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संभल/चंदौसी: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में आज न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में उस वक्त भारी तनाव देखा गया, जब संभल (चंदौसी) कोर्ट के वकीलों ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर के अचानक हुए तबादले के विरोध में काम रोककर ज़ोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने "जज साहब को वापस लाओ" के नारे लगाते हुए इस स्थानांतरण को न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव क़रार दिया।
संभल की सड़कों पर वकीलों का ये गुस्सा और ये नारा यूं ही नहीं गूंज रहा है। ये चीख-चीख कर बता रहा है कि उत्तर प्रदेश में अब कानून का राज नहीं, बल्कि 'खौफ का राज' चलाने की कोशिश हो रही है।पूरा मामला समझिए— संभल हिंसा में जब जज (CJM) विभांशु सुधीर ने वर्दी की आड़ में छिपे गुनहगारों… pic.twitter.com/CrLn9a519R
— UP Congress (@INCUttarPradesh) January 21, 2026
विवाद की मुख्य जड़: ASP अनुज चौधरी पर FIR का आदेश
यह पूरा विवाद नवंबर 2024 में हुई संभल हिंसा से जुड़ा है।
न्यायिक आदेश: 19 जनवरी को CJM विभांशु सुधीर ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तत्कालीन सीओ (अब एएसपी) अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर और 15-20 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था।
आरोप: यह आदेश यामीन नामक व्यक्ति की याचिका पर दिया गया था, जिसका आरोप है कि हिंसा के दौरान पुलिस की गोली लगने से उसका 24 वर्षीय बेटा आलम गंभीर रूप से घायल हो गया था।
पुलिस का रुख़: आदेश के बाद संभल एसपी ने साफ़ कर दिया था कि वे FIR दर्ज नहीं करेंगे और इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
अचानक तबादले ने खड़े किए सवाल
FIR के आदेश के महज़ कुछ घंटों बाद ही इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जारी प्रशासनिक सूची में CJM विभांशु सुधीर का नाम भी शामिल था। उन्हें संभल से हटाकर सुल्तानपुर में सिविल जज (सीनियर डिवीज़न) के पद पर तैनात किया गया है।
"जब किसी न्यायधीश द्वारा सत्ता या पुलिस के खिलाफ कड़ा फैसला लिया जाता है और तुरंत उनका तबादला कर दिया जाता है, तो यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाता है। हम इस तबादले का कड़ा विरोध करते हैं।" — प्रदर्शनकारी अधिवक्ता, संभल कोर्ट
वकीलों का प्रदर्शन और मांग
बुधवार सुबह जैसे ही कोर्ट खुली, बड़ी संख्या में अधिवक्ता परिसर में एकत्रित हो गए और नारेबाज़ी शुरू कर दी।
कार्य बहिष्कार: वकीलों ने न्यायिक कार्यों का पूरी तरह बहिष्कार किया, जिससे कोर्ट में आए फ़रियादियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
आरोप: अधिवक्ताओं का आरोप है कि पुलिस प्रशासन के दबाव में आकर यह तबादला किया गया है ताकि FIR की प्रक्रिया को रोका जा सके।
नया पदभार: विभांशु सुधीर की जगह अब आदित्या सिंह को संभल का नया CJM नियुक्त किया गया है।
#WATCH लखनऊ: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने CO अनुज चौधरी पर FIR के आदेश के बाद संभल के CJM विभांशु सुधीर के तबादले पर कहा, "मुझे उम्मीद है कि इस पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट खुद संज्ञान लेगा। मैं समझता हूं कि इस बात पर देश के बुद्धिजीवी और जज स्वयं संज्ञान लेंगे।" pic.twitter.com/KAMzktGiJn
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 21, 2026
मामले की पृष्ठभूमि: नवंबर 2024 संभल हिंसा
संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस पर आरोप लगे थे कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर सीधी फायरिंग की, जबकि पुलिस का दावा था कि उन्होंने केवल आत्मरक्षा में 'हल्का बल' प्रयोग किया था।
कुल-मिलाकर CJM विभांशु सुधीर के तबादले ने न केवल संभल बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों और नागरिक अधिकार समूहों ने इसे "न्याय का गला घोंटने" की कोशिश बताया है, जबकि प्रशासन इसे एक नियमित प्रक्रिया क़रार दे रहा है।