Friday, 17th of July 2026

मायावती का 70वां जन्मदिन: 'ब्राह्मण कार्ड' और सर्वजन हिताय का नया शंखनाद

Edited By: Mohd Juber Khan | Updated at: January 15th 2026 02:47 PM
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मायावती का 70वां जन्मदिन: 'ब्राह्मण कार्ड' और सर्वजन हिताय का नया शंखनाद

मायावती का 70वां जन्मदिन: 'ब्राह्मण कार्ड' और सर्वजन हिताय का नया शंखनाद

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 15 जनवरी 2026 को अपना 70वां जन्मदिन धूमधाम से मनाया। लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम को बसपा ने पारंपरिक रूप से 'जनकल्याणकारी दिवस' के रूप में मनाया। इस अवसर पर मायावती ने आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए विशेष रूप से ब्राह्मण समाज और क्षत्रियों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बड़ा दांव चला है। कहा जा सकता है कि बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन के मौक़े पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर 'सोशल इंजीनियरिंग' के फॉर्मूले को हवा दे दी है। अपने संबोधन में उन्होंने न केवल अपनी पिछली सरकारों की उपलब्धियां गिनाईं, बल्कि बीजेपी, सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए ब्राह्मण समाज को बसपा के पाले में लाने की पुरज़ोर कोशिश की।

ब्राह्मण समाज की 'उपेक्षा' पर चिंता

मायावती ने दिसंबर 2025 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का ज़िक्र करते हुए कहा कि वहां सभी दलों के ब्राह्मण विधायकों ने अपनी उपेक्षा और समाज के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा:

"ब्राह्मण समाज आज ख़ुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सत्ता में बैठे लोग उनका इस्तेमाल केवल वोट के लिए करते हैं, लेकिन बसपा ने हमेशा इस समाज को सत्ता में उचित भागीदारी और सम्मान दिया है।"

"नहीं चाहिए किसी का बाटी-चोखा"

सपा और अन्य दलों की तरफ़ इशारा करते हुए मायावती ने कड़े शब्दों में कहा कि ब्राह्मण समाज स्वाभिमानी है और उसे किसी का 'बाटी-चोखा' (राजनीतिक प्रलोभन) नहीं चाहिए। उन्होंने वादा किया कि अगर 2027 के चुनाव में बसपा की सरकार बनती है, तो ब्राह्मणों की सभी आकांक्षाएं पूरी की जाएंगी और उन्हें शासन-प्रशासन में वह स्थान मिलेगा जिसके वे हक़दार हैं।

क्षत्रिय और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का भरोसा

मायावती ने केवल ब्राह्मणों ही नहीं, बल्कि क्षत्रिय समाज और अन्य समुदायों की सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने अपनी पूर्ववर्ती सरकारों का उदाहरण देते हुए कहा:

क़ानून का राज: बसपा शासन में किसी भी धर्म के धार्मिक स्थलों (मंदिर, मस्जिद, चर्च) को कोई नुकसान नहीं पहुंचने दिया गया।

सुरक्षा का माहौल: उन्होंने दावा किया कि बसपा के समय अपराधी जेल में थे और हर समाज की बेटियां और व्यापारी सुरक्षित महसूस करते थे।

विरोधियों पर तीखा प्रहार

मायावती ने कांग्रेस और बीजेपी को एक ही सिक्के के दो पहलू बताते हुए आरोप लगाया कि ये दल बसपा को कमज़ोर करने के लिए समय-समय पर साजिशें रचते रहते हैं। उन्होंने दलितों, पिछड़ों और सवर्णों से अपील की कि वे इन पार्टियों के 'बहकावे' में न आएं।

जनकल्याणकारी दिवस के रूप में उत्सव

देशभर में बसपा कार्यकर्ताओं ने मायावती के जन्मदिन को 'जनकल्याणकारी दिवस' के रूप में मनाया। इस दौरान अस्पतालों में फ़ल वितरण, ग़रीबों को कंबल और आर्थिक सहायता प्रदान की गई। मायावती ने कहा कि जनता के दिल में बसपा की नीतियों के प्रति जो जगह है, वही उनकी असली ताक़त है।

बसपा की 2027 की तैयारी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह रुख साफ करता है कि वे 2007 के उस 'दलित-ब्राह्मण' गठजोड़ को दोबारा जीवित करना चाहती हैं जिसने उन्हें पूर्ण बहुमत की सरकार दिलाई थी। 70वें जन्मदिन पर उनका यह संबोधन आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बसपा के अभियान का अनौपचारिक आगाज़ माना जा रहा है।

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