Sunday, 11th of January 2026

ग़ाज़ियाबाद की हवा सबसे ज़हरीली: AQI 404 के साथ 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा दिल्ली-एनसीआर

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  December 31st 2025 03:38 PM  |  Updated: December 31st 2025 03:38 PM
ग़ाज़ियाबाद की हवा सबसे ज़हरीली: AQI 404 के साथ 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा दिल्ली-एनसीआर

ग़ाज़ियाबाद की हवा सबसे ज़हरीली: AQI 404 के साथ 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा दिल्ली-एनसीआर

नई दिल्ली/गाजियाबाद: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा 30 दिसंबर 2025 को जारी बुलेटिन के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश का ग़ाज़ियाबाद शहर देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 404 दर्ज किया गया, जो 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले ग़ाज़ियाबाद का AQI 393 था, जिसमें 11 अंकों की और बढ़ोतरी दर्ज की गई।

प्रमुख बिंदु: प्रदूषण की भयावह स्थिति

ग़ाज़ियाबाद का हाल: शहर के वसुंधरा इलाक़े में स्थिति और भी ख़राब रही, जहां स्थानीय स्तर पर AQI 450 के आंकड़े को पार कर गया।

दिल्ली में 'बेहद ख़राब' हवा: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी औसत AQI 388 दर्ज किया गया। शहर के आनंद विहार, रोहिणी और वजीरपुर जैसे हॉटस्पॉट्स में AQI 400 के पार रहा।

देशव्यापी विश्लेषण: 236 शहरों के विश्लेषण से पता चला है कि भारत के केवल 1.7% शहरों में ही हवा 'साफ़' (Good) है।

          वायु गुणवत्ता का तुलनात्मक डेटा (30 दिसंबर, 2025)

शहर                                           AQI स्तर                                  वायु श्रेणी

गाजियाबाद                                 404                                          गंभीर (Severe)

नोएडा                                         400                                           बेहद ख़राब (Very Poor)

दिल्ली                                         388                                           बेहद ख़राब (Very Poor)

ग्रेटर नोएडा                              366                                            बेहद ख़राब (Very Poor)

शिलांग                                       20                                              साफ़ (Good)

प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण:

प्रतिकूल मौसम: हवा की गति बेहद कम होने और घने कोहरे (Dense Fog) के कारण प्रदूषक तत्व (Pollutants) वातावरण की निचली सतह पर फंस गए हैं।

स्थानीय उत्सर्जन: निर्माण गतिविधियों, वाहनों से निकलने वाले धुएं और कचरा जलाने जैसी घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

मिक्सिंग डेप्थ में कमी: सर्दियों में सूरज की रोशनी कम होने से प्रदूषकों के फैलने के लिए कम जगह बचती है, जिससे हवा अधिक ज़हरीली हो जाती है।

स्वास्थ्य चेतावनी और प्रशासन की तैयारी

जानकारों के बक़ौल, 400 से ऊपर का AQI स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकता है और सांस संबंधी बीमारियों वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए धूल विरोधी अभियान और निर्माण कार्यों पर निगरानी तेज़ कर दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 1 जनवरी 2026 तक वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में ही बनी रह सकती है।