Sunday, 11th of January 2026

अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस: संघर्ष, साहस और सपनों की वैश्विक कहानी

Reported by: GTC News Desk  |  Edited by: Mohd Juber Khan  |  December 19th 2025 09:41 AM  |  Updated: December 19th 2025 09:41 AM
अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस: संघर्ष, साहस और सपनों की वैश्विक कहानी

अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस: संघर्ष, साहस और सपनों की वैश्विक कहानी

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: आज पूरी दुनिया 'अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस' (International Migrants Day) मना रही है। यह दिन उन करोड़ों लोगों के साहस और योगदान को समर्पित है, जो अपने घर-आँगन और वतन को पीछे छोड़कर एक अनिश्चित लेकिन बेहतर भविष्य की तलाश में सात समंदर पार चले जाते हैं। प्रवासन केवल एक भौगोलिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह मानवीय जिजीविषा और नए सपनों को गढ़ने की एक निरंतर प्रक्रिया है।

इस वर्ष की थीम: "मेरी महान कहानी: संस्कृति और विकास"

वर्ष 2025 के लिए संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन की थीम "मेरी महान कहानी: संस्कृति और विकास" (My Great Story: Culture and Development) रखी है। यह थीम प्रवासियों के व्यक्तिगत संघर्षों को सम्मान देने के साथ-साथ इस बात पर जोर देती है कि कैसे प्रवासी लोग अपनी संस्कृति से दूसरे देशों को समृद्ध करते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में विकास का इंजन बनते हैं।

क्यों मनाया जाता है यह दिन? (इतिहास और उद्देश्य)

प्रवासियों की बढ़ती संख्या और उनके अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता को देखते हुए, 4 दिसंबर 2000 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 18 दिसंबर को आधिकारिक रूप से 'अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस' घोषित किया था।

ऐतिहासिक संदर्भ: इसी दिन (18 दिसंबर) वर्ष 1990 में संयुक्त राष्ट्र ने सभी प्रवासी कामगारों और उनके परिवार के सदस्यों के अधिकारों के संरक्षण पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को अपनाया था।

मुख्य उद्देश्य: प्रवासियों के मानवाधिकारों की रक्षा करना, उनके सामने आने वाली चुनौतियों (जैसे शोषण और भेदभाव) के प्रति जागरूकता फैलाना और समाज में उनके आर्थिक व सांस्कृतिक योगदान का जश्न मनाना।

प्रवासन के मुख्य कारण और चुनौतियाँ

लोग अपना देश क्यों छोड़ते हैं? इसके पीछे कई गहरे कारण होते हैं:

रोजगार और आर्थिक अवसर: बेहतर वेतन और जीवन स्तर की तलाश।

शिक्षा: उच्च शिक्षा और कौशल विकास के लिए विदेशों का रुख।

सुरक्षा और संघर्ष: युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता या प्राकृतिक आपदाओं के कारण विस्थापन।

जलवायु परिवर्तन: बदलती जलवायु के कारण आजीविका छिनने से पलायन।

चुनौतियाँ: आज भी प्रवासियों को भाषा की बाधा, कानूनी दस्तावेज़ीकरण की समस्या, नस्लीय भेदभाव और असुरक्षित कार्य स्थितियों का सामना करना पड़ता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रवासियों का योगदान

प्रवासी केवल काम की तलाश में नहीं जाते, बल्कि वे मेज़बान देशों (Host Countries) के विकास में रीढ़ की हड्डी साबित होते हैं।

श्रम शक्ति: वे विकसित देशों में श्रम की कमी को पूरा करते हैं, चाहे वह निर्माण क्षेत्र हो, स्वास्थ्य सेवा या आईटी।

प्रेषण (Remittances): विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, प्रवासी अपने गृह देशों को अरबों डॉलर भेजते हैं, जिससे उनके देश की जीडीपी को मजबूती मिलती है। इसमें भारत दुनिया भर में शीर्ष पर बना हुआ है।

सांस्कृतिक विविधता: प्रवासी अपने साथ नया संगीत, भोजन, कला और विचार लेकर आते हैं, जो समाज को अधिक समावेशी बनाते हैं।

 साझा भविष्य की ओर

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने अपने संदेश में कहा है कि "प्रवासन एक समस्या नहीं, बल्कि समाधान का हिस्सा है।" आज का दिन हमें याद दिलाता है कि सीमाएं इंसानों को बांट सकती हैं, लेकिन मानवीय गरिमा और सम्मान सबका मौलिक अधिकार है। सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन ही वैश्विक शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।