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मुंबई: मुंबई महानगरपालिका, जिसे बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के नाम से जाना जाता है, न केवल भारत की बल्कि एशिया की सबसे अमीर नगर पालिका है। मुंबई की धड़कन कही जाने वाली इस संस्था की अहमियत इस बात से समझा जा सकता है कि इसका वार्षिक बजट भारत के कई छोटे राज्यों के कुल बजट से भी ज़्यादा होता है। आज, 15 जनवरी 2026 को मुंबई की जनता अगले पांच वर्षों के लिए बीएमसी के नए संरक्षकों को चुनने के लिए मतदान कर रही है।
#WATCH ठाणे, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, "लोगों में काफी उत्साह है। काफी लोग मतदान करने आए हैं...सभी को अपने शहर के विकास के लिए मतदान करना चाहिए...मुंबई में भी लोग बदलाव चाहते हैं, विकास चाहते हैं...हम विकास के एजेंडे पर ही चुनाव लड़ रहे हैं..." https://t.co/6tZrASZndx pic.twitter.com/Pmkiostv1B
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 15, 2026
आइए जानते हैं बीएमसी की पूरी कार्यप्रणाली, इसके बजट और राजनीतिक इतिहास के बारे में।
बीएमसी क्या है और क्या है इसकी अहमियत?
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की स्थापना 1888 के बॉम्बे नगर निगम अधिनियम के तहत की गई थी। यह मुंबई शहर और उसके उपनगरों के नागरिक प्रशासन और बुनियादी ढांचे के प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार है। इसे "एशिया का सबसे अमीर नगर निकाय" कहा जाता है क्योंकि यह मुंबई जैसे वैश्विक वित्तीय केंद्र की व्यवस्था संभालती है।
बीएमसी की मुख्य ज़िम्मेदारियां
मुंबई के एक नागरिक के जन्म से लेकर मृत्यु तक, बीएमसी की भूमिका हर क़दम पर होती है। इसकी प्रमुख ज़िम्मेदारियां निम्नलिखित हैं:
स्वास्थ्य सेवाएं: बीएमसी शहर के प्रमुख अस्पतालों (जैसे केईएम, नायर, सायन) और सैकड़ों औषधालयों का संचालन करती है।
शिक्षा: यह मुंबई में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों का एक विशाल नेटवर्क चलाती है।
बुनियादी ढांचा: सड़कों, पुलों, फ्लाईओवर और तटीय सड़क (Coastal Road) जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स का निर्माण और रख-रखाव।
जलापूर्ति और स्वच्छता: एशिया की सबसे बड़ी जलापूर्ति प्रणालियों में से एक का प्रबंधन और कचरा निस्तारण।
शहरी नियोजन: बिल्डिंग निर्माण की अनुमति (OC/BCC) और शहर के विकास का मास्टर प्लान तैयार करना।
बीएमसी का बजट और फंड्स: कहां से आता है पैसा?
बीएमसी का वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट ₹74,427 करोड़ का रिकॉर्ड स्तर छू चुका है। यह बजट मिज़ोरम, सिक्किम और गोवा जैसे राज्यों के बजट से भी कहीं ज़्यादा है।
आय के स्रोत: * संपत्ति कर (Property Tax): यह कमाई का सबसे बड़ा ज़रिया है।
चुंगी के बदले मुआवज़ा: GST लागू होने के बाद, केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाला मुआवज़ा।
विकास शुल्क: बिल्डरों और डेवलपर्स से मिलने वाला प्रीमियम और FSI शुल्क।
निवेश पर ब्याज: बीएमसी के पास बैंकों में करोड़ों रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) हैं, जिनसे भारी ब्याज मिलता है।
खर्च: बजट का लगभग 58% हिस्सा पूंजीगत व्यय (सड़कें, पुल, स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा) पर खर्च होता है।
चुनाव प्रक्रिया और संरचना
बीएमसी में कुल 227 वार्ड हैं। हर वार्ड से एक नगरसेवक (Corporator) चुना जाता है।
चुनाव: हर 5 साल में प्रत्यक्ष मतदान के ज़रिए होता है।
प्रमुख: चुने हुए नगरसेवक अपने बीच से एक 'महापौर' (Mayor) चुनते हैं, जो शहर का प्रथम नागरिक होता है। हालांकि, प्रशासनिक प्रमुख नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) होता है, जो एक वरिष्ठ IAS अधिकारी होता है।
2026 का चुनाव: मार्च 2022 में कार्यकाल ख़त्म होने के बाद से बीएमसी 'प्रशासक' के अधीन थी। आज (15 जनवरी 2026) को क़रीब 1.03 करोड़ मतदाता 1700 उम्मीदवारों की क़िस्मत का फै़सला कर रहे हैं।
#WATCH मुंबई: महाराष्ट्र नगर निगन चुनाव 2026 पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, "बहुत जगहों से शिकायतें आ रही हैं। कुछ लोगों का नाम गायब है। कुछ लोगों को कहां मतदान करना है ये पता ही नहीं है। पहली बार अनुभव हो रहा है कि जो स्याही लगाई जा रही है उसे भी साफ कर… pic.twitter.com/CB6JnxeLd9
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पिछला चुनावी इतिहास और नतीजे
बीते कुछ वर्षों में बीएमसी की सत्ता पर शिवसेना (अविभाजित) का दबदबा रहा है। 2017 के चुनाव के नतीजे बेहद दिलचस्प थे: | पार्टी | सीटें (2017) | | :--- | :--- | | शिवसेना | 84 | | भाजपा | 82 | | कांग्रेस | 31 | | राकांपा (NCP) | 09 | | अन्य/निर्दलीय | 21 |
#WATCH नागपुर: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नगर निगम चुनाव में मतदान करने के बाद कहा, "नगर निगम का चुनाव हो रहा है। यह हमारे लोकतंत्र की एक ऐसी इकाई है, जिसे हम लोकतंत्र की मूलगामी आधारशीला कह सकते हैं इसलिए इसमें मतदान करना महत्वपूर्ण है...मेरी सभी से प्रार्थना… pic.twitter.com/ne5kC4oCLM
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 15, 2026
गौरतलब है कि 2017 में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, लेकिन शिवसेना ने कांग्रेस और अन्य के समर्थन से अपना मेयर बनाया था। इस बार (2026) के चुनाव में समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं, क्योंकि शिवसेना और एनसीपी दो-दो गुटों में बंट चुकी हैं, जिससे मुक़ाबला अब 'महायुति' बनाम 'महाविकास अघाड़ी' के बीच बेहद कड़ा है।