GTC News: हर साल 11 दिसंबर को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस हमें न केवल पहाड़ों की भव्यता की याद दिलाता है, बल्कि यह भी बताता है कि वे हमारी पारिस्थितिकी और जीवन के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। पहाड़ों का एक सबसे अनमोल घटक हैं उनके ग्लेशियर—बर्फ की विशाल नदियां, जो दुनिया भर में करोड़ों लोगों के लिए जीवनदायिनी जल के स्रोत हैं। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के कारण इन 'पानी के टावरों' का अस्तित्व अब गंभीर ख़तरे में है, और इनका संरक्षण आज की सबसे बड़ी वैश्विक प्राथमिकताओं में से एक है।
मीठे पानी का सबसे बड़ा भंडार: जीवन का आधार
ग्लेशियरों को अक्सर पृथ्वी के मीठे पानी का बैंक कहा जाता है। दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत मीठे पानी का भंडारण ग्लेशियरों में है। यह जमा हुआ पानी धीरे-धीरे पिघलकर नदियों, झीलों और भूजल को पोषित करता है।
नदी प्रणालियों को पोषण: एशिया की विशाल नदी प्रणालियाँ—गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, यांग्त्ज़ी, और मेकांग—जिन पर लगभग दो अरब लोगों का जीवन निर्भर है, मुख्य रूप से हिमालयी ग्लेशियरों से जल प्राप्त करती हैं।
सिंचाई और कृषि: ये नदियां दुनिया के कई प्रमुख कृषि क्षेत्रों में सिंचाई का आधार हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
जलविद्युत उत्पादन: ग्लेशियर-पोषित नदियां पनबिजली परियोजनाओं के लिए स्थिर जल प्रवाह प्रदान करती हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
पारिस्थितिक तंत्र: पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र और निचले इलाकों के आर्द्रभूमि, जंगल और वन्यजीव भी ग्लेशियरों से मिलने वाले पानी पर निर्भर करते हैं।
जलवायु परिवर्तन की मार: पिघलते ग्लेशियरों का ख़तरनाक संकेत
वैज्ञानिकों के अनुसार, वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी के कारण ग्लेशियर रिकॉर्ड गति से पिघल रहे हैं। यह पिघलाव न केवल पानी के भंडार को कम कर रहा है, बल्कि कई ख़तरनाक परिणामों को जन्म दे रहा है:
1. जल संकट की आशंका
अल्पावधि में, तीव्र पिघलाव से नदियों में पानी का प्रवाह बढ़ सकता है, जिससे बाढ़ आ सकती है। लेकिन लंबी अवधि में, जब ग्लेशियर सिकुड़कर पूरी तरह गायब हो जाएंगे, तो नदी प्रणालियों का जल प्रवाह नाटकीय रूप से कम हो जाएगा। इससे उन क्षेत्रों में गंभीर जल संकट पैदा होगा जो अपनी आपूर्ति के लिए इन ग्लेशियरों पर निर्भर हैं।
2. समुद्र के स्तर में वृद्धि
ग्लेशियरों का पिघला हुआ पानी महासागरों में मिलता है, जो वैश्विक समुद्र के स्तर को बढ़ाता है। इससे दुनिया भर के तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए खतरा पैदा होता है। तटीय कटाव, खारे पानी का भूजल में प्रवेश और तूफ़ानों के कारण अधिक गंभीर बाढ़ जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।
3. ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOFs)
ग्लेशियरों के तेज़ी से पिघलने से पर्वतों में अस्थिर ग्लेशियल झीलें (Glacial Lakes) बनती हैं। इन झीलों के किनारे या बांध टूटने से अचानक और विनाशकारी बाढ़ आ सकती है, जिसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है। यह पर्वतीय समुदायों, बुनियादी ढांचों और निचले इलाक़ों के लिए तत्काल ख़तरा है।
4. पारिस्थितिक संतुलन में व्यवधान
पहाड़ी क्षेत्रों के स्थानीय जीव और वनस्पति ठंडे वातावरण और विशेष जल चक्र के आदी होते हैं। ग्लेशियरों के पिघलने से तापमान और जल की उपलब्धता में बदलाव आता है, जिससे कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहु़ंच सकती हैं, और पूरा पारिस्थितिक तंत्र बाधित हो सकता है।
इंटरनेशनल माउंटेन डे #InternationalMountainDay2025एक ही संदेश — “पर्वत बचेंगे तो मानवता बचेगी।” हिमालय केवल पर्वत नहीं, देवभूमि है—जल, वायु, जलवायु, जैव–विविधता और हमारी आध्यात्मिक चेतना का स्रोत। ग्लेशियर पिघल रहे हैं, नदियाँ बदल रही हैं, प्रकृति संकट में है। हिमालय की रक्षा… pic.twitter.com/kQsnpFrhgw
— Pujya Swamiji (@PujyaSwamiji) December 11, 2025
संरक्षण की दिशा में वैश्विक प्रयास
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस पर, यह आवश्यक है कि हम ग्लेशियरों को बचाने के लिए सामूहिक संकल्प लें। इसके लिए निम्नलिखित कदम महत्वपूर्ण हैं:
उत्सर्जन में कमी: ग्लेशियरों को बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम किया जाए और वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखा जाए। यह पेरिस समझौते के लक्ष्यों को सख़्ती से लागू करने से संभव है।
अनुकूलन: उन समुदायों की मदद करना जो पहले से ही ग्लेशियर पिघलने के प्रभावों का सामना कर रहे हैं। इसमें GLOFs के जोखिम को कम करने के लिए चेतावनी प्रणालियों और बुनियादी ढांचे को मज़बूत करना शामिल है।
अनुसंधान और निगरानी: ग्लेशियरों के स्वास्थ्य की सटीक निगरानी करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना।
सतत पर्यटन: पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन (Eco-tourism) को बढ़ावा देना, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ हो और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके।
पहाड़ों का भविष्य, हमारा भविष्य
ग्लेशियर केवल बर्फ़ के विशाल टुकड़े नहीं हैं; वे हमारी सभ्यता, कृषि और पारिस्थितिकी की जीवनरेखा हैं। अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस हमें याद दिलाता है कि पहाड़ों का स्वास्थ्य और उनकी 'बर्फ़ की नदियां' सीधे हमारे ग्रह के भविष्य से जुड़ी हैं। ग्लेशियरों को बचाने का अर्थ है करोड़ों लोगों के लिए पानी और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थिर ग्रह छोड़ना।