Tuesday, 13th of January 2026

ईरान संकट: मुद्रा पतन से उपजी विरोध की आग, 500 से ज़्यादा मौतें और ट्रंप का 'टैरिफ़ वार'

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  January 13th 2026 02:31 PM  |  Updated: January 13th 2026 02:31 PM
ईरान संकट: मुद्रा पतन से उपजी विरोध की आग, 500 से ज़्यादा मौतें और ट्रंप का 'टैरिफ़ वार'

ईरान संकट: मुद्रा पतन से उपजी विरोध की आग, 500 से ज़्यादा मौतें और ट्रंप का 'टैरिफ़ वार'

तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद का सबसे बड़ा जन-आंदोलन देखने को मिल रहा है। जो प्रदर्शन शुरुआती तौर पर गिरती अर्थव्यवस्था के ख़िलाफ़ शुरू हुए थे, वे अब सत्ता परिवर्तन की मांग में बदल गए हैं।

विरोध की शुरुआत: रियाल का ऐतिहासिक पतन

इस अशांति की मुख्य जड़ ईरान की मुद्रा 'रियाल' में आई अप्रत्याशित गिरावट है। 28 दिसंबर को जब अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले रियाल अपने सबसे निचले स्तर (लगभग 14.5 लाख रियाल प्रति डॉलर) पर पहुंच गया, तो तेहरान के व्यापारियों और आम जनता का धैर्य जवाब दे गया।

महंगाई का प्रकोप: ईरान में खाद्य मुद्रास्फीति 70% के पार पहुंच गई है, जिससे आम लोगों के लिए बुनियादी ज़रूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।

व्यापार ठप: मुद्रा के अस्थिर होने से बाज़ारों में व्यापार करना असंभव हो गया, जिसके बाद दुकानदारों ने हड़ताल कर दी।

हिंसा और हताहतों की संख्या

मानवाधिकार संगठनों (जैसे HRANA) के मुताबिक़, पिछले दो हफ़्तों में हुई हिंसा में 500 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

सख़्ती की चेतावनी: ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों को 'दंगाई' क़रार दिया है और कहा है कि सुरक्षा बल उनसे सख़्ती से निपटेंगे।

गिरफ़्तारी: अब तक 10,000 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। सरकार ने सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए देश के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद कर दी है।

ट्रंप का हस्तक्षेप और '25% टैरिफ़' का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट में सीधी भूमिका निभाते हुए ईरान सरकार को कड़ी चेतावनी दी है।

सैन्य कार्रवाई की धमकी: ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान अपने लोगों पर घातक बल का प्रयोग बंद नहीं करता, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है।

वैश्विक टैरिफ़ का दांव: ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका 25% अतिरिक्त टैरिफ़ लगाएगा। इसका सीधा असर भारत, चीन, तुर्की और यूएई जैसे देशों पर पड़ेगा, जो ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं।

तेहरान का रुख: 'बाहरी साज़िश' का आरोप

ईरानी नेतृत्व, विशेष रूप से सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इन प्रदर्शनों को विदेशी साज़िश बताया है।

ईरान का दावा है कि अमेरिका और इजरायल इन दंगों को हवा दे रहे हैं, ताकि राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देने और प्रतिबंध लगाने का बहाना मिल सके।

सरकार का कहना है कि वे स्थिति को क़ाबू में करने में सक्षम हैं और किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

कैसे हैं हाल-फ़िलहाल ईरान के हालात?

ईरान फिलहाल दोहरी मार झेल रहा है—भीतर से जनता का विद्रोह और बाहर से अमेरिका का आर्थिक दबाव। 13 जनवरी, 2026 तक की रिपोर्टों के मुताबिक़, तेहरान के ग्रैंड बाज़ार और प्रमुख विश्वविद्यालयों में अब भी सुरक्षा बलों की भारी तैनाती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान बातचीत का रास्ता अपनाएगा या यह संघर्ष किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ेगा।