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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) का आज भव्य समापन हुआ। तीन दिनों तक चले इस मंथन शिविर में देश भर के विधायी निकायों के प्रमुखों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने पर गहरा विचार-विमर्श किया।
86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन हेतु लखनऊ में आयोजित समारोह में... https://t.co/MUnESnN0mG
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) January 21, 2026
आस्था और एकता का केंद्र: संसद
समापन समारोह को संबोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और भाषाई विभिन्नता का उल्लेख करते हुए एक अत्यंत प्रेरणादायी विचार साझा किया। उन्होंने कहा:
"देश के अंदर रूप-रंग, वेशभूषा एवं खान-पान अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन पूरा भारत एक भाव-भंगिमा के साथ बोलता है तथा उसकी एक आस्था होती है। उस आस्था को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम हमारी संसद और हमारी विधानसभाएं हैं।"
Address at the Valedictory Session of the 86th All India Presiding Officers Conference (AIPOC) held at the Uttar Pradesh Vidhan Sabha, Lucknow. #AIPOC2026 https://t.co/feOF3PZVqi
— Om Birla (@ombirlakota) January 21, 2026
ओम बिरला ने इस बात पर ज़ोर दिया कि संसद केवल क़ानून बनाने की जगह नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों की साझा आकांक्षाओं और अटूट विश्वास का प्रतीक है।
सम्मेलन के प्रमुख बिंदु और सहभागिता
लखनऊ के विधान भवन में आयोजित इस गरिमामय समारोह में देश की कई बड़ी संवैधानिक विभूतियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान मंच पर निम्नलिखित महानुभाव उपस्थित रहे:
ओम बिरला, माननीय अध्यक्ष, लोक सभा
हरिवंश, माननीय उप सभापति, राज्य सभा
सतीश महाना, माननीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश विधान सभा
कुँवर मानवेन्द्र सिंह, माननीय सभापति, उत्तर प्रदेश विधान परिषद
तीन दिवसीय मंथन का निचोड़
19 जनवरी से शुरू हुए इस सम्मेलन में मुख्य रूप से तीन विषयों पर चर्चा की गई:
तकनीक का उपयोग: विधायी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए डिजिटल साधनों और AI का बेहतर इस्तेमाल।
क्षमता निर्माण: विधायकों और जनप्रतिनिधियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण।
जवाबदेही: जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही को और अधिक मज़बूत करना।
लोक सभा अध्यक्ष ने राज्य विधानसभाओं की कार्यप्रणाली में गुणवत्ता लाने और उनके सत्रों की अवधि बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया, ताकि जनता की समस्याओं पर गंभीर और परिणामोन्मुखी चर्चा हो सके।
उत्तर प्रदेश की मेज़बानी की सराहना
सम्मेलन के सफ़ल आयोजन के लिए ओम बिरला ने उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष सतीश महाना और विधान परिषद के सभापति कुँवर मानवेन्द्र सिंह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने यूपी विधानसभा में अपनाई गई 'बेस्ट प्रैक्टिसेस' और नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि अन्य राज्यों को भी ऐसे तकनीकी बदलावों से सीखना चाहिए।
बहरहाल ऐसा मानकर चला जा रहा है कि यह सम्मेलन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा, जहां 'एक राष्ट्र, एक विधायी मंच' की दिशा में क़दम बढ़ाते हुए सभी राज्यों ने आपसी समन्वय और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखने का संकल्प लिया।