लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता कल्याण सिंह (बाबूजी) की 94वीं जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। लखनऊ में आयोजित एक ख़ास कार्यक्रम में सीएम योगी ने कल्याण सिंह के फ़ोटो पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें आधुनिक उत्तर प्रदेश में 'सुशासन और राष्ट्रवाद का अग्रदूत' बताया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह की जयंती के मौक़े पर आयोजित कार्यक्रम में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया। सीएम योगी ने कहा कि बाबूजी का पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए समर्पित था। उन्होंने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया और राम मंदिर आंदोलन के लिए सत्ता का बलिदान देने में जरा भी संकोच नहीं किया।
'पद्म विभूषण' श्रद्धेय कल्याण सिंह 'बाबूजी' की जयंती पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में... https://t.co/EXgCobECXz
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) January 5, 2026
सुशासन के प्रणेता थे कल्याण सिंह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में 1991 के उस दौर को याद किया, जब कल्याण सिंह पहली बार मुख्यमंत्री बने थे।
अराजकता का अंत: सीएम योगी ने कहा, "1991 में जब बाबूजी ने कमान संभाली, तब यूपी अव्यवस्था और गुंडागर्दी से जूझ रहा था। उन्होंने कुछ ही महीनों में अपराधी तत्वों पर नकेल कसी और जनता को अहसास कराया कि सुशासन (Good Governance) क्या होता है।
"नाम की सार्थकता: योगी ने भावुक होते हुए कहा कि बाबूजी ने अपने नाम को उत्तर प्रदेश के 'कल्याण' के साथ जोड़कर जीवनभर सार्थक किया।
राम मंदिर आंदोलन और सत्ता का बलिदान
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के संदर्भ में कल्याण सिंह की भूमिका को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:
ऐतिहासिक निर्णय: "जब राम जन्मभूमि आंदोलन चरम पर था, तब बाबूजी ने राम भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए बिना किसी झिझक के मुख्यमंत्री पद का त्याग कर दिया। उनके लिए 'राम का काम' सत्ता से कहीं बढ़कर था।
राष्ट्रवाद का पाठ: उन्होंने बताया कि एक साधारण किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह ने आरएसएस (RSS) की पाठशाला से राष्ट्रवाद का जो पाठ सीखा, उसे आजीवन अपना मूलमंत्र बनाए रखा।
कल्याण सिंह: एक नज़र में राजनीतिक सफ़र
पद कार्यकाल
मुख्यमंत्री (UP) जून 1991 - दिसंबर 1992
मुख्यमंत्री (UP) सितंबर 1997 - नवंबर 1999
राज्यपाल राजस्थान (2014-2019) और हिमाचल प्रदेश (अतिरिक्त कार्यभार)
सम्मान पद्म विभूषण (मरणोपरांत)
गौरतलब है कि लखनऊ में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, और कल्याण सिंह के पौत्र व राज्य मंत्री संदीप सिंह समेत कई वरिष्ठ मंत्री और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सीएम योगी ने आख़िर में सोशल मीडिया (X) पर भी अपनी पोस्ट में लिखा कि बाबूजी के विचार और उनके द्वारा स्थापित प्रशासनिक मानक आज भी उत्तर प्रदेश सरकार के लिए मार्गदर्शक का काम कर रहे हैं।