Saturday, 21st of March 2026

योगी सरकार का बड़ा फ़ैसला, कानपुर में बसाए जाएंगे बांग्लादेश के 99 हिंदू परिवार

By: GTC News Desk | Edited By: Mohd Juber Khan | Updated at: January 30th 2026 12:35 PM
योगी सरकार का बड़ा फ़ैसला, कानपुर में बसाए जाएंगे बांग्लादेश के 99 हिंदू परिवार

योगी सरकार का बड़ा फ़ैसला, कानपुर में बसाए जाएंगे बांग्लादेश के 99 हिंदू परिवार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वर्षों से विस्थापित जीवन जी रहे हिंदू बंगाली परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक और मानवीय फ़ैसला लिया है। कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फै़सले के तहत बांग्लादेश से आए 99 परिवारों को कानपुर देहात में स्थायी रूप से बसाया जाएगा।

प्रदेश के वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी साझा की। 

पुनर्वास का मुख्य कारण: एनजीटी के आदेश और झील संरक्षण

वर्तमान में ये 99 हिंदू बंगाली परिवार मेरठ ज़िले की मवाना तहसील के ग्राम नंगला गोसाई में निवास कर रहे हैं।

विवादित भूमि: ये परिवार लंबे समय से एक ऐसी भूमि पर रह रहे थे जो राजस्व रिकॉर्ड में 'झील' के रूप में दर्ज है।

क़ानूनी पहलू: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पर्यावरण संरक्षण संबंधी आदेशों के अनुपालन में इस झील की भूमि को खाली कराया जाना आवश्यक था।

मानवीय दृष्टिकोण: इन परिवारों की बेदखली के बजाय, सरकार ने इनके सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य के लिए इन्हें कानपुर देहात में पुनर्वासित करने का रास्ता चुना।

कानपुर देहात में कहां और कैसे होगा पुनर्वास?

कैबिनेट के प्रस्ताव के अनुसार, इन परिवारों को कानपुर देहात ज़िले की रसूलाबाद तहसील के दो अलग-अलग गांवों में बसाया जाएगा:

ग्राम भैंसाया: यहां पुनर्वास विभाग की 11.1375 हेक्टेयर (लगभग 27.5 एकड़) भूमि पर 50 परिवारों को बसाया जाएगा।

ग्राम ताजपुर तरसौली: यहां 10.530 हेक्टेयर भूमि पर बाक़ी 49 परिवारों के रहने की व्यवस्था की जाएगी।

आवंटन की शर्तें:

आधा एकड़ ज़मीन: प्रत्येक परिवार को आवास और खेती के लिए 0.50 एकड़ (आधा एकड़) ज़मीन आवंटित की जाएगी।

90 साल का पट्टा: यह ज़मीन प्रीमियम या लीज रेंट के आधार पर 30 साल के पट्टे (Lease) पर दी जाएगी। इस पट्टे को 30-30 साल के लिए दो बार और बढ़ाया जा सकता है, जिससे यह कुल 90 वर्षों के लिए सुरक्षित हो जाएगा।

ऐतिहासिक संदर्भ: 1970 से जारी था संघर्ष

ये परिवार मूल रूप से 1970 के दशक में पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश आए थे।

पुरानी व्यवस्था: उस समय की सरकार ने इन्हें मेरठ के हस्तिनापुर की 'मदन कॉटन मिल' में रोज़गार दिया था।

संकट: 1984 में मिल बंद होने के बाद इन परिवारों के सामने आजीविका और आवास का गहरा संकट खड़ा हो गया था, जिसके बाद वे नंगला गोसाई में अस्थाई रूप से बस गए थे।

अन्य महत्वपूर्ण कैबिनेट निर्णय

पुनर्वास के अलावा कैबिनेट ने कुछ और बड़े फैसलों पर भी मुहर लगाई:

प्राकृतिक आपदा राहत: बहराइच और अन्य क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को भी मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकान और ज़मीन के पट्टे देने की मंज़ूरी दी गई।

शहरी विकास: 'अर्बन रीडेवलपमेंट पॉलिसी 2026' को मंज़ूरी दी गई, जिससे शहरों का नियोजित विकास सुनिश्चित होगा।

बहरहाल, योगी सरकार का यह क़दम न केवल पर्यावरण (झील) के संरक्षण को सुनिश्चित करता है, बल्कि विस्थापितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उनके "सम्मानजनक पुनर्वास" के वादे को भी पूरा करता है।