मेरठ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड (Lalita Gautam Murder Case) में मुख्यमंत्री ने शनिवार, 18 जुलाई 2026 को गाजियाबाद के पीडब्ल्यूडी (PWD) गेस्ट हाउस में पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
इस मुलाकात के दौरान सीएम योगी भावुक नजर आए और उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाते हुए न केवल आर्थिक मदद का ऐलान किया, बल्कि दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई का आश्वासन भी दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में कोई ढिलाई पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है।
मुख्यमंत्री ने की बड़ी घोषणाएं: परिवार को मिलेगा सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए तत्काल सहायता के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने ललिता गौतम के परिजनों के लिए निम्नलिखित घोषणाएं की हैं:
मुख्यमंत्री ने कहा, "सरकार दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है। ललिता को न्याय दिलाना हमारी प्राथमिकता है और परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी प्रशासन सुनिश्चित करेगा।"

क्या था ललिता गौतम हत्याकांड?
मेरठ के टीपी नगर क्षेत्र के गगन एंक्लेव की रहने वाली 20 वर्षीय ललिता गौतम एक मेधावी छात्रा थी। वह बीए (BA) की पढ़ाई कर रही थी और अपने भविष्य को लेकर काफी गंभीर थी। लेकिन एक सिरफिरे की सनक ने उसके तमाम सपनों को मिट्टी में मिला दिया।
घटना का घटनाक्रम:
पुलिस ने शक के आधार पर अंकुश को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी टूट गया और उसने ललिता की हत्या की बात कबूल कर ली। आरोपी ने बताया कि उसने ललिता के शव को मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र के उपसिया जंगल स्थित एक गन्ने के खेत में फेंक दिया था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर शव को बरामद किया।
हत्या के पीछे की वजह: शक और सनक
आरोपी अंकुश ने पुलिस को बताया कि उसके और ललिता के बीच प्रेम संबंध थे। हालांकि, बीते कुछ समय से अंकुश को शक होने लगा था कि ललिता का किसी अन्य युवक के साथ भी संबंध है। इसी शक और जलन की आग में जलते हुए उसने ललिता को रास्ते से हटाने की साजिश रची। उसने ललिता को मिलने के बहाने बुलाया और सुनसान जगह ले जाकर उसकी जान ले ली।
हालांकि, ललिता के परिजनों का मानना है कि इस हत्याकांड में केवल अंकुश ही शामिल नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान आशंका जताई कि इस साजिश में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच (Deep Probe) की मांग की है।
सीएम की अधिकारियों को फटकार: "लापरवाही पर होगी जेल"
गाजियाबाद में हुई इस मुलाकात के दौरान सीएम योगी ने मेरठ के आला अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की। उन्होंने कहा कि विवेचना में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं होनी चाहिए। सीएम ने साफ शब्दों में कहा, "दोषी किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाएंगे। अगर विवेचना में किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उस पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।" मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मुकदमे की पैरवी फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में की जाए ताकि ललिता के हत्यारे को जल्द से जल्द सजा मिल सके। मुख्यमंत्री के इस रुख से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है और जांच को अब नए सिरे से और अधिक तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा: सरकार का कड़ा रुख
ललिता गौतम हत्याकांड पर मुख्यमंत्री का यह कड़ा रुख उत्तर प्रदेश सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति को दर्शाता है। इससे पहले भी सीएम योगी ने अमरोहा और अन्य जनसभाओं में कहा है कि "जो बेटियों और व्यापारियों की सुरक्षा में सेंध लगाएगा, उसके लिए केवल दो जगह हैं- जेल या जहन्नुम।" सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की हर बेटी निडर होकर घर से बाहर निकल सके। ललिता गौतम के मामले में मुख्यमंत्री का स्वयं परिवार से मिलना और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन देना, कानून व्यवस्था के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करने की एक कोशिश है।
परिवार की मांग: "हमें सिर्फ इंसाफ चाहिए"
ललिता के पिता और चाचा ने मुख्यमंत्री को बताया कि आर्थिक मदद और आवास के लिए वे सरकार के आभारी हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी मांग 'न्याय' है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में जो भी पर्दे के पीछे के खिलाड़ी हैं, उन्हें बेनकाब किया जाए। सीएम योगी ने परिवार को आश्वस्त किया कि पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है और कोई भी गुनहगार बच नहीं पाएगा।