ट्रंप के आदेश पर 15 हज़ार अमेरिकी सैनिक तैनात, मुश्किल में आए वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो
वाशिंगटन/काराकस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर कैरिबियाई सागर में 15,000 से ज़्यादा सैनिकों और दर्जनों युद्धपोतों की भारी-भरकम तैनाती ने एक बड़े भू-राजनीतिक टकराव की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। यह सैन्य जमावड़ा क्यूबा मिसाइल संकट (1962) के बाद इस क्षेत्र में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती मानी जा रही है। इस तैनाती का सीधा निशाना दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो हैं।
15,000 सैनिकों की तैनाती का उद्देश्य
पेंटागन द्वारा ‘ऑपरेशन सदर्न स्पीयर’ (Operation Southern Spear) के तहत की गई इस बड़ी सैन्य तैनाती के पीछे आधिकारिक तौर पर दो प्रमुख कारण बताए गए हैं:
नारको-आतंकवाद (Narco-Terrorism) पर नियंत्रण: अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि वेनेज़ुएला की मादुरो सरकार ड्रग्स तस्करी में शामिल है और देश एक ‘नारको-स्टेट’ बन चुका है। इस तैनाती का उद्देश्य कैरिबियाई क्षेत्र में ड्रग कार्टेल को निशाना बनाना और उनके समुद्री मार्गों को बाधित करना है।
मादुरो को सत्ता से हटाना: हालांकि, अमेरिका खुले तौर पर शासन परिवर्तन की बात से बचता रहा है, लेकिन उच्च पदस्थ अधिकारियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सैन्य अभियान का अंतिम लक्ष्य वेनेज़ुएला के निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल कर लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करने का दबाव बनाना है।
इस तैनाती में अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड समेत एक दर्ज़न से ज़्यादा जंगी जहाज़ और 15,000 से ज़्यादा सैनिक शामिल हैं, जो कार्रवाई के आदेश का इंतज़ार कर रहे हैं।
ट्रंप का निशाना: निकोलस मादुरो क्यों?
डोनाल्ड ट्रंप, वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पीछे इसलिए पड़े हैं, क्योंकि अमेरिकी प्रशासन उन्हें एक अवैध शासक, तानाशाह और पश्चिमी गोलार्द्ध के लिए ख़तरा मानता है।
अवैध शासन का आरोप: अमेरिका और लगभग 60 अन्य देश मादुरो के 2018 के चुनाव को अवैध मानते हैं। ट्रंप प्रशासन ने मादुरो को पद छोड़ने की खुली धमकी दी है और विपक्षी नेता जुआन गुएडो को वेनेज़ुएला का वैध नेता घोषित किया हुआ है।
ड्रग्स तस्करी और आतंकवाद: अमेरिका ने मादुरो और उनके कई शीर्ष अधिकारियों पर 'नारको-आतंकवाद' का आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामले चलाए हैं और भारी इनाम घोषित किए हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता का ख़तरा: ट्रंप का मानना है कि मादुरो का शासन वेनेज़ुएला के आर्थिक पतन, मानवाधिकारों के हनन और लाखों शरणार्थियों के पलायन का कारण है, जिससे पूरे लैटिन अमेरिका की क्षेत्रीय स्थिरता को ख़तरा है।
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में साफ़ कहा है कि मादुरो के "दिन गिने-चुने हैं" और उन्होंने वेनेज़ुएला के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले या विशेष बल ऑपरेशनों की संभावना को भी खारिज नहीं किया है।
वेनेज़ुएला की जवाबी तैयारी और वैश्विक प्रतिक्रिया
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिकी कार्रवाई को 'अंतर्राष्ट्रीय डकैती' और 'आपराधिक कृत्य' बताया है।
मादुरो ने देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए नागरिकों से मिलिशिया (मिलिट्री-पुलिस) में शामिल होने का आह्वान किया है।
देश की सेना और सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है, और वेनेज़ुएला ने अपनी सीमाओं पर सैन्य संसाधन बढ़ा दिए हैं।
रूस और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से इस क्षेत्र में संघर्ष से बचने का आग्रह किया है और वेनेज़ुएला को समर्थन देने की बात कही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति बेहद नाज़ुक है, और अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के समुद्री क्षेत्र में तेल टैंकरों को ज़ब्त करने जैसी कार्रवाई ने दोनों देशों के बीच टकराव की आशंका को और भी बढ़ा दिया है।