Friday, 10th of July 2026

अयोध्या गैंगरेप कांड: मोईद ख़ान बरी, नौकर दोषी, अब हो रही हैं तरह-तरह की बातें ...

Edited By: Mohd Juber Khan | Updated at: January 29th 2026 01:28 PM
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अयोध्या गैंगरेप कांड: मोईद ख़ान बरी, नौकर दोषी, अब हो रही हैं तरह-तरह की बातें ...

अयोध्या गैंगरेप कांड: मोईद ख़ान बरी, नौकर दोषी, अब हो रही हैं तरह-तरह की बातें ...

अयोध्या: अयोध्या की एक विशेष अदालत ने क़रीब डेढ़ साल चले मुक़दमे के बाद भदरसा गैंगरेप कांड में अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने सबूतों के अभाव और वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर मोईद ख़ान को दोषमुक्त कर दिया।

1. बरी होने का सबसे बड़ा आधार: DNA रिपोर्ट

इस केस में वैज्ञानिक साक्ष्य (Scientific Evidence) मोईद ख़ान के लिए सबसे निर्णायक साबित हुए।

नेगेटिव रिपोर्ट: जांच के दौरान पीड़िता के भ्रूण (Foetus) का डीएनए सैंपल लिया गया था। लैब रिपोर्ट में ख़ुलासा हुआ कि डीएनए का मोईद ख़ान से मिलान नहीं हुआ।

नौकर का सैंपल मैच: इसके विपरीत, सह-आरोपी और मोईद ख़ान के नौकर राजू ख़ान का डीएनए पीड़िता के सैंपल से मैच कर गया। इसने कोर्ट में साफ़ कर दिया कि शारीरिक शोषण में मोईद ख़ान की जैविक भूमिका साबित नहीं होती।

2. गवाहों के बयान और पीड़िता की मां का रुख़

ट्रायल के दौरान पीड़िता की मां और अन्य गवाहों के बयानों में आए विरोधाभास ने भी मोईद ख़ान के पक्ष को मज़बूत किया। शुरू में जहां आरोप सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) के थे, वहीं कोर्ट की कार्यवाही के दौरान कई कड़ियां मोईद ख़ान के ख़िलाफ़ कमज़ोर पड़ती गईं।

3. 'बुलडोजर न्याय' पर उठा सवाल

जुलाई 2024 में जब यह मामला सामने आया था, तब प्रशासन ने मोईद ख़ान के ख़िलाफ़ बेहद सख़्त रुख़ अपनाया था:

मोईद ख़ान की बेकरी और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को अवैध बताकर बुलडोज़र से ढहा दिया गया था।

विपक्षी दलों ने तब इसे "पॉलिटिकल वेंडेटा" (राजनीतिक द्वेष) बताया था। अब कोर्ट से बरी होने के बाद, प्रशासन की उस आनन-फ़ानन में की गई कार्रवाई और बिना दोष सिद्ध हुए संपत्ति गिराने पर सवाल उठ रहे हैं।

4. क्या था पूरा मामला?

यह घटना अयोध्या के पूराकलंदर थाना क्षेत्र के भदरसा की है। 12 वर्षीय नाबालिग लड़की मोईद ख़ान की बेकरी में काम करती थी। आरोप लगा था कि मोईद और उसके नौकर राजू ने बच्ची के साथ कई महीनों तक दुष्कर्म किया और वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया। मामला तब खुला जब लड़की गर्भवती हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस मामले का संज्ञान लिया था और विधानसभा में भी यह मुद्दा गूंजा था।

5. अब आगे क्या?

कोर्ट ने राजू ख़ान को दोषी पाया है और उसकी सज़ा का ऐलान 29 जनवरी 2026 को किया जाएगा। दूसरी ओर, मोईद ख़ान के वकील का कहना है कि वे अब अपनी छवि ख़राब करने और संपत्ति के नुकसान के लिए क़ानूनी विकल्प तलाशेंगे।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

मोईद ख़ान के बरी होने पर समाजवादी पार्टी ने इसे "सत्य की जीत" बताया है, जबकि सरकार की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। संभव है कि अभियोजन पक्ष इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब समाजवादी पार्टी प्रदेश की योगी सरकार पर हमलावर हो गई है।

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