरा ब्यूटी हैक' बताया है और लोगों से इससे बचने का आग्रह किया है। उनका साफ़ तौर पर ये मानना है कि यह ट्रेंड वायरल होने के लिए भले ही आकर्षक हो, लेकिन यह त्वचा के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी अपारंपरिक या जोखिम भरे ब्यूटी ट्रेंड को अपनाने से पहले हमेशा विशेषज्ञ से सलाह लेना और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध स्किनकेयर रूटीन पर भरोसा करना ही होशियारी है।