GTC News: दुनिया अभी कोविड-19 के प्रभावों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि वैज्ञानिकों ने एक और बड़े ख़तरे—H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा—के प्रति आगाह किया है। भारतीय वैज्ञानिकों, विशेषकर अशोक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं (फिलिप चेरियन और गौतम मेनन), ने एक नया कंप्यूटर मॉडल 'BharatSim' पेश किया है। यह मॉडल दिखाता है कि कैसे पक्षियों से इंसानों में फैलने वाला यह वायरस एक शांत शुरुआत के बाद अचानक वैश्विक संकट बन सकता है।
भारतीय वैज्ञानिकों ने #AI मॉडल की मदद से बताया कि बर्ड फ्लू (#H5N1) इंसानों में कैसे फैलता है। अध्ययन ने प्राइमरी और सेकेंडरी केस की पहचान व नियंत्रण की अहमियत बताई। शुरुआती संक्रमण रोकने के लिए पक्षियों को अलग करना प्रभावी, बाद में पब्लिक हेल्थ उपाय जरूरी।ख़बर विस्तार से पढ़ने… pic.twitter.com/WyX6tmhCIl
— PB-SHABD (@PBSHABD) December 19, 2025
चिंता का मुख्य कारण: 'Spillover' और म्यूटेशन
वैज्ञानिकों के अनुसार, चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि H5N1 अब केवल पक्षियों तक सीमित नहीं रहा है। यह जंगली पक्षियों से पालतू मुर्गियों और अब स्तनधारियों (जैसे अमेरिका में डेयरी गायों और भारत में कुछ जंगली जानवरों) में फैल चुका है।
इंसानों में मृत्यु दर: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, 2003 से अगस्त 2025 तक इंसानों में H5N1 के 990 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 475 लोगों की मौत हो गई। यह लगभग 48% की मृत्यु दर है, जो इसे बेहद घातक बनाती है।
म्यूटेशन का ख़तरा: वैज्ञानिकों को डर है कि यदि कोई व्यक्ति एक ही समय में सामान्य फ्लू और बर्ड फ्लू दोनों से संक्रमित हो जाता है, तो वायरस के जीन आपस में मिल सकते हैं (Genetic Reassortment), जिससे इंसानों से इंसानों में फैलने वाला एक नया 'सुपर स्ट्रेन' बन सकता है।
भारतीय शोध: 10 केस के बाद बेक़ाबू हो सकता है वायरस
अशोक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गौतम मेनन और उनकी टीम ने तमिलनाडु के नमक्कल (पोल्ट्री हब) जैसे क्षेत्रों के डेटा का उपयोग करके एक सिमुलेशन तैयार किया है। इस शोध के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
छोटा विंडो पीरियड: यदि केवल 2 मामले मिलने पर तुरंत क्वारंटाइन और सख्त कदम उठाए जाएं, तो प्रसार को रोका जा सकता है।
खतरे की सीमा: एक बार जब संक्रमितों की संख्या 10 पार कर जाती है, तो वायरस को स्थानीय स्तर पर रोकना लगभग असंभव हो जाता है और यह तेजी से समुदायों में फैलने लगता है।
लक्षण: इंसानों में इसके लक्षण तेज़ बुखार, खांसी, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द और आंखों में संक्रमण (Conjunctivitis) के रूप में दिखाई देते हैं।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तैयारी
भारत सरकार ने झारखंड, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सक्रिय प्रकोप क्षेत्रों (Outbreak zones) की पहचान की है।
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII): सरकार और 'CEPI' के साथ मिलकर वैक्सीन के परीक्षण और निर्माण की दिशा में काम कर रहा है।
गाइडलाइंस: स्वास्थ्य मंत्रालय ने पोल्ट्री श्रमिकों के लिए मास्क और दस्ताने अनिवार्य करने और बीमार पक्षियों के संपर्क से बचने की सलाह दी है।
"H5N1 का ख़तरा वास्तविक है। हमें बेहतर निगरानी (Surveillance) और त्वरित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया की आवश्यकता है ताकि इसे महामारी बनने से रोका जा सके।"
— प्रोफेसर गौतम मेनन, अशोक यूनिवर्सिटी
आम जनता के लिए सावधानियां
विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता ज़रूरी है:
मुर्गे या अंडे को 70°C से ऊपर तापमान पर अच्छी तरह पकाकर खाएं।
बीमार या मृत पक्षियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
हाथों की स्वच्छता (Hand Hygiene) का विशेष ध्यान रखें।