नई दिल्ली: भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक कूटनीति के क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी 'द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन' (The Light and the Lotus: Relics of the Awakened One) का औपचारिक उद्घाटन किया।
इस कार्यक्रम में दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों के राजदूत, बौद्ध भिक्षु और विद्वान उपस्थित रहे।
Speaking during the inauguration of the Grand International Exposition of Sacred Piprahwa Relics related to Bhagwan Buddha. https://t.co/8irFbkh8pn
— Narendra Modi (@narendramodi) January 3, 2026
प्रदर्शनी की मुख्य विशेषताएं
यह प्रदर्शनी न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह कला और इतिहास का एक अद्भुत संगम भी है।
पिपरहवा अवशेष: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में स्थित पिपरहवा से प्राप्त ये अवशेष भगवान बुद्ध के वास्तविक शारीरिक अवशेष माने जाते हैं। इन्हें प्रदर्शनी के केंद्र में एक विशेष रूप से निर्मित स्वर्ण मंडप में रखा गया है।
अत्याधुनिक तकनीक: प्रदर्शनी में 'होलोग्राफिक प्रोजेक्शन' और 'ऑगमेंटेड रियलिटी' (AR) का उपयोग किया गया है, जिसके माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन यात्रा और उनके शांति के संदेशों को जीवंत रूप में दर्शाया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता: इस प्रदर्शनी में थाईलैंड, श्रीलंका, वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों से लाई गई बौद्ध कलाकृतियों को भी प्रदर्शित किया गया है।
प्रधानमंत्री का संबोधन: "शांति का मार्ग ही भविष्य का मार्ग"
प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सभा को संबोधित किया। उनके भाषण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
बौद्ध विरासत पर गर्व: प्रधानमंत्री ने कहा कि "भगवान बुद्ध केवल भारत के अतीत नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी प्रेरणा हैं। पिपरहवा के ये पवित्र अवशेष हमें शांति और अहिंसा के उस मार्ग की याद दिलाते हैं, जिसकी आज पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा ज़रूरत है।"
सांस्कृतिक कूटनीति: पीएम ने इस आयोजन को भारत के 'एक्ट ईस्ट' नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि बुद्ध की शिक्षाएं भारत को दुनिया, विशेषकर एशिया के साथ जोड़ती हैं।
राय पिथौरा परिसर का महत्व: उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि राय पिथौरा जैसे सांस्कृतिक केंद्रों का विकास भारत की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा क़दम है।
पिपरहवा अवशेषों का इतिहास
पिपरहवा स्तूप की खुदाई 19वीं सदी के अंत और फिर 1970 के दशक में की गई थी। यहाँ से प्राप्त अस्थि-कलशों पर खुदी हुई ब्राह्मी लिपि ने यह सिद्ध किया था कि ये अवशेष शाक्य वंश के बुद्ध के हैं। दशकों तक राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित रहने के बाद, अब इन्हें आम जनता और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए इस भव्य स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है।
दर्शकों के लिए सूचना
यह प्रदर्शनी अगले 45 दिनों तक राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में जनता के लिए खुली रहेगी। सरकार को उम्मीद है कि इस दौरान लाखों बौद्ध अनुयायी और पर्यटक दिल्ली पहुंचेंगे।
"बुद्ध का संदेश सीमाओं में नहीं बंधा है। 'द लाइट एंड द लोटस' प्रदर्शनी वैश्विक शांति के लिए भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।" — पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय का बयान।