Sunday, 11th of January 2026

झारखंड: चाईबासा और कोलहान में 'खूनी हाथी' का तांडव, 9 दिनों में 22 लोगों की मौत से कोहराम

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  January 10th 2026 06:00 PM  |  Updated: January 10th 2026 06:57 PM
झारखंड: चाईबासा और कोलहान में 'खूनी हाथी' का तांडव, 9 दिनों में 22 लोगों की मौत से कोहराम

झारखंड: चाईबासा और कोलहान में 'खूनी हाथी' का तांडव, 9 दिनों में 22 लोगों की मौत से कोहराम

चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम: झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम जिला इन दिनों एक विशालकाय दंतैल हाथी के आतंक से थर्रा उठा है। चाईबासा और कोलहान वन प्रभाग क्षेत्रों में पिछले नौ दिनों के भीतर इस हाथी ने 22 मासूम ज़िंदगियों को बेरहमी से कुचलकर ख़त्म कर दिया है। इलाके में दहशत का आलम यह है कि सूरज ढलते ही लोग अपने घरों में दुबक जाते हैं और कई गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

मौत का तांडव: 9 दिन और 22 शिकार

इस ख़ौफ़नाक़ सिलसिले की शुरुआत जनवरी के पहले सप्ताह से हुई। वन विभाग के आंकड़ों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक़, यह हाथी मुख्य रूप से रात के अंधेरे में हमला करता है। ताज़ा घटनाओं में, शुक्रवार की सुबह मझगांव थाना क्षेत्र के बेनीसागर और आसपास के इलाक़ों में हाथी ने एक नाबालिग बच्चे सहित दो और लोगों को मौत के घाट उतार दिया।

इससे पहले, नोआमुंडी और हाटगमारिया प्रखंडों में इस हाथी ने एक ही रात में कई लोगों को अपना निशाना बनाया था, जिसमें एक ही परिवार के चार सदस्य भी शामिल थे।

प्रशासन की कार्रवाई और 'वंतारा' की टीम का आगमन

हालात की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकार और वन विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया है। हाथी को क़ाबू में करने के लिए केवल स्थानीय टीम ही नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है:

विशेषज्ञ टीमें: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा, ओडिशा वाइल्ड लाइफ और जमशेदपुर के दलमा से ट्रैकर बुलाए गए हैं।

वंतारा (Vantara) की मदद: गुजरात से रिलायंस के 'वंतारा' प्रोजेक्ट और 'Wildlife SOS' के विशेषज्ञ भी चाईबासा पहुंच चुके हैं।

तकनीक का इस्तेमाल: घने जंगलों और झाड़ियों में छिपे हाथी की लोकेशन का पता लगाने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है।

क्यों आक्रामक हुआ हाथी?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह हाथी 'मद' (Musth) की अवस्था में है, जिसमें हाथियों में हार्मोनल बदलाव के कारण वे अत्यधिक हिंसक और आक्रामक हो जाते हैं। इसके अलावा, झुंड से बिछड़ जाने के कारण भी वह भटक गया है और इंसानी बस्तियों को निशाना बना रहा है।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश और डर

लगातार हो रही मौतों से ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी गुस्सा है। लोगों का आरोप है कि विभाग हाथी को ट्रैक करने में विफ़ल रहा है। कई गांवों में ग्रामीणों ने मशालें लेकर रात भर पहरा देना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे:

अकेले जंगल की ओर न जाएं।

कच्चे मकानों के बजाय सुरक्षित पक्के भवनों में शरण लें।

हाथी के दिखने पर उसे छेड़ने या पत्थर मारने की गलती न करें।

क्या है वर्तमान स्थिति?

फिलहाल, वन विभाग हाथी को ट्रैंकुलाइज (बेहोश) कर उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की योजना बना रहा है। लेकिन घने कोहरे और इलाके की कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण ऑपरेशन में बाधा आ रही है। झारखंड-ओडिशा सीमा पर स्थित कई रास्तों को एहतियातन बंद कर दिया गया है।