Wednesday, 25th of February 2026

1984 सिख दंगा: सबूतों के अभाव में सज्जन कुमार जनकपुरी-विकासपुरी मामले में बरी

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  January 22nd 2026 02:40 PM  |  Updated: January 22nd 2026 02:40 PM
1984 सिख दंगा: सबूतों के अभाव में सज्जन कुमार जनकपुरी-विकासपुरी मामले में बरी

1984 सिख दंगा: सबूतों के अभाव में सज्जन कुमार जनकपुरी-विकासपुरी मामले में बरी

नई दिल्ली: दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान जनकपुरी और विकासपुरी में हुई हिंसा के मामले में पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) सज्जन कुमार के ख़िलाफ़ लगे आरोपों को 'संदेह से परे' साबित करने में विफ़ल रहा है।

अदालत का फै़सला और मुख्य टिप्पणियां

विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने मौखिक आदेश सुनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत सज्जन कुमार को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट की मुख्य बातें निम्नलिखित रहीं:

पहचान की कमी: अदालत ने पाया कि घटना के समय भीड़ में सज्जन कुमार की मौजूदगी की पुष्टि करने वाले गवाह विश्वसनीय नहीं थे।

संदेह का लाभ: कोर्ट ने कहा कि आपराधिक क़ानून के सिद्धांत के मुताबिक़, यदि अभियोजन पक्ष अपना मामला पूरी तरह साबित नहीं कर पाता, तो इसका लाभ आरोपी को मिलना चाहिए।

हत्या के आरोप से पहले ही राहत: बता दें कि अगस्त 2023 में ही कोर्ट ने सज्जन कुमार पर दंगा करने और दुश्मनी फैलाने के आरोप तो तय किए थे, लेकिन उन्हें हत्या और आपराधिक साज़िश के गंभीर आरोपों से डिस्चार्ज (बरी) कर दिया था।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के दंगों से जुड़ा है:

जनकपुरी घटना (1 नवंबर 1984): इस इलाके में हुई हिंसा में दो सिखों—सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह—की हत्या कर दी गई थी।

विकासपुरी घटना (2 नवंबर 1984): यहां गुरचरण सिंह नामक व्यक्ति को भीड़ द्वारा कथित तौर पर ज़िंदा जला दिया गया था।

इन मामलों की जांच के लिए एसआईटी (SIT) ने 2015 में दोबारा एफ़आईआर दर्ज की थी, जिसमें सज्जन कुमार को भीड़ को उकसाने और साज़िश रचने का आरोपी बनाया गया था।

सज्जन कुमार की दलील

सज्जन कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होते हुए खुद को निर्दोष बताया। उनके वकीलों ने तर्क दिया कि दंगों के 30 साल बाद उनका नाम राजनीतिक साजिश के तहत घसीटा गया है और उनके ख़िलाफ़ कोई प्रत्यक्ष सबूत मौजूद नहीं है।

वर्तमान स्थिति

भले ही सज्जन कुमार को इस विशेष मामले में राहत मिल गई है, लेकिन वे जेल में ही रहेंगे। वे पालम कॉलोनी (राज नगर) के एक अन्य दंगा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। इसके अलावा, फरवरी 2025 में भी उन्हें सरस्वती विहार मामले में उम्रकै़द की सज़ा सुनाई गई थी।

निष्कर्ष

अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवारों में निराशा देखी गई है। अभियोजन पक्ष अब इस फैसले को ऊपरी अदालत (दिल्ली हाई कोर्ट) में चुनौती देने पर विचार कर सकता है।

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