Wednesday, 4th of February 2026

निपाह वायरस का मुक़ाबला करने के लिए तैयार है भारत, 'निपाह-बी' वैक्सीन का फेज़-2 ट्रायल बनी उम्मीद!

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  February 03rd 2026 03:44 PM  |  Updated: February 03rd 2026 03:44 PM
निपाह वायरस का मुक़ाबला करने के लिए तैयार है भारत, 'निपाह-बी' वैक्सीन का फेज़-2 ट्रायल बनी उम्मीद!

निपाह वायरस का मुक़ाबला करने के लिए तैयार है भारत, 'निपाह-बी' वैक्सीन का फेज़-2 ट्रायल बनी उम्मीद!

नई दिल्ली/ऑक्सफोर्ड: दुनिया के सबसे घातक वायरसों में से एक, निपाह (NiV) के खिलाफ वैश्विक लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। दरअसल ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित 'निपाह-बी' (ChAdOx1 NipahB) वैक्सीन के दूसरे चरण (Phase 2) के क्लिनिकल परीक्षण में प्रवेश का रास्ता साफ़ हो चुका है।

क्या है 'निपाह-बी' वैक्सीन?

यह वैक्सीन उसी ChAdOx1 प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसका उपयोग एस्ट्राज़ेनेका (भारत में कोविशील्ड) की कोविड-19 वैक्सीन बनाने के लिए किया गया था। इसे निपाह वायरस के 'ग्लाइकोप्रोटीन' को टारगेट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे ऑक्सफोर्ड के 'पैंडेमिक साइंसेज इंस्टीट्यूट' (PSI) के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। इस परियोजना को 'कोलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपयर्डनेस इनोवेशन' (CEPI) द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है और भारत का सीरम इंस्टीट्यूट (SII) इसके निर्माण और विकास में मुख्य भागीदार है।

2026 में फेज़-2 ट्रायल क्यों है ख़ास?

दिसंबर 2025 में फेज-2 के आधिकारिक लॉन्च के बाद, 2026 इस वैक्सीन के लिए सबसे महत्वपूर्ण साल होगा। यह परीक्षण बांग्लादेश और भारत जैसे उन क्षेत्रों में आयोजित किया जा रहा है जहां निपाह का प्रकोप बार-बार होता है। इस चरण में शोधकर्ता यह जांचेंगे कि क्या वैक्सीन वास्तविक प्रभावित आबादी में सुरक्षित है और क्या यह वायरस के ख़िलाफ़ पर्याप्त प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करती है। परीक्षण में 18 से 55 वर्ष की आयु के सैकड़ों स्वस्थ स्वयंसेवकों को शामिल किया जा रहा है।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के मुख्य अन्वेषक प्रोफ़ेसर ब्रायन एंगस के मुताबिक़, "प्रभावित क्षेत्रों में फेज-2 परीक्षण शुरू करना यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कि यह वैक्सीन न केवल प्रभावी हो, बल्कि उन लोगों के लिए सुलभ भी हो जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।" 

भारत के लिए यह वैक्सीन क्यों ज़रूरी है?

भारत में निपाह वायरस का मृत्यु दर 40% से 75% के बीच रहा है, जो इसे कोरोना से कहीं अधिक जानलेवा बनाता है। जनवरी 2026 में पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य कर्मियों में निपाह के नए मामले दर्ज किए गए। वर्तमान में निपाह के लिए कोई तयशुदा दवा या टीका मौजूद नहीं है। उपचार केवल लक्षणों को कम करने तक सीमित है। यह चमगादड़ों से इंसानों में और फिर इंसान से इंसान में तेज़ी से फै़लता है, जिससे इसके महामारी बनने का ख़तरा हमेशा बना रहता है।

वैक्सीन के अब तक के नतीजे

फेज-1 (सुरक्षा): शुरुआती मानव परीक्षणों (Phase 1) में यह वैक्सीन सुरक्षित पाई गई है। 'द लैंसेट' में प्रकाशित आंकड़ों के बक़ौल, इसके साइड इफेक्ट्स बहुत मामूली (जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द) थे। बंदरों पर किए गए परीक्षणों में, इस वैक्सीन ने वायरस के घातक हमले के ख़िलाफ़ शत-प्रतिशत सुरक्षा प्रदान की थी। अगर 2026 के फेज़-2 परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह वैक्सीन निपाह के ख़िलाफ़ लाइसेंस प्राप्त करने वाली पहली वैश्विक वैक्सीन बनने की दौड़ में सबसे आगे होगी। यह न केवल भारत के केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लिए सुरक्षा कवच बनेगी, बल्कि भविष्य की संभावित महामारियों को रोकने में भी मील का पत्थर साबित होगी।

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