GTC News: संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार, 1 दिसंबर से शुरू हो चुका है और यह 19 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें कुल 15 बैठकें होंगी।
#WATCH | दिल्ली: कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, "बहुत अफसोस की बात है कि सत्ता पक्ष ने पूरे सदन को, लोकतंत्र की मर्यादा को हाईजैक कर लिया है...संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के मुद्दे उठने चाहिए और महत्व मिलना चाहिए, विशेष रूप से विपक्ष के मुद्दों को लेकिन हम देख रहे हैं… pic.twitter.com/os048jjWW3
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 1, 2025
सत्र की शुरुआत से पहले ही सरकार और विपक्ष ने अपने एजेंडे में साफ़ कर दिया है, जिससे यह सत्र काफ़ी हंगामेदार रहने की संभावना है। एक ओर सरकार कई महत्वपूर्ण आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विधेयक पास कराने पर ज़ोर देगी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष 'एसआईआर' (SIR) समेत कई ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। मीडिया गलियारों की मानें तो शीतकालीन सत्र में विपक्ष के हंगामे का मुख्य केंद्र वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) रहने वाला है।
क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR)?
एसआईआर चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को शुद्ध करने, नए मतदाताओं को जोड़ने और डुप्लीकेट/अयोग्य नामों को हटाने की एक प्रक्रिया है। इसे वोटर लिस्ट का 'सफाई अभियान' भी कहा जाता है।
विपक्ष की आपत्ति: कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे इस गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक उद्देश्यों से की जा रही है और इसमें पक्षपात की आशंका है। उन्होंने इस पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की है।
सरकार का रुख़: सरकार ने सर्वदलीय बैठक में इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि SIR चुनाव आयोग की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और इस पर संसद में बहस संभव नहीं है।
#WATCH दिल्ली: राज्यसभा LoP मल्लिकार्जुन खरगे को जवाब देते हुए राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा, "हमें सम्मान कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखनी चाहिए, और अच्छा होगा अगर हम उसी हिसाब से इस पर चर्चा करें। अगर हम उस मुद्दे पर चर्चा करना शुरू कर दें जो हमारे विपक्ष के नेता ने आज… pic.twitter.com/azMYbb7oNd
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 1, 2025
सरकार का एजेंडा: प्रमुख विधायी कार्य
सरकार ने सत्र के दौरान 13 से अधिक महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी की है, जिनमें कई बड़े आर्थिक सुधार शामिल हैं:
परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025: यह बिल भारत में निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने की अनुमति देकर इस क्षेत्र को खोलने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
उच्च शिक्षा आयोग विधेयक, 2025: यह देश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र और स्वशासी बनाने के उद्देश्य से भारतीय उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना का प्रस्ताव करता है।
कर संबंधी विधेयक (Cess Bills):
केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025: इसका उद्देश्य तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर (Compensation Cess) को केंद्रीय उत्पाद शुल्क से बदलना है।
स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025: यह पान मसाला जैसे निर्दिष्ट हानिकारक उत्पादों के निर्माण पर एक नया उपकर (Cess) लगाने का प्रावधान करेगा, जिसका राजस्व राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च किया जाएगा।
बीमा क़ानून (संशोधन) विधेयक, 2025: इसमें बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% करने का प्रस्ताव है।
अन्य आर्थिक सुधार: इनमें दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, कॉरपोरेट कानूनों में संशोधन (Ease of Doing Business के लिए), और प्रतिभूति बाज़ार संहिता (Securities Markets Code Bill) जैसे महत्वपूर्ण विधेयक भी शामिल हैं।
अन्य मुद्दे जिन पर हंगामे की आशंका
एसआईआर के अलावा, विपक्ष कई अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है, जिससे सदन में गतिरोध उत्पन्न होने की पूरी संभावना है:
राष्ट्रीय सुरक्षा: लाल किले के पास हुए विस्फोट जैसी हालिया सुरक्षा चिंताओं पर बहस।
महंगाई और बेरोज़गारी: देश की आर्थिक स्थिति, बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी के आंकड़े।
किसानों की स्थिति: किसानों की आय और कृषि संबंधी समस्याओं पर चर्चा।
प्रदूषण: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण (AQI) की समस्या।
विदेश नीति: अमेरिका के टैरिफ़, चीन के साथ सीमा वार्ता, और विदेश नीति से जुड़े अन्य मसले।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र शुरू होने से पहले ही विपक्ष से सदन को सुचारू रूप से चलाने और "डिलीवरी पर ध्यान देने, ड्रामा नहीं" की अपील की है। अब देखना यह है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इन मुद्दों पर सदन के भीतर कितना सहयोग और कितना टकराव देखने को मिलता है।