Friday, 2nd of October 2026

कर्नाटक में संवैधानिक संकट: राज्यपाल का वॉकआउट और राजभवन बनाम सरकार की नई जंग

Edited By: Mohd Juber Khan | Updated at:
कर्नाटक में संवैधानिक संकट: राज्यपाल का वॉकआउट और राजभवन बनाम सरकार की नई जंग

कर्नाटक में संवैधानिक संकट: राज्यपाल का वॉकआउट और राजभवन बनाम सरकार की नई जंग

बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा के संयुक्त सत्र की शुरुआत आज अभूतपूर्व हंगामे के साथ हुई। परंपरा के मुताबिक़, साल के पहले सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होनी थी, लेकिन राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण के मसौदे पर आपत्ति जताते हुए उसे पूरा पढ़ने से इनकार कर दिया।

क्या हुआ सदन के भीतर?

जैसे ही सुबह 11 बजे सत्र शुरू हुआ, राज्यपाल सदन में पहुंचे। उन्होंने अपने अभिभाषण की शुरुआती दो पंक्तियां—"मेरी सरकार राज्य के आर्थिक, सामाजिक और भौतिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। जय हिंद, जय कर्नाटक"—पढ़ीं और पोडियम छोड़कर बाहर निकलने लगे।

बी.के. हरिप्रसाद का हस्तक्षेप: कांग्रेस एमएलसी बी.के. हरिप्रसाद को राज्यपाल के पास जाते और उन्हें रोकने की कोशिश करते देखा गया। वे राज्यपाल से अपना संवैधानिक दायित्व पूरा करने का आग्रह कर रहे थे, लेकिन राज्यपाल मार्शलों की सुरक्षा में सदन से बाहर निकल गए।

सत्ता पक्ष की नारेबाज़ी: कांग्रेस विधायकों ने 'शर्म करो-शर्म करो' (Shame-Shame) के नारे लगाए और राज्यपाल के इस क़दम को अलोकतांत्रिक बताया।

विवाद की मुख्य वजह: 11 'विवादास्पद' पैराग्राफ़

सूत्रों के मुताबिक़, राज्यपाल ने सरकार द्वारा तैयार भाषण के 11 पैराग्राफों पर गंभीर आपत्ति जताई थी। इन पैराग्राफों में:

केंद्र सरकार की राजकोषीय नीतियों की तीखी आलोचना की गई थी।

मनरेगा (MGNREGA) को ख़त्म करने के केंद्र के कथित प्रयासों का ज़िक्र था।

राज्य सरकार के नए 'G RAM G' बिल (ग्रामीण रोज़गार गारंटी से जुड़ा) की प्रशंसा और केंद्र के नए क़ानूनों की निंदा शामिल थी।

राज्यपाल का तर्क था कि वे 'सरकारी प्रोपेगेंडा' या केंद्र की आलोचना वाले राजनीतिक बयानों को पढ़ने के लिए बाध्य नहीं हैं।

पक्ष-विपक्ष की प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस (सत्ता पक्ष): "संविधान का अपमान"

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल के कदम को असंवैधानिक क़रार दिया।

सिद्धारमैया: "कैबिनेट द्वारा अनुमोदित भाषण पढ़ना राज्यपाल का कर्तव्य है। वे केंद्र सरकार के 'कठपुतली' या 'एजेंट' की तरह व्यवहार कर रहे हैं। हम इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रहे हैं।"

बी.के. हरिप्रसाद: उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने राज्य की जनता का अपमान किया है और वे राजभवन को भाजपा कार्यालय की तरह चला रहे हैं।

भाजपा (विपक्ष): "लोकतंत्र की रक्षा"

भाजपा ने राज्यपाल के फैसले का समर्थन किया है और कांग्रेस सरकार पर राज्यपाल को अपमानित करने का आरोप लगाया है।

भाजपा नेताओं का तर्क: भाजपा का कहना है कि कांग्रेस सरकार राज्यपाल के कंधे पर बंदूक रखकर केंद्र के ख़िलाफ़ राजनीति करना चाहती थी। राज्यपाल ने केवल उन हिस्सों को पढ़ने से मना किया जो असत्य और भ्रामक थे।

विपक्ष के नेता: "सदन में राज्यपाल को रोकने की कोशिश करना और उनके साथ दुर्व्यवहार करना निंदनीय है। कांग्रेस राज्य में संवैधानिक मशीनरी को विफ़ल कर रही है।"

अगला क़दम और क़ानूनी स्थिति

यह घटना तमिलनाडु और केरल के बाद अब कर्नाटक में भी 'राजभवन बनाम निर्वाचित सरकार' के टकराव को चरम पर ले आई है।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका: कांग्रेस सरकार इस मामले को न्यायपालिका के सामने ले जा सकती है, जैसा कि पहले अन्य राज्यों ने किया है।

संसदीय कार्यवाही: अब सवाल यह है कि क्या राज्यपाल के बिना पढ़े भाषण को 'पढ़ा हुआ' माना जाएगा या नहीं, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) को फै़सला लेना होगा।