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मकर संक्रांति 2026: कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच मनाया जा रहा है आस्था का महापर्व

Edited By: Mohd Juber Khan | Updated at: January 14th 2026 01:24 PM
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मकर संक्रांति 2026: कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच मनाया जा रहा है आस्था का महापर्व

मकर संक्रांति 2026: कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच मनाया जा रहा है आस्था का महापर्व

GTC News: भारत में आज मकर संक्रांति का त्योहार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही आज से 'उत्तरायण' की शुरुआत हो गई है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक़, आज से ही देवताओं का दिन शुरू होता है और शुभ कार्यों पर लगी पाबंदी (खरमास) ख़त्म हो जाती है।

कड़ाके की ठंड और कोहरे का साया

इस वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर उत्तर भारत के बड़े हिस्से में कड़ाके की ठंड और घना कोहरा बना हुआ है। दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार में विज़िबिलिटी (दृश्यता) काफ़ी कम दर्ज की गई। राजधानी दिल्ली में न्यूनतम तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा। हालांकि, हाड़ कंपाने वाली इस ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। सुबह से ही प्रयागराज, वाराणसी और हरिद्वार जैसे पावन तटों पर लोगों ने गंगा स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया।

कृषि और ग्रामीण जीवन का उत्सव

मकर संक्रांति केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारत की कृषि संस्कृति का प्रतीक भी है। यह किसानों के लिए नई फसलों के आगमन और समृद्धि का उत्सव है।

फसल कटाई का समय: ग्रामीण इलाकों में किसान नई फ़सल की कटाई के बाद ईश्वर का आभार व्यक्त करते हैं।

परंपरागत पकवान: आज के दिन तिल-गुड़ के लड्डू, गजक और खिचड़ी का विशेष महत्व है। आयुर्वेद के अनुसार भी सर्दियों में तिल और गुड़ का सेवन शरीर को गर्मी प्रदान करता है।

सांस्कृतिक विविधता: देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे विभिन्न नामों से मनाया जा रहा है। दक्षिण भारत में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, असम में माघ बिहू और पंजाब में लोहड़ी (जो कल मनाई गई) के रूप में इसकी धूम है।

दान और पुण्य का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज का दिन दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आज के दिन 'पुण्य काल' और 'महा पुण्य काल' का विशेष समय होता है।

कार्यक्रम                                               समय (अनुमानित)

सूर्य का मकर प्रवेश                           दोपहर 03:13 बजे

पुण्य काल                                            दोपहर 03:13 से शाम 05:45 तक

महा पुण्य काल                                   दोपहर 03:13 से शाम 04:58 तक

सामाजिक समरसता का संदेश

मकर संक्रांति का यह पर्व आपसी भाईचारे और रिश्तों में मिठास घोलने का संदेश देता है। लोग "तिल-गुड़ घ्या, गोड-गोड बोला" (तिल-गुड़ लो और मीठा बोलो) के संदेश के साथ एक-दूसरे को मिठाइयां बांट रहे हैं। पतंगबाज़ी के शौकीनों ने भी कोहरे के छंटने का इंतज़ार किया, ताकि आसमान को रंग-बिरंगी पतंगों से सजा सकें।प्रशासन ने ठंड को देखते हुए प्रमुख स्नान घाटों और सार्वजनिक स्थानों पर अलाव और आश्रय के ख़ास इंतज़ाम किए गए हैं।

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