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'मदर ऑफ ऑल डील्स': भारत-ईयू व्यापार समझौते का नया अध्याय

By: GTC News Desk | Edited By: Mohd Juber Khan | Updated at: January 21st 2026 01:23 PM
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'मदर ऑफ ऑल डील्स': भारत-ईयू व्यापार समझौते का नया अध्याय

'मदर ऑफ ऑल डील्स': भारत-ईयू व्यापार समझौते का नया अध्याय

नई दिल्ली/दावोस: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने जा रहे मुक्त व्यापार समझौता (FTA) न केवल व्यापारिक दृष्टि से, बल्कि रणनीतिक रूप से भी आधुनिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में से एक माना जा रहा है। 20 जनवरी, 2026 को दावोस में 'विश्व आर्थिक मंच' (WEF) को संबोधित करते हुए यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए। इस बात को कहना शायद ग़लत नहीं होगा कि भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में एक स्वर्णिम तारीख़ बनने जा रही है। क़रीब 18-20 साल के उतार-चढ़ाव और लंबी वार्ताओं के बाद, दोनों पक्ष आख़िरकार एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लगाने के लिए तैयार हैं।

क्यों कहा जा रहा है इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स'?

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूरोपीय संघ के नेतृत्व ने इस सौदे को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' की संज्ञा दी है। इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

विशाल बाज़ार: यह समझौता दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक बाज़ारों को जोड़ेगा। उर्सुला वॉन डेर लेयेन के मुताबिक़, यह 2 अरब लोगों का बाज़ार तैयार करेगा।

ग्लोबल जीडीपी पर असर: भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 25% (एक चौथाई) हिस्सा कवर करते हैं।

रणनीतिक संतुलन: बदलते वैश्विक परिवेश और अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ (Trump Tariffs) के बीच, यह समझौता भारत और यूरोप दोनों के लिए चीन पर निर्भरता कम करने का एक 'प्रैग्मैटिक' (व्यावहारिक) समाधान है।

77वें गणतंत्र दिवस पर ख़ास मेहमान

भारत ने इस समझौते की गंभीरता को देखते हुए अपने 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2026) के अवसर पर ईयू के दो शीर्ष नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है:

उर्सुला वॉन डेर लेयेन (अध्यक्ष, यूरोपीय आयोग)

एंटोनियो कोस्टा (अध्यक्ष, यूरोपीय परिषद)

यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व को एक साथ इस सम्मान के लिए आमंत्रित किया गया है। परेड के दौरान यूरोपीय नौसेना का एक दस्ता भी पहली बार कर्तव्य पथ पर मार्च करता हुआ दिखाई देगा, जो दोनों के बीच गहरे सुरक्षा और रक्षा संबंधों का प्रतीक होगा।

समझौते के मुख्य बिंदु और लाभ:

भारत को फायदा : 

कपड़ा, जूते, चमड़ा, और फार्मास्यूटिकल्स पर टैरिफ़ कम होने से निर्यात बढ़ेगा।     

भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए यूरोप में काम करना और वीज़ा पाना आसान होगा।

यूरोप से भारत में भारी निवेश (FDI) आएगा, जिससे 'मेक इन इंडिया' को मज़बूती मिलेगी।

ईयू को फ़ायदा:

मशीनरी, ऑटोमोबाइल, और वाइन-स्पिरिट के लिए भारत का बड़ा बाज़ार खुलेगा।

भारत के डिजिटल और वित्तीय सेवा क्षेत्र में यूरोपीय कंपनियों की पहुंच आसान होगी।

भारतीय बाज़ार में निवेश के लिए एक स्थिर और पारदर्शी क़ानूनी ढांचा मिलेगा।

चुनौतियां और समाधान

हालांकि, वार्ता अभी भी कुछ संवेदनशील मुद्दों पर चल रही है:

कार्बन टैक्स (CBAM): यूरोपीय संघ द्वारा लगाए जाने वाले कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म पर भारत को कुछ चिंताएं हैं, जिस पर चर्चा जारी है।

डेयरी और कृषि: भारत ने अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी और संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस समझौते से फिलहाल बाहर रखा है।

आगे का रास्ता

27 जनवरी को दिल्ली में होने वाले 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान वार्ता संपन्न होने की औपचारिक घोषणा की जाएगी। इसके बाद, क़ानूनी प्रक्रियाओं और यूरोपीय संसद की मंज़ूरी के बाद इसे पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। यह समझौता न केवल भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बनाने में मदद करेगा, बल्कि इसे एक 'आर्थिक महाशक्ति' के रूप में भी स्थापित करेगा।

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