वॉशिंगटन/ताइपे: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच कूटनीतिक युद्ध तेज़ हो गया है। ट्रंप प्रशासन ने बुधवार (17 दिसंबर, 2025) को ताइवान को अब तक के सबसे बड़े हथियार पैकेजों में से एक बेचने के फै़सले पर मुहर लगा दी है। इस सौदे का मुख्य उद्देश्य चीन के संभावित आक्रमण के खिलाफ ताइवान की 'प्रतिरोधक क्षमता' को मज़बूत करना है।
क्या-क्या शामिल है इस 'मेगा डील' में?
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा घोषित इस 11.1 अरब डॉलर के पैकेज में कई अत्याधुनिक युद्धक उपकरण शामिल हैं, जो युद्ध की स्थिति में गेमचेंजर साबित हो सकते हैं:
BREAKING!!! U.S. approves $11 BILLION in weapons sales to Taiwan as tensions with Beijing mountState Department clears 8 major military sales packages including HIMARS and autonomous drones... pic.twitter.com/XDczXdEqBK
— Alex Raufoglu (@ralakbar) December 18, 2025
HIMARS रॉकेट सिस्टम: सौदे में 82 हाई-मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम शामिल हैं। यह वही घातक सिस्टम है जिसने यूक्रेन युद्ध में रूस की कमर तोड़ दी थी।
लंबी दूरी की मिसाइलें: ताइवान को 420 ATACMS (आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम) मिसाइलें मिलेंगी, जिनकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर तक है। ये मिसाइलें ताइवान के तट से चीन के भीतर स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हैं।
होवित्ज़र तोपें: पैकेज में 60 एम109ए7 (M109A7) सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्ज़र और उससे जुड़े सैन्य उपकरण शामिल हैं।
एंटी-टैंक और एंटी-शिप मिसाइलें: इसमें 1,545 TOW-2B मिसाइलें और 1,050 जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइलें शामिल हैं। साथ ही हार्पून मिसाइलों के लिए रिफर्बिशमेंट किट भी दी जाएगी।
ड्रोन और सॉफ्टवेयर: 1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के ALTIUS-600M और 700M जैसे 'लोइटरिंग म्यूनिशन' (आत्मघाती ड्रोन) और उन्नत मिलिट्री सॉफ्टवेयर भी इस सौदे का हिस्सा हैं।
चीन की तीख़ी प्रतिक्रिया और विरोध
इस एलान के तुरंत बाद बीजिंग ने कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस सौदे को 'वन चाइना पॉलिसी' का उल्लंघन करार दिया। चीन ने चेतावनी दी है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए "जरूरी जवाबी कार्रवाई" करेगा। चीन का मानना है कि अमेरिका ताइवान के अलगाववादी तत्वों को बढ़ावा दे रहा है, जो अंततः क्षेत्र को तबाही की ओर ले जाएगा।
ताइवान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सौदा?
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने इस सैन्य सहायता के लिए अमेरिका का आभार व्यक्त किया है। ताइवान का मानना है कि चीन 2027 तक द्वीप पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में ताइवान ने हाल ही में अपने रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की है। ताइपे का कहना है कि ये हथियार उसे चीन की 'ग्रे ज़ोन' युद्धनीति और संभावित समुद्री घेराबंदी का मुक़ाबला करने में मदद करेंगे।
भू-राजनीतिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम यह संदेश देता है कि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए तैयार है। ट्रंप ने पहले भी संकेत दिए थे कि ताइवान को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका को 'प्रोटेक्शन मनी' की तरह भुगतान करना चाहिए और यह भारी-भरकम सौदा उसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।